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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Apr 17, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

बेगूसराय में हरसाईं स्तूप, नौलखा मंदिर सहित प्राचीन धरोहरों का अस्तित्व मिटने के कगार पर

By JagranEdited By:
Published: Sun, 17 Apr 2022 11:19 PM (IST)

बेगूसराय। विश्व धरोहर दिवस सोमवार को मनाया जाएगा। जिले के ऐतिहासिक धरोहरों पर चर्चा सामयिक है। यह कहना अतिश्योक्ति नहीं ...और पढ़ें

बेगूसराय में हरसाईं स्तूप, नौलखा मंदिर सहित प्राचीन धरोहरों का अस्तित्व मिटने के कगार पर
बेगूसराय में हरसाईं स्तूप, नौलखा मंदिर सहित प्राचीन धरोहरों का अस्तित्व मिटने के कगार पर

बेगूसराय। विश्व धरोहर दिवस सोमवार को मनाया जाएगा। जिले के ऐतिहासिक धरोहरों पर चर्चा सामयिक है। यह कहना अतिश्योक्ति नहीं होगी कि धरोहर दिवस सिर्फ संचिकाओं तक ही सीमित है। धरोहरों की सुरक्षा व संरक्षा के प्रति सभी सक्षम अधिकारी व जनप्रतिनिधि उदासीन हैं। परिणाम स्वरूप धरोहरों का अस्तित्व दिन प्रतिदिन मिटता ही जा रहा है। जिले के प्राचीन पालकालीन हरसाई स्तूप जयमंगलागढ़, स्वतंत्रता आंदोलन का प्रतीक नमक सत्याग्रह स्थल गढ़पुरा, नौलखा मंदिर विष्णुपुर एवं रामधारी सिंह दिनकर का दलान आज रख-रखाव के अभाव में अपने अस्तित्व को बचाने की जद्दोजहद करता नजर आ रहा है।

नौलखा मंदिर : नगर का ऐतिहासिक नौलखा मंदिर आज अपने अस्तित्व की रक्षा के लिए जद्दोजहद कर रहा है। अभी भी कई करोड़ की संपदा का स्वामी होने के बाद भी पूजा के लिए चंदा व जन सहयोग का सहारा लेने को विवश है। वर्ष 1980 के दशक से यह धार्मिक न्याय बोर्ड के अधीन है। ट्रस्ट इस धरोहर के प्रति कितना उदासीन है, इसकी महज एक ही बानगी काफी है कि 1990 के दशक में आए भूकंप में इसके गुंबदों में दरार आ गया था, जिसे धार्मिक न्यास ट्रस्ट अबतक मरम्मत तक कराने की आवश्यकता नहीं समझा। ट्रस्ट के सदस्य सह पुजारी महंत रामदेव दास बताते हैं कि कई मंत्री, सांसद, एमएलए कई बार इसके जीर्णोद्धार और पर्यटन विकास का कोरा आश्वासन दिए, लेकिन धरातल पर अबतक एक ईंट भी नहीं जुड़ा।

हरसाईं स्तूप : गढ़पुरा का पालकालीन हरसाईं स्तूप का अस्तित्व धीरे-धीरे अब मिटता जा रहा है। इतिहासकारों का मानना है कि यह स्तूप भगवान बुद्ध के महापरिनिर्वाण के दो सो वर्षो बाद यानी ईसा पूर्व दूसरी शताब्दी का है। हरसाई स्तूप शक्ति पीठ मां जयमंगलागढ़ के उत्तर-पूर्व की दिशा में कावर झील पक्षी विहार के कछार में है। चार स्तूप समूह में बना है। चारों स्तूपों एक समान दूरी पर है। मध्य भाग में बड़ा स्तूप एवं उत्तर, दक्षिण एवं पश्चिम दिशा में तीन स्तूप हैं। मुख्य स्तूप की ऊंचाई लगभग 65 फीट तथा इसका व्यास करीब 360 फीट है। रख रखाव के अभाव में अस्तित्व मिटने को है। इसके संबंध में सीओ स्मिता कुमारी ने बताया कि इस धरोहर को सुव्यवस्थित कर पर्यटक स्थल के रूप में विकसित किए जाने के लिए सरकार को लिखा गया है।

नमक सत्याग्रह स्थल : महात्मा गांधी के आह्वान पर बिहार के मुंगेर जिला, वर्तमान में बेगूसराय जिले के गढ़पुरा में डा. श्रीकृष्ण सिंह के नेतृत्व में नमक सत्याग्रह आंदोलन 21 अप्रैल 1930 को किया गया था। इसमें मुंगेर के कष्टहरणी घाट से 17 अप्रैल को स्वतंत्रता सेनानियों का जत्था श्रीबाबू के साथ पदयात्रा करते 20 अप्रैल को गढ़पुरा पहुंचा था। वहीं इस आंदोलन को कुचलने के लिए अंग्रेजी हुकूमत के पदाधिकारी और पुलिस बल गढ़पुरा का चप्पे-चप्पे में तैनात थे, ताकि किसी तरह आंदोलन को विफल किया जाए। आखिरकार बाबू बिदेश्वरी प्रसाद सिंह, बाबू महावीर प्रसाद सिंह, बाबू मथुरा सिंह कारी सिंह, बाबू बनारसी प्रसाद सिंह, सुरेश मिश्र, बुद्धू नोनिया सहित बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों ने दुर्गा गाछी परिसर में नोनिया मिट्टी से नमक बनाकर आंदोलन को सफल बनाया था। बाद में डा. श्रीकृष्ण सिंह की गिरफ्तारी हुई थी। परंतु, सात दशक बाद भी गढ़पुरा का नमक सत्याग्रह स्थल उपेक्षित है।

दिनकर का दलान : पैतृक गांव सिमरिया के जिस दलान पर बैठकर राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर पढ़ते, पढ़ाते और कविता लिखते थे। रख रखाव के अभाव में दलान की स्थिति दयनीय होती जा रही है। सरकारी उदासीनता की वजह से दिनकर की जन्मस्थली सिमरिया अब तक साहित्यिक तीर्थ स्थल के रूप में विकसित नहीं हो सका है। वर्ष 1986 में बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री विंदेश्वरी दूबे ने सिमरिया को आदर्श ग्राम सिमरिया बनाने की घोषणा की थी। जो कोरा साबित हुआ। यहां तक कि सिमरिया गांव जाने के लिए न अच्छी सड़क है न परिवहन की कोई व्यवस्था। दिनकर के घर को राष्ट्रीय धरोहर के रूप में विकसित करने की मांग एक वर्ष पूर्व राज्यसभा सदस्य राकेश सिन्हा ने राज्य सभा में शून्यकाल के दौरान की थी, लेकिन अबतक उस दिशा में कहीं से कोई ठोस व सकारात्मक पहल नहीं होने से उक्त धरोहर जर्जर होकर अब ध्वस्त होने के कगार पर है।