संवाद सूत्र, झाझा (जमुई): 11 वर्षीय किशोर समीर अंसारी की हत्या है या आत्महत्या, इसको लेकर पुलिस उलझन में है। साथ ही लोगों में चर्चा का विषय बनी हुई है। हालांकि, अभी पुलिस पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रही है। मृतक समीर के पिता मु. नौशाद अंसारी ने हत्या का मामला दर्ज कराया है। किशोर का बरामद शव की स्थिति और उसके शरीर पर उभरे निशान हत्या की ओर भी इशारा कर रही है। खास बात यह है कि समीर के प्राइवेट पार्ट में जख्म हैं और उससे खून टपक रहा था।

वहीं, दोनों पैर में काला धब्बा को देख लोग हत्या की आशंका जता रहे हैं। अलबत्ता, मामले की सच्चाई पुलिस जांच के बाद ही सामने आएगी। लोगों को आशंका है कि किशोर ने कुछ ऐसा देख लिया जो उसे नहीं देखना चाहिए था। ग्रामीणों ने संभावना व्यक्त की कि समीर की पिटाई कर अधमरा कर पेड़ में लटका कर आत्महत्या का रूप देने का प्रयास किया गया है। यहां यह भी गौर करने बात है कि पेड़ में लटकते समीर के शव को उतारने की फोटो किसी ने कैद नहीं किया है, जबकि इन दिनों अधिकांश लोगों के पास स्मार्टफोन रहता है। पुलिस ने पेड़ के प्रत्येक पहलू की जांच की।

बताया जाता है कि समीर का शव पेड़ में जमीन से 15 फीट ऊपर लटका हुआ था। पेड़ पर भी पुलिस ने खून के निशान पाए हैं। बहरहाल अभी पुलिस किस परिस्थिति में यह घटना घटी, उस पहलू तक नहीं पहुंच पाई है। समीर के पिता ने बताया कि घर में एक मोबाइल है जिस पर समीर बात किया करता था। उक्त मोबाइल घर में पड़ा हुआ है। कुछ ग्रामीणों ने बताया कि जिस जगह समीर का शव मिला है, वो जंगली इलाका है।

शाम के ढलते ही कुछ शराबियों का जमावड़ा लग जाता है। कई बार ग्रामीणों ने यहां से हटने की बात कही लेकिन शराबी उल्टे गांव वालों से ही उलझ जाया करता था। अब पुलिस जांच के बाद ही तस्वीर साफ हो पाएगी कि मामूली दुकान चला एवं मजदूरी कर जीवन-यापन करने वाले पिता के पुत्र की हत्या के पीछे मंशा क्या थी। एसडीपीओ रविशंकर प्रसाद ने बताया कि पुलिस हत्या एवं आत्महत्या दोनों एंगल पर कार्य कर रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से मामले पर से पर्दा उठ जाएगा। साथ ही कुछ बातें सामने आई हैं। उस बिंदू पर जांच चल रही है। मौके पर थानाध्यक्ष राजेश शरण, एसआइ विजय कुमार, रामाधार यादव, पंचायत समिति सदस्य प्रतिनिधि रवि यादव, गौरव सिंह राठौर, मतलु आलम आदि पुलिस बल उपस्थित थे।

समीर की मौत से परिवार मर्माहत

मु. नशौद का सहारा मु. समीर था। उसके मौत से पूरे परिवार का रो-रोकर बुरा हाल था। पिता के साथ-साथ मां सहाना खातून के अलावा उनके भाई मु. अमीर, मु. तौसिफ, मु. आसिफ, चांदनी खातून, अलीसा खातून आदि महिलाओं का रो-रोकर बुरा हाल था। स्वजन के मुंह से एक ही आवाज निकल रहा था कि किसी से कोई दुश्मनी नहीं थी। किसने समीर की हत्या कर दी। इस दौरान बगल की महिलाओं के आंख भी नम हो गई थी। मालूम हो कि मु. नौशाद के सहारा मु. समीर था। दुकान का कार्य हो या फिर मजदूरी का कार्य, हर समय पिता के साथ कंधा मिलाकर कार्य करता था। धोबियाकुरा मध्य विद्यालय में कक्षा पांच तक पढ़ाई करने के बाद छोड़ दिया था। अब वह घर में रहकर काम किया करता था।

Edited By: Shivam Bajpai