खगडिय़ा, भवेश। बिहार में फरकिया के खेत पीला सोना (मक्का) उगलते हैं। 50 हजार हेक्टेयर में मक्के की खेती होती है। इस वर्ष भी किसानों ने तन-मन और धन लगाकर मक्का की खेती की। ओलावृष्टि, आंधी, तूफान और बीच-बीच में मूसलाधार बारिश को झेलते-सहते फसल तैयार की। अमूमन एक हेक्टेयर में 65 क्विंटल उपज हुई, लेकिन जब फसल तैयार हुई, तो खरीदार नहीं है। बीते वर्ष किसानों ने 2200 रुपये प्रति क्विंटल मक्का बेचा था, इस वर्ष 1100 रुपये रेट है। किसानों की ख्वाहिशें दम तोड़ रही है। किसानों के सामने फसल को सुरक्षित रखने की चिंता भी है। जगह के अभाव में कहीं-कहीं किसान खुले आसमान के नीचे फसल रखे हुए हैं। दूसरी ओर जिन्होंने घर-मकान में मक्का रखा है, वहां भी बारिश बाद नमी से मक्का सडऩे की आशंका रहती है। कच्चे मकान वालों को यह परेशानी ज्यादा सता रही है।

मक्का बेचे तो बेचे कहां

किसान मक्का बेचने के लिए मोहताज बने हुए हैं, लेकिन उन्हें रेट 1100 रुपये से अधिक नहीं मिल रहा है। जबकि सरकार ने मक्का का न्यूनतम समर्थन मूल्य 1760 रुपये निर्धारित किया है। अब तक जिले में मक्का क्रय केंद्र नहीं खोले गए हैं। इससे किसान मक्का बेचे तो बेचे कहां।

इस व्यथा का नहीं है अंत

चक्रमिनिया गांव के किसान विजय ङ्क्षसह ने चार हेक्टेयर में मक्का की खेती की थी। एक हेक्टेयर में 25 से 30 हजार रुपये लागत खर्च आया। उपज  प्रति हेक्टेयर 65 ङ्क्षक्वटल के आसपास हुई है। तैयार मक्का खुले आसमान के नीचे रखा हुआ है। रेट नहीं मिलने से उसे बेच नहीं पा रहे हैं। चक्रमिनिया के ही बेबी देवी ने महाजन से कर्ज लेकर चार बीघे मक्का की खेती की। वे कहती हैं- सोचा था, फसल तैयार होने बाद कर्ज वापस कर दूंगी, लेकिन रेट काफी कम है। महाजन का तगादा सहना पड़ रहा है। 

कहते हैं अधिकारी

यहां तीन लाख 50 हजार मीट्रिक टन मक्का उत्पादन होता है। मक्का का न्यूनतम समर्थन मूल्य 1760 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित है।

- दिनकर प्रसाद सिंह, जिला कृषि पदाधिकारी, खगडिय़ा

कहते हैं डीसीओ 

मक्का का न्यूनतम समर्थन मूल्य 1760 रुपये प्रति ङ्क्षक्वटल सरकार की ओर से निर्धारित है। मक्का  अधिप्राप्ति केंद्र खोलने को लेकर सरकार के आदेश का इंतजार किया जा रहा है।

- संजय कुमार मंडल, डीसीओ, खगडिय़ा

क्‍या कहते हैं सांसद

मक्का किसानों को सही कीमत मिले इसको लेकर  केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान से  सकारात्मक बात हुई है। उन्होंने आश्वासन दिया है कि जल्द क्रय केंद्र खोलने की संभावना है। किसानों को उचित कीमत मिले इसके लिए प्रयासरत हूं। लॉकडाउन में उद्योग-धंधे बंद होने की वजह से मांग में कमी आई है। जिसका असर कीमत पर पड़ा है। क्रय केंद्र खुलने पर किसानों को फसल की सही कीमत मिलने लगेगी।

- चौधरी महबूब अली कैसर, सांसद, खगडिय़ा लोकसभा क्षेत्र।

 

Posted By: Rajesh Thakur

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