भागलपुर [जेएनएन]। पुलवामा आतंकी हमला सेना के साथ-साथ सरकार के लिए भी सबक है। यह समय देश की सुरक्षा और सेना को मजबूत करने का है। पाकिस्तान से युद्ध जैसे हालात बन रहे हैं। युद्ध का असर लोगों की निजी जिंदगी पर भी पड़ेगा। महंगाई बढ़ सकती है। उत्पादकों के आयात-निर्यात पर भी फर्क पड़ेगा। अगर ऐसा होता है तो देशवासियों को भी सेना का साथ देना चाहिए। यह कहना है तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय के पीजी राजनीति विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. रमेश चंद्र राय का। प्रोफेसर राय सोमवार को दैनिक जागरण कार्यालय में हुई अकादमिक बैठक में पुलवामा हमले के राजनीतिक, सामाजिक और सामरिक सबक विषय पर अपना विचार साझा कर रहे थे। उन्होंने देश हित के लिए लोगों का साथ जरूरी बताया। .

इससे पूर्व समाचार संपादक संयम कुमार ने विषय प्रवेश कराते हुए कहा कि पुलवामा में आतंकी हमला देश के लिए कोई नई बात नहीं है। पहले भी बड़े-बड़े आतंकी हमले लोगों ने देखे हैं। सेना तो हर समय इससे जूझती है। बावजूद सेना और देश के लोगों का मनोबल पाकिस्तान नहीं तोड़ सकता।

प्रो. रमेश चंद्र राय ने कहा भले ही सरकार पहल नहीं करेगी, लेकिन छोड़ेगी भी नहीं। 1965 और 1971 के युद्ध में अनुभव है। उस समय यदि भारत सरकार चाहती तो पाकिस्तान से उसके अधीन कश्मीर के मुद्दे पर बात कर सकती थी। ऐसा नहीं हुआ। उसी का नतीजा है कि आज पाकिस्तान इस तरह की हरकत करने से बाज नहीं आ रहा है। वैसे भी दुश्मन को मात देने के लिए सरप्राइज अटैक जरूरी है। उन्होंने कहा कि सेना को नई युद्धनीति बनाने की जरूरत है। इसके अलावा कश्मीर में धारा 370 को समाप्त कर देना चाहिए। देश के अन्य राज्यों की तरह वहां भी जाने आने की रोक नहीं रहनी चाहिए। इससे काफी हद तक स्थिति सुधर जाएगी।

कोई भी देश आज के समय में युद्ध नहीं चाहता है। अगर कोई मुल्क आतंकी गतिविधि में सक्रिय है तो उससे निपटने के और रास्ते हैं। उन्होंने कहा, युद्ध के बाद दोनों मुल्कों को आर्थिक समस्या से जूझना पड़ेगा। अंत में प्रो. राय ने कहा कि सेना के अपने सूत्र होते हैं। ऐसी आतंकी गतिविधियों से निपटने के लिए सेना को और ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है। वहीं, यह भी जरूरी है कि जो देशद्रोही हैं, उनसे कैसे निपटा जाए। सरकार के लिए ये बड़ी चुनौती है। अगर इनसे नहीं निपटा गया तो सेना के लिए मुश्किलें खड़ी होती रहेंगी।

Posted By: Dilip Shukla

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