संवाद सूत्र, बीहट (बेगूसराय) : बरौनी थर्मल पावर स्टेशन को बिहार सरकार के द्वारा एनटीपीसी के हाथों बेचने की तैयारी का विरोध शुरू हो गया है। बरौनी थर्मल के पदाधिकारी-कर्मचारी संयुक्त संघर्ष मोर्चा का गठन कर बीटीपीएस बचाओ, बिहार बचाओ अभियान को लेकर बैठक आयोजित की गई। संयुक्त मोर्चा ने बिहार सरकार व जेनरेशन के शीर्ष प्रबंधन के निर्णय के खिलाफ संघर्ष का बिगूल फूंक दिया है। संयुक्त संघर्ष मोर्चा के संयोजक रविभूषण ने कहा, जेनरेशन कंपनी के शीर्ष प्रबंधन द्वारा बिहार सरकार के समक्ष बरौनी थर्मल से संबंधित सारे तथ्यों को जान-बूझकर किसी षडयंत्र के तहत तोड़ मरोड़ कर पेश किया जा रहा है। जिससे बरौनी के ओल्ड और न्यू एक्सटेंशन पावर प्रोजेक्ट को बेचने की कोशिश की जा रही है। जिसका हर स्तर पर विरोध किया जाएगा। बरौनी थर्मल पेसा के उपाध्यक्ष देवेंद्रनाथ नंदा ने कहा, करोड़ों खर्च के बाद बरौनी थर्मल प्लांट को एनटीपीसी को सौंपने के निर्णय का कोई औचित्य नहीं है। सारी सुविधाओं के साथ बरौनी थर्मल से बिजली उत्पादन का एक मौका तो हमें मिलनी ही चाहिए। बिजली उत्पादन में अनावश्यक बिलंब का ठीकरा भेल कंपनी पर फोड़ते हुए कहा, बरौनी न्यू एक्सटेंशन प्रोजेक्ट से उत्पादन करने में लागत से अधिक जो खर्च आ रहा है उसका जेनरेशन कंपनी और भेल दोनों को आधा-आधा वहन करना चाहिए। यदि हमारी मांगें नहीं मानी गई तो पाचं को उक्त निर्णय के खिलाफ गेट मी¨टग और मशाल जुलूस निकालकर विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। इस अवसर पर थर्मल कर्मियों द्वारा बरौनी प्लांट को बचाने व चलाने का शपथ भी लिया जाएगा। मौके पर पदाधिकारी-कर्मचारी संयुक्त संघर्ष मोर्चा के अनुपम कमल, दीप राज, सदाबुल हसन, मनीष कुमार, आशीष कुमार, मो. सलाउद्दीन, अमित कुमार, मदन प्रसाद यादव, संजय चौरसिया, निरंजन कुमार, विनोद प्रसाद, कृष्ण मोहन महतो, अमलेश कुमार, राम कुमार भगत, गौतम कुमार आदि मौजूद थे। विदित हो कि कांटी के मुकाबले बरौनी का उत्पादन बेहतर रहा है। वहीं बरौनी संयुक्त संघर्ष मोर्चा के सदस्यों ने कहा, बरौनी में दक्ष लोगों की कमी के कारण पावर प्लांट को एनटीपीसी को देने की बात बिल्कुल गलत है। एनटीपीसी द्वारा संचालित कांटी के 110 मेगावाट इकाई के उत्पादन की अगर बीटीपीएस के 110 मेगावाट इकाई के चालू होने के बाद तुलनात्मक अध्ययन किया जाए तो दिसंबर, जनवरी और फरवरी माह में कम खर्च कर बरौनी उत्पादन के मामले में अव्वल रहा है।

जीर्णोद्धार और एक्सटेंशन प्रोजेक्ट की लागत दोगुनी, उत्पादन शून्य

राष्ट्रीय सम विकास योजना के तहत भेल के द्वारा करीब छह सौ करोड़ रुपये की लागत से बरौनी थर्मल की 110 मेगावाट क्षमता वाली छठी और सातवीं इकाई का आधुनिकीकरण व नवीनीकरण किया जा रहा है। जिस कार्य को भेल कंपनी को दो वर्षों में पूरा करना था जो आज तक पूरा नहीं किया जा सका है। वर्ष 2006 में बंद पड़े बरौनी थर्मल में सातवीं इकाई का वर्ष 2010 में तथा छठी इकाई का जीर्णोद्धार कार्य वर्ष 2012 में शुरू किया गया था। अभी तक मात्र सातवीं इकाई का कार्य किसी तरह पूरा किया गया है। भेल की लेट-लतीफी व लापरवाही के कारण छठी इकाई का कार्य अभी तक चल रहा है। जबकि बरौनी थर्मल के विस्तार का काम वर्ष 2011 में शुरू हुआ था। विस्तार योजना में 250 मेगावाट क्षमता का दो यूनिट आठवी और नौवीं का निर्माण कार्य भेल के द्वारा वर्ष2014 में पूरा किया जाना था। पिछले तीन साल से इसका समय सीमा बढ रहा है। पहले क्षमता विस्तार पर करीब 1300 करोड़ रुपये लागत आ रहा था जो अब बढकर 5,308 करोड़ रुपये हो गया है।

सूत्रों की माने तो अभी तक मात्र आठवीं इकाई का कार्य लगभग पूरा होने की स्थिति में है और जल्द ही इससे उत्पादन शुरू होने की संभावना जताई जा रही है। जबकि नौवीं इकाई से उत्पादन शुरू होने में अभी भी समय लगेगा। जो भी हो बरौनी थर्मल के पदाधिकारी व कर्मचारी संयुक्त संघर्ष मोर्चा के द्वारा एनटीपीसी के हाथों बेचने का विरोध शुरू हो गया है। देखना है कि बिहार सरकार इस मामले में क्या रूख अपनाती है।

Posted By: Jagran

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