हाउसवाइफ से बिजनेस वुमेन बनीं बिहार की सीमा, ₹8000000 से खड़ी की डेरी यूनिट; हर महीने 5 लाख का कारोबार
चेरिया बरियारपुर के शाहपुर की सीमा कुमारी ने 80 लाख रुपये की लागत से 'मिल्की मगस डेरी' स्थापित कर गृहिणी से सफल उद्यमी बनने का सफर तय किया है।

चेरिया बरियारपुर के शाहपुर स्थित मिल्की मगस डेरी में प्रोसेसिंग यूनिट के सामने खड़ी उद्यमी सीमा: जागरण
HighLights
सीमा कुमारी ने 80 लाख की लागत से डेरी शुरू की।
मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट से दूध व अन्य उत्पाद तैयार होते हैं।
यह उद्यम सात लोगों को रोजगार प्रदान कर रहा है।
रजनेश सिन्हा, चेरिया बरियारपुर (बेगूसराय)। हौसले बुलंद हों और परिवार का साथ मिले तो सपनों को हकीकत में बदलने की राह आसान हो जाती है। चेरिया बरियारपुर प्रखंड के शाहपुर की रहने वाली सीमा कुमारी ने इसे सच कर दिखाया है।
कभी गृहिणी की भूमिका तक सीमित रहने वाली सीमा आज अपनी मेहनत, लगन और दूरदर्शी सोच के दम पर महिला उद्यमी के रूप में पहचान बना रही हैं।
उन्होंने न सिर्फ अपने सपने को उड़ान दी, बल्कि डेरी व्यवसाय के जरिए रोजगार के अवसर भी सृजित किए हैं। करीब 80 लाख रुपये की लागत से शुरू की गई उनकी मिल्की मगस डेरी आत्मनिर्भरता की दिशा में एक प्रेरक पहल बनकर उभरी है।
आंगन से बाहर निकलीं, खड़ा किया अपना कारोबार:
सीमा बताती हैं कि बचपन से ही उद्यमी बनने की तमन्ना थी। शादी के बाद गृहस्थी की जिम्मेदारियों के बीच यह सपना पीछे छूट गया, लेकिन मन में इसे साकार करने की इच्छा बनी रही।
जब उन्होंने अपने विचार परिवार के सामने रखे तो पति और अन्य सदस्यों का भरपूर सहयोग मिला। इसी का परिणाम रहा कि अक्टूबर 2025 में उन्होंने डेरी की शुरुआत की।
इसके लिए दस कट्ठा जमीन पर व्यवस्थित शेड का निर्माण कराया। शुरुआत में विभिन्न नस्लों की एक दर्जन उन्नत गायों और एक दर्जन बाछी के साथ व्यवसाय शुरू किया।
प्रत्येक मवेशी के लिए नाद के पास ग्रेनाइट पत्थर के पानी पीने के पात्र लगाए गए और सीधे नल से पानी पहुंचाने की व्यवस्था की गई, ताकि स्वच्छता बनी रहे और संक्रमण का खतरा कम हो।
दूध से कई उत्पाद, बाजार में बढ़ा कारोबार:
सीमा ने शुरुआती सफलता के बाद अपने कदम नहीं रोके। जनवरी में डेरी के साथ मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट स्थापित किया। इसमें तीन सौ लीटर प्रतिघंटे की क्षमता वाली मिल्क प्रोसेसिंग और पाश्चुरीकरण मशीन लगाई गई है। इससे दूध को प्रसंस्कृत कर बाजार तक पहुंचाने की व्यवस्था विकसित हुई।
फिलहाल प्लांट में प्रतिदिन करीब 60 लीटर दूध को कांच की बोतलों में भरकर सील करने के बाद बेगूसराय भेजा जा रहा है। इसके अलावा दही, पनीर, खोआ, कुल्हड़ लस्सी, मिष्टी दही और घी जैसे उत्पाद भी तैयार किए जा रहे हैं।
इनकी आपूर्ति स्थानीय बाजार के साथ बेगूसराय में भी की जा रही है। वर्तमान में डेरी का मासिक टर्नओवर करीब पांच लाख रुपये है, जिसे आगे बढ़ाने की दिशा में प्रयास जारी है।
सात लोगों को मिला रोजगार:
डेरी के संचालन में फिलहाल सात कर्मचारी काम कर रहे हैं। इन्हें प्रतिमाह 12 से 15 हजार रुपये तक पारिश्रमिक दिया जाता है। इस तरह सीमा का उद्यम उनके परिवार की आर्थिक मजबूती के साथ दूसरे लोगों के लिए रोजगार का जरिया भी बन रहा है।
