बिहार विधानसभा चुनाव में वफादारी बनी उमा भूषण की मौत की वजह? भीतरघातियों की आंख की किरकिरी बने थे भागलपुर के BJP नेता
Bhagalpur BJP Uma Bhushan Tanti Murder: भागलपुर में भाजपा मंडल अध्यक्ष उमा भूषण तांती की सनसनीखेज हत्या के बाद राजनीतिक ...और पढ़ें

Bhagalpur BJP Uma Bhushan Tanti Murder: भीतरघातियों की किरकिरी बने थे उमा भूषण तांती, विधानसभा चुनाव के बाद से ही रची जा रही थी हत्या की साजिश?
HighLights
भाजपा मंडल अध्यक्ष उमा भूषण तांती की हत्या से राजनीतिक गलियारों में हलचल।
विधानसभा चुनाव में पार्टी के प्रति वफादारी बनी मौत का कारण।
भीतरघातियों और षड्यंत्रकारियों पर टिकी हैं अब सभी की निगाहें।
जागरण संवाददाता, भागलपुर। Bhagalpur BJP Uma Bhushan Tanti Murder: भागलपुर नगर विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत भाजपा के निष्ठावान सिपाही और मंडल अध्यक्ष उमा भूषण तांती की सनसनीखेज हत्या के बाद अब राजनीतिक गलियारों में भीतरघात और साठगांठ की परतें खुलने लगी हैं। इलाके में यह चर्चा पूरी ताकत से जोर पकड़ चुकी है कि क्या उमा भूषण तांती को पार्टी के प्रति अटूट वफादारी निभाने की ही खौफनाक कीमत अपनी जान देकर चुकानी पड़ी?
स्थानीय राजनीतिक जानकारों और प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो बीते विधानसभा चुनाव में दक्षिणी क्षेत्र (जो कभी जनसंघ और भाजपा का अभेद्य किला माना जाता था) में पार्टी की पुरानी पैठ फिर से कायम करने में उमा की सफलता ही उन दागियों की आंखों में चुभने लगी थी, जो पर्दे के पीछे विरोधी खेमे से भारी सौदेबाजी कर चुके थे। कहा जा रहा है कि विधानसभा चुनाव के परिणाम आने के बाद से ही भीतरघात करने वाले कुछ तथाकथित रसूखदार नेताओं के मंसूबों पर पानी फिर गया था।
दरअसल, चुनाव के दौरान कुछ दागी चेहरों ने पार्टी लाइन से बिल्कुल अलग जाकर निजी स्वार्थों का ताना-बाना बुन रखा था। वे खुले तौर पर भले सामने नहीं आ रहे थे, लेकिन मतदान के नजदीक आते-आते उनकी संदिग्ध और विरोधी गतिविधियां आम मतदाताओं की नजरों में बेनकाब हो चुकी थीं। दबी जुबान अब यह बात तेजी से उठ रही है कि उमा भूषण तांती की हत्या की खूनी पटकथा भी उसी दौर में उपजी सियासी तनातनी और आपसी विद्वेष के बीच लिखी जाने लगी थी।
मंत्रियों के इर्द-गिर्द रहकर रसद पहुंचाने वाले बेनकाब
चर्चाओं के केंद्र में वह भीतरघाती गुट है, जो चोरी-छिपे इलाके के मतदाताओं को बरगलाने में जुटा था। वे दल-विरोधी गतिविधियों को हवा देते हुए यह प्रचारित कर रहे थे कि यही सही वक्त है अपनी वोट की ताकत से पार्टी प्रत्याशी को मात देने का, ताकि भविष्य में अपनों के बीच का कोई नया 'रहनुमा' खड़ा हो सके।
विधानसभा चुनाव में पार्टी लाइन पर अडिग रहकर दक्षिणी भागलपुर में भाजपा की पुरानी पैठ लौटाने वाले उमा भूषण तांती बन गए थे भीतरघातियों की किरकिरी
विरोधी खेमे से सौदेबाजी करने वाले सफेदपोश दागियों को रास नहीं आ रही थी उमा भूषण की बढ़ती लोकप्रियता, चुनाव बाद से ही रची जाने लगी थी साजिश
मंत्रियों और विधायकों के इर्द-गिर्द घूमकर खुद को पाक-साफ दिखाने वाले एक नेता पर भीतरघात मुहिम को रसद-कुमुक पहुंचाने का गंभीर आरोप
चेतावनी के बावजूद मैदान में डटे रहे थे उमा; समर्पित कार्यकर्ताओं और महिला नेत्री के सहयोग से नाकाम कर दी थी गद्दारों की चाल
इसके लिए बाकायदा एक नेता ने खुद को पार्टी के शीर्ष मंत्रियों और विधायकों के इर्द-गिर्द बनाए रखकर निष्ठावान दिखने का स्वांग रचा, जबकि पर्दे के पीछे से भीतरघातियों की पूरी मुहिम को रसद और कुमुक पहुंचाई जा रही थी। हालांकि, भगवा का मजबूत गढ़ माने जाने वाले दक्षिणी खंड के सजग कार्यकर्ताओं और जनता ने उन पर भरोसा नहीं किया, क्योंकि उनकी अंदरूनी सौदेबाजी जगजाहिर हो चुकी थी।
दूसरी तरफ, उमा भूषण तांती ने बूथ स्तर तक वफादारी निभाते हुए आम जनता के बीच अपनी गहरी पैठ बना ली। उन्हें एक प्रतिष्ठित महिला नेत्री और उनके पति सहित कई पुराने समर्पित कार्यकर्ताओं का साथ मिला, जिन्होंने लोगों को यह समझाने में सफलता पाई कि गद्दारों के बहकावे में आने के बजाय संगठन की मूल विचारधारा पर चलने से ही समाज का भला होगा।
जनसरोकार ऐसा कि फीकी पड़ गई दागियों की चमक
जमीनी सरोकारों से जुड़े उमा भूषण तांती का व्यक्तित्व और समाज में प्रभाव इतना व्यापक था कि पार्टी लाइन से भटके दागियों की चमक पूरी तरह फीकी पड़ गई थी। चुनाव के दौरान उमा को इशारों-इशारों में कई बार यह समझाने और डराने की कोशिश भी की गई थी कि वे चुनाव में ज्यादा बढ़-चढ़कर हिस्सा न लें और खुद को पीछे रखें।
मगर, अपनी धुन के पक्के और संगठन के प्रति समर्पित उमा भूषण किसी दबाव के आगे नहीं झुके। वे रोज जनता के बीच डटे रहे और भटके हुए पुराने कार्यकर्ताओं की संगठन में घर-वापसी की राह आसान करते रहे। अब जब उनकी नृशंस हत्या हो चुकी है, तो आम जनमानस और संगठन के वफादार कार्यकर्ताओं की निगाहें उन भीतरघातियों और पर्दे के पीछे बैठे षड्यंत्रकारियों पर टिक गई हैं, जिनकी गद्दारी पर उमा की निष्ठा भारी पड़ रही थी।
