भागलपुर [कौशल किशोर मिश्र]। मुकदमे साधारण हों या संगीन यदि उसके गवाह को जान के खतरे का अंदेशा हो तो उसकी सुरक्षा अब भगवान भरोसे नहीं रहेगी। उसे निडरता से गवाही देनी है। उसे या उसके पूरे परिवार को तत्काल डीएम-एसपी मुकम्मल सुरक्षा देंगे। बस गवाह को इस बात का अंदेशा लगे कि उसकी गवाही से उसकी या उसके परिवार की आरोपित पक्ष जान ले लेंगे। उसे खतरे के अंदेशा होने की मात्र जानकारी देनी है। बिहार गवाह सुरक्षा योजना 2018 को मंजूरी मिलते ही ऐसे गवाहों के लिए पर्याप्त सुरक्षा दी जाएगी। यह सुविधा उनके अनुरोध दी जाएगी। मामला चाहे हत्या, डकैती, जानलेवा हमले, अपहरण आदि का हो। गवाह की जान का खतरा या उसके परिजन की जान को खतरा होने की आशंका पर उसके घरों तक की सुरक्षा निगरानी होगी।

घरों की निगरानी को सीसी कैमरे

जान के खतरे की आशंका व्यक्त करने वाले गवाहों के घर की निगरानी के लिए सीसी कैमरे, पुलिस की तैनाती, पुलिस गश्त और चौकसी भी की जाएगी। यही नहीं गवाहों की पहचान छुपाए जाएंगे। संवेदनशील मुकदमों में गवाह के माता-पिता, भाई-बहन समेत अन्य परिजन की भी सुरक्षा की जाएगी। गवाह को नाम से नहीं बल्कि कोड से पहचान दिया जाएगा। यही नहीं उसे कुछ दिनों के लिए जरूरत पडऩे पर अलग कहीं गुप्त स्थान पर रखा जा सकता है। उसे पुलिस विशेष मोबाइल नंबर और सेट भी मुहैया कराएगी जिससे संपर्क किया जाएगा।

पहले पुलिस गवाहों की सुरक्षा के प्रति नहीं थी संवेदनशील

भागलपुर के एडीजे अष्टम एमपी सिंह के निर्देश पर 31 दिसंबर 1999 को नाथनगर के शाहपुर अमरी विशनपुर में हुए नरसंहार के गवाहों को पर्याप्त सुरक्षा मुहैया कराया गया था। पुलिस हालांकि सुरक्षा 19 साल बाद मुहैया कराई थी। इसके पूर्व पत्र लिखते-लिखते न्यायाधीश एमपी सिंह आजिज हो चले थे। तब तल्ख लहले में मुख्य सचिव और डीजीपी को पत्र लिखा था। तब डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय ने नाथनगर इंस्पेक्टर को इस बात का सख्त निर्देश दिया कि हर हाल में सूचक समेत सारे गवाहों को कोर्ट में उपस्थित कराए। नतीजा हुआ कि एक दिन में सूचक समेत पांच गवाहों की गवाही करा दी गई। वरना 19 साल बीत गए थे उन गवाहों का पता नहीं था। चार लोगों की हत्या हुई थी। पीरपैंती में हुई किसान की हत्या में भी गवाह को पूरी सुरक्षा प्रदान कर गवाही कराई गई। जबकि भागलपुर जिले के दो दर्जन से अधिक चर्चित हत्या और अपहरण कांड में गवाहों की सुरक्षा भगवान भरोसे होने के कारण मुकदमे का हश्र बुरा होता गया और आरोपित बरी होते चले गए।

 

Posted By: Dilip Shukla

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