जागरण संवाददाता, भागलपुर। गजब : मनरेगा बिहार; गोराडीह प्रखंड के मुरहन पंचायत में मनरेगा के काम में व्यापक धांधली बरती गई है। पिता-पुत्र को एक ही उम्र बताकर जाब कार्ड के साथ मजदूरी कराई गई है। एक ही मजदूर एक ही समय दो स्थानों पर काम किया है और उन्हें मजदूरी दी गई है। जिस व्यक्ति की मौत 16 वर्ष पहले हो चुकी है, वह आज भी मनरेगा में मजदूरी कर रहा है। एक शिक्षक जिनकी मृत्यु के बाद पुत्र को अनुकंपा पर नौकरी मिली। पुत्र की मृत्यु के बाद पुत्र के पुत्र को नौकरी मिली। शिक्षक जिनकी मृत्यु हो चुकी है, उनके नाम पर भी जाब कार्ड बना है और वे मजदूरी कर रहे हैं। ऐसे अनगिनत मामले हैं। जांच नहीं होने के कारण मामला उजागर नहीं हो पा रहा है। मनरेगा कर्मी और बिचौलिया की मदद से वैसे लोगों के नाम पर जाब कार्ड बना रहे हैं।

मास्टर रौल पर मृत व्यक्ति को उपस्थित दिखाकर राशि की निकासी की जा रही है। मनरेगा में भ्रष्टाचार की शिकायत की शिकायत कई बार मुरहन गांव के ही सामाजिक कार्यकर्ता चंद्रशेखर आजाद कर चुके हैं। मृत व्यक्तियों का मनरेगा के कार्यों में उपस्थिति बनाने का कारण है कि मनरेगा के कार्यों में बिना काम किए ही मुगतान के नाम पर राशि का गबन कर लिया जाए। मनरेगा आयुक्त सीपी खंडूजा ने आठ जुलाई 20 को जिलाधिकारी व उप विकास आयुक्त को मार्गदर्शिका उपलब्ध कराते हुए बिना काम कराए भुगतान करने की स्थिति में संबंधित व्यक्ति से वसूली करने और प्राथमिकी दर्ज कराने का निर्देश दिया दिया था। हालांकि इस मामले में मनरेगा के अधिकारी कार्रवाई की बात कह रहे हैं, लेकिन अभी तक कार्रवाई नहीं हुई है।

शिकायत मिलने के बाद जांच कराई गई है। रिपोर्ट आ गई है। अध्ययन करने के बाद दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। - प्रतिभा रानी, उप विकास आयुक्त

शिकायत मिलने के बाद जांच कराई गई है। राशि की वसूली हो गई है। आगे की कार्रवाई के लिए प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। - संजीव कुमार सिंह, जिला कार्यक्रम पदाधिकारी, मनरेगा

रविंद्र कुमार का मनरेगा का जाब कार्ड 20 मई 2019 को बनाया गया। रविंद्र कुमार के पिता जागेश्वर सिंह की मृत्यु वर्षों पहले हो चुकी है। जबकि रविंद्र कुमार के जाब कार्ड में मृत जागेश्वर सिंह का नाम मनरेगा कर्मी द्वारा जीवित दिखाते हुए एक मजदूर के रूप में अंकित किया गया है। जाब कार्ड में रविंद्र कुमार की उम्र 45 वर्ष अंकित किया गया है। मृत पिता जागेश्वर सिंह की उम्र भी 45 वर्ष ही अंकित किया गया है। पिता-पुत्र के उम्र में कोई अंतर नहीं है। इससे संबंधित दस्तावेज मनरेगा की वेबसाइट पर अपलोड किया गया है। मृत जागेश्वर सिंह को मनरेगा कर्मी द्वारा मनरेगा के मास्टर रौल संख्या 8243 पर पांच जुलाई 21 से 14 जुलाई 21 तक उपस्थित दिखाकर मनरेगा की राशि का गबन किया गया है।

मुरहन जमीन पंचायत के ही स्व. बलदेव प्रसाद सिंह के पुत्र राधे कुमार सिंह का मनरेगा का जाब कार्ड एक अप्रैल 2016 को बनाया गया। जाब कार्ड में बलदेव प्रसाद सिंह को मृत दिखाया गया। स्व. बलदेव प्रसाद सिंह को मनरेगा कर्मी द्वारा मनरेगा के मास्टर रौल संख्या 24517 पर आठ फरवरी 21 से 23 फरवरी 21 तक और मास्टर रौल संख्या 2544 पर 29 अप्रैल 21 से 12 मई 21 तक काम में उपस्थित दिखाकर राशि का गबन किया गया है।

रत्तीचक गांव के हरकू सिंह के पुत्र भरत लाल सिंह को जाब कार्ड 31 जनवरी 20 को बनाया गया। भरत लाल सिंह के पिता की मृत्यु 10 फरवरी 2004 को हो चुकी है। मृत हरकू सिंह को जीवित दिखाते हुए एक मजदूर के रूप में अंकित किया गया है। जाब कार्ड में भरत लाल सिंह की उम्र 55 वर्ष अंकित किया गया है, जबकि पिता हरकू सिंह की उम्र 65 वर्ष अंकित किया गया है। पिता-पुत्र की उम्र में दस साल का अंतर है। मृत हरकू सिंह को मास्टर रौल संख्या 4560 पर 20 मई 21 से तीन जून 21 तक उपस्थित दिखाकर राशि का गबन किया गया है।

जीताडीह गांव के हरि प्रसाद मंडल के पुत्र धर्मेंद्र मंडल का जाब कार्ड 12 दिसंबर 18 को बनाया गया है। धर्मेंद्र मंडल के पिता की मृत्यु 2004 से पहले हो चुकी है। हरि प्रसाद मंडल को जीवित दिखाकर मजदूर के रूप में नाम अंकित किया गया है। जाब कार्ड में धर्मेंद्र मंडल की उम्र 38 वर्ष और पिता हरि प्रसाद मंडल की उम्र 45 वर्ष अंकित है। पिता-पुत्र की उम्र में सात वर्ष का अंतर है। मृत हरि प्रसाद मंडल को मास्टर रौल संख्या 4559 पर 20 मई 21 से तीन जून 21 तक उपस्थित दिखाकर मनरेगा की राशि का गबन किया गया है।

Edited By: Dilip Kumar Shukla