बीएयू सबौर का बड़ा तोहफा! अत्याधुनिक लैब में मिलेगा मशरूम का बीज और बाजार, छोटे किसानों की बदलेगी तकदीर
BAU Sabour Mushroom Lab: बिहार कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू) सबौर ने एक अत्याधुनिक मशरूम प्रयोगशाला स्थापित की है, जो किसानों और ...और पढ़ें
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BAU Sabour Mushroom Lab: अत्याधुनिक लैब में मिलेगा मशरूम का बीज और बाजार
HighLights
अत्याधुनिक मशरूम लैब बीएयू सबौर में तैयार।
किसानों, महिलाओं को खेती, प्रसंस्करण, विपणन का प्रशिक्षण।
गुणवत्तापूर्ण बीज उत्पादन और बाजार तक पहुंच।
ललन तिवारी, भागलपुर। BAU Sabour Mushroom Lab: कम जमीन, सीमित जगह और मामूली पूंजी में भी मोटी कमाई का ऐसा जरिया, जो घर के एक कमरे से शुरू होकर बड़े बाजार तक पहुंच सकता है—मशरूम की खेती आज ग्रामीण अर्थव्यवस्था में इसी अपार संभावना का नाम है।
अब इस संभावना को ग्रामीण महिलाओं के स्वावलंबन और युवाओं के स्वरोजगार की ताकत बनाने के लिए बिहार कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू), सबौर ने एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। विश्वविद्यालय परिसर में अत्याधुनिक मशरूम प्रयोगशाला (हाईटेक लैब) बनकर पूरी तरह तैयार हो गई है, जिसका विधिवत शुभारंभ बहुत जल्द होने जा रहा है।
इस आधुनिक लैब की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां मशरूम उगाने की शुरुआती बारीकियों से लेकर गुणवत्तापूर्ण बीज (स्पॉन) की उपलब्धता, वैज्ञानिक उत्पादन, प्रसंस्करण (प्रोसेसिंग), ब्रांडेड पैकेजिंग और बाजार में तैयार उत्पाद बेचने तक का पूरा चक्र एक ही छत के नीचे उपलब्ध कराया जाएगा।
वैज्ञानिक तरीकों और स्पॉन की गुणवत्ता सुधार पर रहेगा जोर
सबौर स्थित इस प्रयोगशाला में मशरूम उत्पादन के आधुनिक व वैज्ञानिक तौर-तरीकों, उच्च कोटि के स्पॉन (बीज) के उत्पादन और फसल की गुणवत्ता में लगातार सुधार पर खास ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
प्रशिक्षण के जरिए किसानों, ग्रामीण महिलाओं और नए उद्यमियों को मशरूम उगाने के तकनीकी पहलुओं से रूबरू कराया जाएगा। इसके अलावा, मशरूम को लंबे समय तक सुरक्षित रखने, उसकी पोषकता बनाए रखने, बाजार की मांग के अनुरूप ग्रेडिंग व पैकेजिंग करने के गुर सिखाए जाएंगे। इससे किसानों को सीधे तौर पर उत्पाद का मूल्य संवर्धन (वैल्यू एडिशन) करने का अवसर मिलेगा और बिचौलियों के बिना उनकी आमदनी में कई गुना इजाफा होगा।
महिलाओं के सशक्तिकरण और अतिरिक्त कमाई का बनेगा जरिया
मशरूम की खेती की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसके लिए पारंपरिक फसलों की तरह कई एकड़ उपजाऊ खेत की आवश्यकता नहीं होती। इसे घर के किसी खाली कमरे, छप्पर या झोपड़ी में रैक बनाकर कम संसाधनों में भी आसानी से शुरू किया जा सकता है।
ऐसे में घरेलू कामकाज के बाद मिलने वाले खाली समय में ग्रामीण महिलाएं इस कार्य को आजीविका का सशक्त साधन बना सकती हैं। बीएयू की यह तकनीकी सहायता महिलाओं को घरेलू चारदीवारी से निकालकर सफल 'कृषि उद्यमी' के रूप में स्थापित करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी।
आसपास के गांवों में लघु उद्यम का रूप लेगा मशरूम: कुलपति
बीएयू सबौर के कुलपति डॉ. दुनिया राम सिंह ने बताया कि विश्वविद्यालय परिसर में मशरूम की अत्याधुनिक प्रयोगशाला पूरी तरह बनकर तैयार है और जल्द ही इसे किसानों व शिक्षार्थियों के लिए शुरू कर दिया जाएगा।
कुलपति ने कहा, "मुख्य रूप से यहां उच्च गुणवत्ता वाला स्पॉन उत्पादित किया जाएगा। इसके साथ ही प्रशिक्षण से लेकर बाजार तक की पूरी तकनीक विकसित कर लोगों को दी जाएगी। विश्वविद्यालय का स्पष्ट प्रयास है कि भागलपुर और आसपास के गांवों में मशरूम उत्पादन केवल घरेलू गतिविधि तक सीमित न रहे, बल्कि यह बड़े पैमाने पर एक संगठित और लाभदायक लघु उद्यम का रूप ले, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिल सके।"
