प्रकाश वत्स, पूर्णिया। Amit Shah Bihar Visit : मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा पाला बदल लिए जाने के बाद केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह का सीमांचल दौरा अहम माना जा रहा था। पुराने सहयोगी का साथ छूटने के बाद पार्टी की बिहार के परिप्रेक्ष्य में आगे की रणनीति के लिहाज से भी यह दौरा अहम था। अमित शाह जब मंच पर पहुंचे तो भीड़ देख उनका मन भी गदगद हो गया। भारत के नक्शे के आकार का माला के साथ गदा भी उन्हें भेंट की गई। बजरंग बली का अस्त्र-शस्त्र गदा के अलग-अलग अर्थ भी निकलने लगे हैं। एक धर्म का प्रतीक दूसरा निर्णायक जंग का। माइक थामने के बाद संबोधन का मिजाज भी कुछ ऐसा ही रहा। बात शुरू हुई मुस्लिम बाहुल्य सीमांचल में अनुसूचित जन जातियों पर अत्याचार की। चेतावनी दी गई कि बिहार में सत्ता परिवर्तन से कोई इतराए नहीं पीएम तो नरेंद्र मोदी ही हैं। पीएम मोदी ऐसी स्थिति बर्दाश्त नहीं कर सकते हैं। अगर अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति पर कोई अत्याचार करेगा तो उन्हें केंद्र सरकार सबक सिखाएगी। राज्य में भले ही सत्ता बदली हो लेकिन ऐसे तत्व जहां भी रहेंगे, वहां मोदी का हंटर जरुर पहुंचेगा।

उन्होंने मंच से अनुसूचित जनजाति समाज को भाजपा के सम्मान का उदाहरण भी दिया। उन्होंने कहा कि द्रोपदी मूर्मू को पार्टी ने राष्ट्रपति बनाया। मतलब साफ है पार्टी की नजर में ऐसे समाज के लोग ही देश के प्रथम नागरिक हैं। उनका सम्मान सभी को करना होगा। सधी सियायत के साथ सीमांचल के इलाके में तुष्टीकरण की राजनीति पर कड़ा प्रहार का इरादा जताया गया। राष्ट्रपति द्रौपदी मूर्मू के सहारे बिहार से लेकर झारखंड तक की सियासत भी की गई। बांग्लादेशी घुसपैठिए से लेकर देश विरोधी गतिविधियों को लेकर पार्टी की नीति में कोई बदलाव की गुंजाइस को खारिज किया। चेतावनी के साथ एक खास संदेश भी था। पीएम मोदी विकास व कल्याणकारी योजनाओं में भेदभाव नहीं करती है। इस इलाके पर विकास की दृष्टि से भी पीएम की खास नजर है। कल्याणकारी योजनाओं का लाभ भी बिना भेदभाव दिया जा रहा है।

शाह ने अपने संबोधन में मां पूरण देवी का भी नाम लिया। मां पूरण देवी से ही पूर्णिया की पहचान है। एक संदेश भी दिया कि हिंदुत्व के एजेंउे पर पार्टी कायम है। हिंदूओं की पहचान हर हाल में सुरक्षित रखने का संकल्प पीएम मोदी ने लिया है। भाषण के क्रम में राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर, कथाशिल्पी फणीश्वर नाथ रेणु, बांग्ला साहित्यकार सतीनाथ भादुड़ी, पूर्व मुख्यमंत्री भोला पासवान शास्त्री, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष सुंधांशु, सहित इस क्षेत्र के महान विभूतियों का नाम लिया। इस दौरान दिनकर की कविता से लेकर जेपी आंदोलन तक बात पहुंची। आजादी के संग्राम से लेकर आपातकाल के दौरान इलाके के संघर्ष पर चर्चा की। उन आंदोलनों में बिहार का केंद्र सीमांचल ही रहने की बात कही और यही से अब लालू-नीतीश के खिलाफ महासंग्राम का ऐलान भी कर गए।

Edited By: Dilip Kumar Shukla