भागलपुर। अधिकांश लोगों को यह पता नहीं है कि निश्चेतक डॉक्टर भी है या नहीं। हां जब मरीज का ऑपरेशन करना होता है तो सर्जन मरीज के परिजनों से यही कहते हैं कि अभी बेहोश करने वाले नहीं आए हैं। जबकि ऑपरेशन थियेटर से लेकर मरीजों को बेहोश करने और ऑपरेशन तक मरीज की चिंता निश्चेतक ही करता है। ये बातें जवाहर लाल नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय अस्पताल में आयोजित इंडियन सोसाइटी ऑफ एनेस्थिसिया के वार्षिक सम्मेलन में बिहार-झारखंड संघ के अध्यक्ष डॉ. एके वात्सायन ने कहीं।

उन्होंने कहा कि लोगों को यह बताना चाहिए कि मेडिकल साइंस में निश्चेतक की अहम भूमिका होती है। मरीज को बेहोश कर उसे होश में लाने में निश्चेतक की भूमिका महत्वपूर्ण है। स्थिति यह है कि निश्चेतक के दम पर ही आईसीयू चलता है, कंट्रोलर वहीं होता है। आईसीयू के प्रत्येक उपकरण की उसे अच्छी जानकारी होती है।

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हल्की चोट भी बुजुर्ग के लिए खतरनाक : डॉ. अनुपमा मित्रा

कोलकाता केपीसी मेडिकल कॉलेज की डॉ. अनुपमा मित्रा ने कहा कि हल्की चोट से भी बुजुर्ग की कमर या सिर की हड्डी टूट सकती है, ज्यादा खून निकल सकता है। ऐसे मरीजों पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता होती है। सांस रुकने लगती है, ज्यादा खून निकलने से शरीर में खून की कमी हो जाती है। शरीर में रक्त संचार धीमा पड़ जाता है। ऐसे मरीजों का उपचार एवं बेहोश एक निश्चेतक ही कर सकता है।

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अमेरिका की गाइड लाइन पर भरोसा : डॉ. बीएम बिरला

संघ के बिहार सचिव डॉ. बीएम बिड़ला ने कहा कि हृदय रोग से ग्रसित मरीज जब हार्निया या गॉल ब्लाडर की समस्या लेकर आता है तो उसका ऑपरेशन करना भी आवश्यक होता है। तब मरीज को बेहोश करते समय उसकी धड़कन बढ़ जाती है, वाल्व में भी समस्या आती है। इससे निपटने के लिए 2014 में अमेरिका एनेस्थिसिया एसोसिएशन द्वारा बनाई गई गाइड लाइन के मुताबिक मरीजों का उपचार किया जाता है, जो सुरक्षित है।

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बेहोश करने की प्रक्रिया में बदलाव आया : डॉ. एसपी सिंह

20 वर्ष पहले मरीज को बेहोश करने की जिस विधि का इस्तेमाल किया जाता था, वह अब पूरी तरह बदल चुकी है। संघ के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. एसपी सिंह ने कहा कि पहले मरीज को ईथर से बेहोश किया जाता था, अब इसके लिए सूई का इस्तेमाल किया जाता था। ईथर से बेहोश मरीज का बड़ा ऑपरेशन सर्जन नहीं कर सकते थे, लेकिन अब सभी ऑपरेशन करना आसान है। मॉनिटर आदि ऐसे उपकरण हैं जिन्होंने ऑपरेशन को आसान बना दिया तथा मरीज के शरीर में होने वाले बदलाव की भी जानकारी देता रहता है। वेंटीलेटर से सांस चलती रहती है। हालांकि बिहार की तुलना में अन्य राज्यों में बेहोश करने की आधुनिक विधि विकसित है। आधुनिक विधि का राज्य के मेडिकल कॉलेजों में कमी है

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दर्द को कम करते हैं निश्चेतक : डॉ. नीलम

जमशेदपुर टाटा अस्पताल की डॉ. नीलम सिन्हा ने कहा कि ऑपरेशन के दौरान अगर मरीज को दर्द से छटपटाहट होती है तो निश्चेतक ही उसे कम कर सकता है। चाहे वह कैंसर के कारण दर्द हो अथवा अन्य कारणों से। उन्होंने मरीज को बेहोश करने में लोकल एनेस्थिसिया में एक दवा के उपयोग करने की भी बात कही। इससे मरीज को लाभ मिलता है।

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मरीज की स्थिति की जानकारी सर्जन को दी जाती है : डॉ. राजीव

मेदांता अस्पताल के डॉ. राजीव रंजन ने कहा कि ऑपरेशन के वक्त जब मरीज की स्थिति गंभीर होती है, वाल्व में सिकुड़न या रिसाव होता है तो इसकी जानकारी तत्काल सर्जन को दी जाती है।

वैज्ञानिक सत्र में संघ के भागलपुर अध्यक्ष डॉ. एके वर्मा, सचिव डॉ. महेश कुमार, डॉ. आलोक कुमार सहित कई चिकित्सक मौजूद थे। वहीं मंच संचालन डॉ. रोमा यादव ने किया।