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कभी घर संभालती थीं बेगूसराय की सीमा, आज 80 लाख का कारोबार और हर महीने 5 लाख का टर्नओवर

Published: Sat, 10 Oct 2026 03:05 PM (IST)

बेगूसराय की सीमा कुमारी ने 80 लाख की लागत से 'मिल्की मगस डेयरी' स्थापित की, जो दूध व दुग्ध उत्पाद ...और पढ़ें

शादी के बाद भी नहीं छोड़ा उद्यमी बनने का सपना

शादी के बाद भी नहीं छोड़ा उद्यमी बनने का सपना

HighLights

  1. सीमा कुमारी ने 80 लाख की लागत से डेयरी शुरू की।

  2. मासिक 5 लाख का टर्नओवर, 7 लोगों को रोजगार मिला।

  3. दूध के साथ दही, पनीर, खोआ जैसे उत्पाद बनाती हैं।

रजनेश सिन्हा, चेरिया बरियारपुर (बेगूसराय)। बेगूसराय: घर की जिम्मेदारियां संभालने वाली एक महिला जब अपने सपनों को पूरा करने की ठान ले, तो वह दूसरों के लिए भी रोजगार के रास्ते खोल सकती है। चेरिया बरियारपुर प्रखंड के शाहपुर की रहने वाली सीमा कुमारी ने अपनी मेहनत और दूरदर्शी सोच से इसे सच कर दिखाया है।

करीब 80 लाख रुपये की लागत से उन्होंने 'मिल्की मगस डेयरी' शुरू की, जो अब दूध से लेकर दही, पनीर, खोआ और घी जैसे उत्पाद तैयार कर रही है। आज उनके कारोबार का मासिक टर्नओवर करीब पांच लाख रुपये है और सात लोगों को रोजगार भी मिला है।

सीमा की यह कहानी सिर्फ डेयरी कारोबार की सफलता नहीं, बल्कि उस हौसले की कहानी है, जिसने गृहस्थी की जिम्मेदारियों के बीच देखे गए सपने को एक व्यवसाय में बदल दिया। इसमें उनके पति और परिवार के सहयोग की भी अहम भूमिका रही।

शादी के बाद भी नहीं छोड़ा उद्यमी बनने का सपना

सीमा कुमारी बताती हैं कि बचपन से ही उद्यमी बनने की इच्छा थी। शादी के बाद परिवार की जिम्मेदारियों के बीच यह सपना कुछ समय के लिए पीछे जरूर चला गया, लेकिन उन्होंने इसे छोड़ा नहीं। जब उन्होंने कारोबार शुरू करने की बात परिवार के सामने रखी, तो पति और अन्य सदस्यों ने उनका साथ दिया।

परिवार से प्रोत्साहन और जरूरी संसाधन मिलने के बाद सीमा ने अपने विचार को हकीकत में बदलने का फैसला किया। अक्टूबर 2025 में उन्होंने डेयरी की शुरुआत की।

इसके लिए दस कट्ठा जमीन पर व्यवस्थित शेड बनवाया और विभिन्न नस्लों की एक दर्जन उन्नत गायों तथा एक दर्जन बाछियों के साथ काम शुरू किया।

पशुओं की देखभाल से लेकर साफ-सफाई तक पर ध्यान

डेयरी शुरू करते समय सीमा ने पशुओं की सुविधा और स्वच्छता को प्राथमिकता दी। मवेशियों के लिए नाद के पास ग्रेनाइट पत्थर के पानी पीने के पात्र लगाए गए।

साथ ही, सीधे नल से पानी पहुंचाने की व्यवस्था की गई, ताकि साफ-सफाई बनी रहे और संक्रमण का खतरा कम किया जा सके।

सीमा का प्रयास केवल दूध उत्पादन तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने डेयरी को व्यवस्थित तरीके से विकसित करने पर ध्यान दिया, जिससे आगे दूध के प्रसंस्करण और उससे बनने वाले दूसरे उत्पादों का कारोबार भी शुरू किया जा सके।

दूध से दही-पनीर तक, कारोबार को दिया नया विस्तार

शुरुआत के कुछ महीनों बाद ही सीमा ने कारोबार को आगे बढ़ाने की दिशा में कदम उठाया। जनवरी में डेयरी के साथ मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट स्थापित किया गया। इसमें प्रति घंटे 300 लीटर क्षमता वाली दूध प्रसंस्करण और पाश्चुरीकरण मशीन लगाई गई है।

फिलहाल प्रतिदिन करीब 60 लीटर दूध कांच की बोतलों में भरकर सील किया जाता है और बेगूसराय भेजा जाता है। इसके अलावा डेयरी में दही, पनीर, खोआ, कुल्हड़ लस्सी, मिष्टी दही और घी भी तैयार किए जाते हैं। इन उत्पादों की आपूर्ति स्थानीय बाजार के साथ बेगूसराय में भी की जा रही है।

हर महीने पांच लाख का टर्नओवर, सात लोगों को रोजगार

सीमा की डेयरी का वर्तमान मासिक टर्नओवर करीब पांच लाख रुपये बताया गया है। कारोबार के संचालन में सात कर्मचारी काम कर रहे हैं, जिन्हें हर महीने 12 से 15 हजार रुपये तक पारिश्रमिक दिया जाता है।

इस तरह सीमा का उद्यम उनके परिवार की आर्थिक मजबूती के साथ दूसरे लोगों की आजीविका का सहारा भी बन रहा है। अब उनकी कोशिश कारोबार को और आगे बढ़ाने की है, ताकि दूध और उससे तैयार होने वाले उत्पादों की पहुंच अधिक ग्राहकों तक हो सके।

दूसरी महिलाओं के लिए बनीं प्रेरणा

सीमा कुमारी की यात्रा बताती है कि गृहस्थी संभालने के साथ भी अपने सपनों को आगे बढ़ाया जा सकता है। इसके लिए इच्छाशक्ति, सही योजना और परिवार का सहयोग महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

शाहपुर की सीमा ने डेयरी व्यवसाय के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई है। उनका प्रयास उन महिलाओं के लिए प्रेरणा है, जो अपना कारोबार शुरू करना चाहती हैं और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने का सपना देखती हैं।

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