भागलपुर [आलोक कुमार मिश्रा]। दुष्कर्म जैसी वारदात को अंजाम देने वाले सात दरिंदे इस समय शहीद जुब्बा सहनी केंद्रीय कारा, भागलपुर में बंद हैं, जिन्हें फांसी की सजा सुनाई जा चुकी है। इन पर मौत की तलवार लटक रही है, पर मामला अपील में होने के कारण इनकी गर्दन फंदों से बची हुई है। इनमें दो पर पाक्सो एक्ट के तहत मामले दर्ज किए गए थे। जिला अदालत ने इन सभी को फांसी की सजा सुनाई थी। इनका मामला उच्च न्यायालय में विचाराधीन है। दुष्कर्म के बाद हत्या के मामले में 23 फरवरी 2017 को फांसी की सजा पाने वाले सबौर निवासी मुन्ना पांडेय का मामला सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन है। पांच अन्य अभियुक्तों ने पटना उच्च न्यायालय में अपील कर रखी है।

जिन्हें दी गई है सजा

--मुन्ना पांडेय : 23 फरवरी 2017 को दुष्कर्म एवं हत्या मामले में सजा। पॉक्सो एक्ट भी लगा था।

--मनीष मंडल उर्फ नेपाली मंडल : 07 मई 2016 को अपहरण, अप्राकृतिक यौनाचार व हत्या मामले मे दी गई सजा।

--ध्रुव सहनी : 15 नवंबर 2017 को दुष्कर्म एवं हत्या मामले में सजा।

--सोनू कुमार : 15 फरवरी 2018 को दुष्कर्म एवं हत्या मामले में सजा।

--प्रशांत कुमार मेहता : 15 फरवरी 2018 को दुष्कर्म एवं हत्या मामले में सजा।

--जियाउद्दीन उर्फ धन्नू : 08 मई 2019 को अपहरण, दुष्कर्म व हत्या मामले में सजा। पॉक्सो एक्ट भी लगा था।

--रूपेश कुमार मंडल : 15 फरवरी 2018 को दुष्कर्म एवं हत्या मामले में सजा

हत्या के पांच अभियुक्तों को भी फांसी की सजा

पांच अन्य बंदियों को हत्या के मामले में फांसी की सजा दी गई है। इनमें एक ने राष्ट्रपति के यहां दया याचिका दी थी, लेकिन वहां से याचिका खारिज हो गई।

--जगत राय : 30 अक्टूबर 2009 को हत्या के मामले में सजा। राष्ट्रपति द्वारा क्षमा याचना को खारिज कर दिया गया। उच्च न्यायालय, नई दिल्ली में रिट पीटिशन (सीआरएल)-3417/18 के द्वारा दंडादेश के कार्यान्वयन पर रोक लगाई गई है।

--विपत राय उर्फ दीपक राय : 30 अक्टूबर 2009 को हत्या मामले में सजा। दया याचिका राष्ट्रपति के पास लंबित।

--ओंकारनाथ सिंह उर्फ शेरू सिंह : 16 मई 2016 को हत्या मामले में सजा। उच्च न्यायालय, पटना में मामला लंबित।

--अजीत कुमार : 30 जून 2018 को हत्या मामले में सजा। मामला उच्च न्यायालय पटना में लंबित।

--निरंजन उर्फ अलखदेव कुमार : 23 जनवरी 2018 को हत्या मामले में सजा। मामला उच्च न्यायालय, पटना में लंबित।

-संजय कुमार चौधरी (अधीक्षक, शहीद जुब्बा सहनी, केंद्रीय कारा भागलपुर) ने कहा कि केंद्रीय कारा में फांसी की सजा प्राप्त 12 बंदी हैं। आठ बंदियों ने उच्च न्यायालय में अपील की है। एक का मामला सर्वोच्च न्यायालय में लंबित है। एक बंदी की याचिका राष्ट्रपति द्वारा खारिज कर दी गई है।

Posted By: Dilip Shukla

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