भागलपुर, जेएनएन। अब माता, शिशु और किशोरी नहीं होंगे कुपोषित। इसके लिए स्‍वास्‍थ्‍य विभाग ने नई पहल की हैं। इसके तहत सभी जिलों के आंगनबाड़ी केंद्र को जोड़ा गया है। इसका प्रशिक्षण पटना एम्‍स में दिया गया।

पोषण अभियान की गुणवत्तापूर्ण मूल्यांकन को लेकर एम्स में तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला की शुरुआत करते हुए एम्स के निदेशक डॉ.पीके सिंह ने कहा पोषण अभियान केवल एक अभियान ही नहीं है बल्कि यह देश में मातृ, शिशु एवं किशोरी पोषण की जरुरत को व्यक्त करता है। अभियान के संबंध में आम लोगों को जागरूक करना सबों की समान जिम्मेदारी है। इसकी बेहतर पहल करने के लिए उन्होंने अलाइव एंड थराइव को धन्यवाद ज्ञापित किया।

पोषण सेवाओं में है सुधार की जरुरत

अलाइव एंड थराइव के शैलेश जगताप ने बताया पोषण अभियान में मातृ, शिशु एवं किशोरों के पोषण पर बल दिया जा रहा है। सरकार द्वारा पोषण आधारित कई कार्यक्रम सामुदायिक स्तर पर चलाये जा रहे हैं जैसे आरोग्य दिवस, अन्नाप्रसन दिवस, गोदभराई दिवस एवं सुपोषण दिवस। इन कार्यक्रमों में पोषण पर किये जाने वाले कार्यों की समीक्षा एवं मूल्यांकन जरुरी है ताकि पोषण के मानकों में अपेक्षित सुधार आ सके। आरोग्य दिवस महज टीकाकरण दिवस बन कर रह गया है जबकि पोषण के बारे में लाभार्थियों को जागरूक करना इसकी एक अहम् कड़ी है। इन सभी कार्यक्रमों की नियमित गुणवत्ता मूल्यांकन से हमें कमियों का पता चलेगा तथा उचित निवारक कदम उठाये जायेंगे। मातृ एवं शिशु पोषण में जीवन के प्रथम 1000 दिन अति महत्वपूर्ण होते हैं तथा अन्नाप्रसन दिवस, गोदभराई कार्यक्रम एवं सुपोषण दिवस इसी की कड़ी में सरकार द्वारा उठाया गया एक प्रभावी कदम है।

एम्स पटना के कम्युनिटी एंड फॅमिली मेडिसिन के अतिरिक्त प्रोफेसर डॉ. संजय पांडे ने बताया की आरोग्य दिवस, अन्नाप्रसन दिवस, गोदभराई दिवस और सुपोषण दिवस की नियमित समीक्षा जरुरी है। समीक्षा द्वारा प्राप्त आंकड़ों और रिपोर्ट के मुताबिक आगे की कार्ययोजना बनाने में मदद मिलेगी। जमीनी एवं विभागीय स्तर पर दिक्कतों की पहचान करना तथा उसके मुताबिक उसका निवारण के उपाय हमें पोषण मानकों को सुधरने में मदद करेंगे।

यह है पोषण अभियान

राष्ट्रीय पोषण मिशन योजना का शुभाराम्भ प्रधानमंत्री द्वारा 8 मार्च 2018 को किया गया था। योजना का मुख्य उद्देश्य विभिन्न विभागों महिला एवं बाल विकास, स्वास्थ्य विभाग, शिक्षा विभाग, पंचायती राज एवं लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभागके मध्य समन्वय स्थापित करते हुए वर्ष 2022 तक 0 से 6 वर्ष की आयु वर्ग के बच्चों में बाधित विकास को राष्ट्रीय स्तर पर 38 प्रतिशत से 25 प्रतिशत तक कम करना है। बच्चों के कुपोषण दर में प्रति वर्ष 2 प्रतिशत एवं किशोरी एवं महिलाओं के एनीमिया दर में प्रति वर्ष 3 प्रतिशत की कमी लानी है. इसके अंतर्गत अन्नप्राशन, गोदभराई उत्सव, क्रमिक क्षमता विकास, सूचना एवं संचार समर्थित वास्तविक समय आधारित निगरानी एवं पंचायत प्रतिनिधियों की सहभागिता हेतु नवाचार गतिविधि का आयोजन किया जा रहा है। कार्यशाला में एम्स पटना के अलावा अनुग्रह नारायण मगध मेडिकल कॉलेज गया, दरभंगा मेडिकल काँलेज, एम्स गोरखपुर तथा गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज कन्नौज की चिकित्सकों ने प्रतिभाग किया।

Posted By: Dilip Shukla

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