भागलपुर। भागलपुर में नवनिर्मित बाइपास के लिए अर्जित भूमि का रिकार्ड जगदीशपुर, नाथनगर, सबौर और गोराडीह अंचल कार्यालयों में नहीं है। बाइपास निर्माण के लिए 20 वर्ष पूर्व भूमि का अर्जन हुआ था। रैयतों से बाइपास निर्माण के लिए जमीन तो ले ली गई लेकिन इसका दाखिल खारिज सरकार या एनएच के नाम से नहीं हुआ। अब भी कई रैयतों के पास इस जमीन का मालिकाना हक है। इसके बदले उनसे भू लगान बकाया रहने का दावा किया जाता है। कई रैयत कागज पर ही जमीन की खरीद बिक्री कर अवैध कमाई कर रहे हैं। सरकार ने सड़क निर्माण के लिए जमीन तो ले ली और इसका मुआवजा भी दे दिया। लेकिन अंचल के रिकार्ड में सरकार के नाम से जमीन का ट्रांसफर (दाखिल-खारिज) नहीं हुआ है।

भागलपुर के एक रैयत ने इसकी लिखित शिकायत अनुमंडलस्तरीय लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी से की थी। उसके बाद मामले को प्रथम अपीलीय प्राधिकार सह जिला लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी से की। मंगलवार को प्रथम अपीलीय प्राधिकार ने अपने फैसले में कार्यपालक अभियंता, एनएच, अपर समाहर्ता (राजस्व) और जिला भू अर्जन पदधिकारी को निर्देश दिया है कि एक पखवारे के अंदर एक दूसरे से समन्वय स्थापित कर दो माह के अंदर सभी अधिग्रहित भूमि को संबंधित अंचल अधिकारी के माध्यम से रजिस्टर-टू में हस्तांतरित कराने की कार्रवाई करें। हस्तांतरण सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय

(एनएच) के नाम से किया जाए। चार अंचलों से ली गई थी जमीन

भागलपुर में बाइपास का निर्माण 16.5 किलोमीटर की लंबाई में हुआ है। इसके लिए एनएच ने सबौर, गोराडीह, जगदीशपुर और नाथनगर में जमीन का अर्जन किया था। जमीन का दाखिल-खारिज नहीं होने से इसकी खरीद-बिक्री अवैध तरीके से कागज पर होने लगी है। अतिक्रमण और कब्जा होने की भी शिकायत आती है। क्षेत्र में आपराधिक घटनाएं और भूमि विवाद भी होते रहते हैं।

''बाइपास के लिए अर्जित भूमि के दाखिल खारिज के लिए सीओ को लिखा गया है। इसके लिए एक माह पूर्व रिमाइंडर भी दिया गया है। अर्जित भूमि से संबंधित दस्तावेज अंचल कार्यालयों को उपलब्ध करा दिए गए हैं। ''

राज कुमार, कार्यपालक अभियंता, राष्ट्रीय उच्चपथ, भागलपुर। '' सबौर से कटकर गोराडीह अंचल अस्तित्व में आया था। गोराडीह अंचल में जमीन की जमाबंदी से संबंधित कोई दस्तावेज नहीं है। किसी को इससे संबंधित परेशानी है तो भू अर्जन से कागज निकलवा लें। अंचल में मदद की जाएगी।''

नवीन भूषण, अंचल अधिकारी, गोराडीह।

Posted By: Jagran

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