आलू की खेती में लागत 1200 रुपये क्विंटल, बाजार में मिल रहे मात्र 400 से 500 रुपये; किसान परेशान
बेगूसराय के छौड़ाही में आलू की अच्छी पैदावार के बावजूद किसानों को गंभीर संकट का सामना करना पड़ रहा है। ...और पढ़ें

आलू की खेती में लागत 1200 रुपये क्विंटल, बाजार में मिल रहे मात्र 400 से 500 रुपये (AI Generated Image)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
बलबंत चौधरी, छौड़ाही (बेगूसराय)। इस वर्ष आलू की अच्छी पैदावार होने के बावजूद किसानों के सामने गंभीर संकट खड़ा हो गया है। उत्पादन अधिक होने और बाजार में उचित कीमत नहीं मिलने से किसान आर्थिक दबाव में आ गए हैं।
हालत यह है कि लागत निकालना भी मुश्किल हो रहा है, जबकि भंडारण का खर्च अलग से बोझ बन गया है। आलू उत्पादक किसान इस समय कम कीमत, बढ़ती लागत और महंगे भंडारण के दोहरे-तिहरे दबाव में जूझ रहे हैं।
वर्तमान में आलू की कीमत करीब चार से पांच सौ रुपये प्रति क्विंटल यानी लगभग चार-पांच रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है। इससे किसानों को अपनी मूल पूंजी निकालना भी मुश्किल हो रहा है।
किसान बताते हैं कि एक कट्ठा में आलू की बोआई के लिए करीब 25 किलो बीज की आवश्यकता होती है, इसकी कीमत लगभग पांच सौ रुपये पड़ती है। इसके अलावा खाद, सिंचाई, दवा और मजदूरी पर करीब 15 सौ रुपये तक खर्च हो जाता है।
आलू की फसल तैयार होने के बाद किसानों के सामने भंडारण की भी बड़ी चुनौती खड़ी है। कच्चा आलू लंबे समय तक खुले में नहीं रखा जा सकता। उसमें सड़न का खतरा रहता है। ऐसे में किसान कोल्ड स्टोरेज का सहारा लेने को मजबूर हैं।
कोल्ड स्टोरेज में आलू रखने का खर्च भी कम नहीं है। 50 किलो के बोरे पर भंडारण और हैंडलिंग का करीब ढ़ाई सौ रुपये खर्च आता है। यानी एक क्विंटल आलू पर लगभग पांच सौ रुपये अतिरिक्त लागत बढ़ जाती है। खेत से निकलते समय से कोल्ड स्टोरेज में रखने के बाद करीब 1200 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच जाता है।
क्या कहते हैं किसान?
अवधेश कुमार ने बताया कि जब आलू की रोपाई की गई थी, उस समय कीमत 20 से 25 रुपये प्रति किलो के हिसाब से थी, लेकिन अब बेचने के समय मात्र पांच रुपये प्रति किलो मिल रहा है। इस भारी गिरावट से किसानों की स्थिति बदतर हो गई है।
अभिषेक कुमार ने कहा कि अब तक आलू को संभालकर रखा हुआ है, लेकिन बाजार में उचित कीमत पर खरीदने वाला कोई नहीं मिल रहा है। ऐसे में किसान असमंजस में हैं। लागत निकलना मुश्किल है।
मुकेश कुमार ने कहा कि खेत से निकला आलू अब धीरे-धीरे खराब होता जा रहा है। उचित कीमत नहीं मिलने से नुकसान बढ़ता जा रहा है और आगे खेती करना भी मुश्किल लग रहा है। सरकार को हम किसानों की मदद करनी चाहिए।
किसान रणधीर यादव बताते हैं कि इस वर्ष उन्होंने अधिक मात्रा में आलू की खेती की, लेकिन उचित मूल्य नहीं मिलने के कारण मजबूरी में चार रुपये प्रति किलो के भाव पर बेचने की नौबत आ गई है। किसानों की हालत इतनी खराब हो गई है।
