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बांका में सांप डसने के बाद अस्पताल के बदले झाड़-फूंक में गंवाया समय, मौत के बाद भी होते रहा तंत्र-मंत्र का खेल

Published: Tue, 27 Oct 2026 07:34 PM (IST)

बांका में सर्पदंश से 14 वर्षीय रोशन कुमार की मौत हो गई, क्योंकि परिजन अस्पताल की बजाय झाड़-फूंक के चक्कर ...और पढ़ें

झाड़-फूंक में गंवाया समय (एआई जेनरेटेड तस्वीर)

झाड़-फूंक में गंवाया समय (एआई जेनरेटेड तस्वीर)

HighLights

  1. सर्पदंश के बाद झाड़-फूंक में गंवाया कीमती समय।

  2. अंधविश्वास के कारण 14 वर्षीय रोशन कुमार की मौत।

  3. अस्पताल में एंटी-स्नेक इंजेक्शन उपलब्ध थे, पर देर हुई।

संवाद सूत्र, बेलहर (बांका)। चिकित्सा विज्ञान के इस दौर में भी अंधविश्वास लोगों की जान पर भारी पड़ रहा है। सर्पदंश के बाद अस्पताल पहुंचने के बजाय झाड़-फूंक के चक्कर में फंसकर लोग जिंदगी गंवा रहे हैं। 

ताजा मामला थाना क्षेत्र के जमनी दुहबा गांव में सोमवार को 14 वर्षीय रोशन कुमार की मौत के बाद भी अंधविश्वास का खेल जारी रहा। मृत घोषित किए जाने के बाद स्वजन उसे जिंदा होने की उम्मीद में तांत्रिक के पास ले गए। 

तांत्रिक रात 11 बजे तक झाड़-फूंक कर उसे जिंदा करने का भरोसा देता रहा। अंत में उसने भी मृत घोषित कर शव स्वजनों को सौंप दिया।

खेत में पटवन के दौरान सांप ने डसा

जानकारी के अनुसार, लौढ़िया पंचायत के जमनी दुहबा गांव निवासी भोला यादव का पुत्र रोशन कुमार खेत में पटवन कर रहा था। इसी दौरान किसी विषैले सांप ने उसे डस लिया। रोशन ने फोन कर अपनी मां को घटना की जानकारी दी। मां ने उसे घर लौटने को कहा। 

घर पहुंचते ही उसकी तबीयत बिगड़ने लगी। स्वजन उसे अस्पताल ले जाने के बजाय पहले सौंताडीह स्थित विषहरी मंदिर ले गए, जहां करीब डेढ़ घंटे तक झाड़-फूंक होती रही। हालत में सुधार नहीं होने पर घटना के करीब ढाई घंटे बाद उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बेलहर लाया गया।

दिल की धड़कन महसूस होने का आभास

नाजुक स्थिति को देखते हुए चिकित्सकों ने उसे बेहतर इलाज के लिए मायागंज भागलपुर रेफर कर दिया। हालांकि, स्वजन उसे सदर अस्पताल बांका ले गए, जहां चिकित्सक ने मृत घोषित कर दिया। शव घर पहुंचते ही स्वजनों में कोहराम मच गया। 

मां बेटे के शव से लिपटकर विलाप करने लगी। इसी दौरान स्वजनों को उसके दिल की धड़कन महसूस होने का आभास हुआ। कुछ ग्रामीणों ने भी जांच करने का दावा किया और अस्पताल ले जाने की सलाह दी। लेकिन कुछ लोग फिर से झाड़-फूंक कराने के पक्ष में खड़े हो गए।

उम्मीद के नाम पर रातभर चला अंधविश्वास

आखिरकार देर शाम रोशन को झाड़-फूंक के लिए घोघघड़ा के एक तांत्रिक के पास ले जाया गया। तांत्रिक रात 11 बजे तक उसे जिंदा करने का दावा करते हुए झाड़-फूंक करता रहा। बाद में उसने भी रोशन को मृत बताकर शव स्वजनों को सौंप दिया। जिंदा होने की आखिरी उम्मीद भी टूटने के बाद घर में मातम छा गया।

अस्पताल में उपलब्ध हैं एक हजार एंटी स्नेक इंजेक्शन

सीएचसी प्रभारी डॉ. अनिल कुमार ने बताया कि झाड़-फूंक के चक्कर में सर्पदंश के मरीजों को अस्पताल पहुंचाने में अक्सर देरी होती है। अस्पताल में करीब एक हजार एंटी स्नेक इंजेक्शन उपलब्ध हैं। रोशन को सर्पदंश के लगभग ढाई घंटे बाद अस्पताल लाया गया था। उसे एंटी स्नेक इंजेक्शन की 10 वायल दी गईं, लेकिन स्थिति में सुधार नहीं हुआ। इसके बाद उसे मायागंज रेफर किया गया था। 

हालांकि, स्वजन उसे सदर अस्पताल बांका ले गए। क्षेत्र में जागरूकता अभियान की जरूरत है, ताकि सर्पदंश के बाद लोग झाड़-फूंक में समय गंवाने के बजाय तत्काल अस्पताल पहुंचें।

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