धूप से चलेगी, पंखा भी चलाएगी! भागलपुर के दिव्यांग युवक ने कबाड़ से बनाई सोलर ट्राइसाइकिल; जीरो खर्च में पूरा सफर
Solar Tricycle Innovation भागलपुर के दिव्यांग मोहम्मद रहमतुल्लाह ने कबाड़ से एक अनोखी सोलर ट्राइसाइकिल बनाई है, जो धूप से ...और पढ़ें

भागलपुर के कचहरी चौक पर मोहम्मद रहमतुल्लाह द्वारा निर्मित सोलर पैनल युक्त अनोखी ट्राइसाइकिल
HighLights
दिव्यांग मोहम्मद रहमतुल्लाह ने बनाई अनोखी सोलर ट्राइसाइकिल।
यह ट्राइसाइकिल धूप से चलती है और पंखा भी चलाती है।
कबाड़ से बनी यह गाड़ी जीरो खर्च में सफर कराती है।
डिजिटल डेस्क, भागलपुर। Solar Tricycle Innovation जरूरत जब हौसले से मिलती है, तो अभावों के बीच भी नवाचार की नई राहें निकल आती हैं। भागलपुर की सड़कों पर इन दिनों दौड़ रही एक अनोखी ट्राइसाइकिल राहगीरों के बीच भारी कौतूहल और आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। यह कोई सामान्य पैडल या बैटरी वाली गाड़ी नहीं, बल्कि सीधे धूप से ऊर्जा लेकर चलने वाली हाईटेक 'सोलर ट्राइसाइकिल' है।
इस अद्भुत वाहन को भागलपुर जिले के सन्हौला प्रखंड अंतर्गत सनोखर गांव के रहने वाले दिव्यांग मोहम्मद रहमतुल्लाह ने अपनी मेधा और देसी जुगाड़ की बदौलत तैयार किया है। इस ट्राइसाइकिल की सबसे बड़ी खूबी इसकी छत पर लगे दो सोलर प्लेट हैं। यह पैनल दिन के उजाले में सौर ऊर्जा सोखकर गाड़ी को रफ्तार तो देते ही हैं, साथ ही भीषण गर्मी में वाहन चालक को धूप से बचाने के लिए शेड (छत) का काम भी करते हैं।
इतना ही नहीं, चालक को पसीने से राहत देने के लिए इसमें एक छोटा पंखा भी लगाया गया है, जो सौर ऊर्जा से ही चलता है। शहर के व्यस्ततम कचहरी चौक से जब यह ट्राइसाइकिल गुजरी, तो राहगीरों और वाहन चालकों ने रुककर इसे निहारा और युवक के इस अनूठे प्रयास की खुलकर सराहना की।
कबाड़ के सामान से तराशा मॉडल
पेट्रोल-डीजल के लगातार बढ़ते दाम और बाजार में मिलने वाली मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल को घंटों बिजली से चार्ज करने की विवशता ने रहमतुल्लाह को इस विकल्प को तलाशने के लिए प्रेरित किया। सामान्य इलेक्ट्रिक ट्राइसाइकिल की सीमित रेंज और बिजली बिल की चिंता को उन्होंने सौर ऊर्जा के जरिए पूरी तरह समाप्त कर दिया है।
चार्जिंग का झंझट खत्म
रहमतुल्लाह ने बताया कि आर्थिक तंगी के कारण उन्होंने कबाड़ से उपयोगी कलपुर्जे एकत्र किए और बहुत कम पूंजी लगाकर इसे असेंबल किया। ट्राइसाइकिल पर करीब 100 वॉट का सोलर पैनल फिट किया गया है, जो एक छोटी रिचार्जेबल बैटरी को धूप के संपर्क में आते ही चार्ज करना शुरू कर देता है। इसके चलते दिनभर यह धूप में बिना रुके चलती रहती है और इसका रनिंग खर्च लगभग शून्य है।
ग्रीन एनर्जी और आत्मनिर्भर भारत की जीती-जागती मिसाल
पर्यावरण संरक्षण और 'ग्रीन मोबिलिटी' के दृष्टिकोण से यह देसी आविष्कार बेहद प्रेरणादायक है। इससे न तो किसी प्रकार का हानिकारक धुआं निकलता है और न ही ध्वनि प्रदूषण होता है। जब समूचा देश प्रधानमंत्री के राष्ट्रीय सौर मिशन और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को आगे बढ़ा रहा है, ऐसे समय में ग्रामीण परिवेश के एक दिव्यांग द्वारा सीमित संसाधनों में तैयार यह मॉडल स्पष्ट करता है कि मजबूत इच्छाशक्ति किसी भी बाधा से बड़ी होती है।
स्थानीय नागरिकों और बुद्धिजीवियों का मानना है कि यदि इस प्रोटोटाइप को सरकारी कल्याणकारी योजनाओं, तकनीकी संस्थानों या सामाजिक संगठनों का सहयोग मिले, तो इसके संतुलन और चेसिस की मजबूती को और बेहतर बनाकर बड़े पैमाने पर दिव्यांगजनों के लिए एक मुकम्मल और किफायती साधन के रूप में विकसित किया जा सकता है।
