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कहां चले गए योगेश... दारोगा की दर्दनाक कहानी, 3 साल की उम्र में मां की मौत, सौतेली मां से म‍िला भरपूर स्‍नेह, लेक‍िन...

Published: Mon, 26 Oct 2026 01:39 PM (IST)

Daroga Yogesh Kumar Death: भागलपुर के नवगछिया पुलिस लाइन में दारोगा योगेश कुमार का शव फंदे से मिलने के बाद ...और पढ़ें

Daroga Yogesh Kumar Death: भागलपुर के नवगछिया पुलिस लाइन में दारोगा योगेश कुमार की मौत।

Daroga Yogesh Kumar Death: भागलपुर के नवगछिया पुलिस लाइन में दारोगा योगेश कुमार की मौत।

HighLights

  1. दारोगा योगेश कुमार का शव फंदे से मिला।

  2. परिवार ने आत्महत्या मानने से इनकार किया।

  3. हत्या की आशंका जताते हुए जांच की मांग।

संवाद सूत्र, बाराहाट (बांका)। Daroga Yogesh Kumar Death: नियति का क्रूर प्रहार जब किसी हंसते-खेलते परिवार पर होता है, तो खुशियां किस कदर पलभर में चीत्कार और मातम में बदल जाती हैं, इसका दर्दनाक उदाहरण बांका जिले का तप्पाडीह गांव बना हुआ है।

जिस घर में महज चार महीने पहले शहनाई गूंजी थी और अभी कुछ ही दिन पहले बेटे के दारोगा पद पर प्रमोशन की खुशियां मनाई जा रही थीं, वहां अब सिर्फ सिसकियां और आंसू शेष रह गए हैं। नवगछिया पुलिस लाइन में पदस्थापित सब-इंस्पेक्टर (दारोगा) योगेश कुमार का शव फंदे से लटका मिलने के बाद उनके पैतृक गांव तप्पाडीह में मातमी सन्नाटा पसरा हुआ है।

तीन साल की उम्र में उजड़ी ममता, सौतेली मां ने कलेजे से लगाया

योगेश की जिंदगी का सफर बचपन से ही कड़े इम्तिहानों से भरा रहा। वह महज तीन वर्ष के थे, तब उनकी सगी मां सरस्वती देवी का सर्पदंश के कारण असमय देहांत हो गया था। पिता रामकृष्ण साह के सामने आठ बेटियों और इस इकलौते मासूम बेटे की परवरिश का पहाड़ सा संकट खड़ा था। ऐसे में घर में दूसरी मां बनकर आईं उर्वशी देवी ने इतिहास की सौतेली मां वाली तमाम रूढ़ियों को तोड़ते हुए योगेश को अपने कलेजे का टुकड़ा बना लिया।

उर्वशी देवी ने योगेश को कभी सगे-पराए का अहसास नहीं होने दिया। उन्होंने अपने आंचल के स्नेह और दुलार से सींचकर योगेश को बड़ा किया और उसके भविष्य के हर सपने को पंख दिए। सगे बेटे से बढ़कर पाले गए योगेश ने भी अपनी मेहनत के दम पर वर्ष 2020 में बिहार पुलिस में सेवा शुरू की और हाल ही में सहायक अवर निरीक्षक (ASI) से सब-इंस्पेक्टर (अवर निरीक्षक) के पद पर प्रोन्नति पाकर पूरे परिवार का मान बढ़ाया।

वे नवगछिया एसपी के रीडर के रूप में भी कार्य कर चुके थे। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था, और जिस बेटे के सिर पर कभी मां का साया छिन गया था, आज उसकी मौत ने उस सौतेली मां को फिर से बेसहारा कर दिया, जिसने उसे बड़े लाड़-प्यार से पाला था।

4 महीने पहले रचाई थी शादी, उजड़ गया सुहाग

योगेश के जीवन में खुशियों का नया अध्याय इसी वर्ष 1 जुलाई को शुरू हुआ था, जब उनका विवाह लखीसराय निवासी गुड़िया कुमारी के साथ धूमधाम से संपन्न हुआ था। गुड़िया पटना सचिवालय में कार्यरत हैं। दशहरा और त्योहारों के इस मौसम में गुड़िया नवगछिया पुलिस लाइन स्थित अपने पति के पास आई हुई थीं।

शादी के शुरुआती महीनों की नई उमंगों और भविष्य के हसीन सपनों के बीच अभी कुछ ही दिन बीते थे कि अचानक आई इस मनहूस खबर ने सब कुछ तहस-नहस कर दिया। पत्नी गुड़िया की दुनिया पलभर में उजड़ गई है और उनका रो-रोकर बुरा हाल है।

पैतृक गांव पहुंचते ही कोहराम, परिजनों ने जताई हत्या की आशंका

शनिवार की सुबह नवगछिया पुलिस लाइन स्थित सरकारी कमरे में योगेश का शव मिलने की सूचना मिलते ही तप्पाडीह गांव के लोग स्तब्ध रह गए। पोस्टमार्टम के बाद देर रात जब योगेश का पार्थिव शरीर उनके पैतृक घर लाया गया, तो वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं। सौतेली मां उर्वशी देवी और पिता रामकृष्ण साह का करुण क्रंदन सुन वहां मौजूद सैकड़ों ग्रामीणों का कलेजा फट पड़ा।

परिजनों ने योगेश की मौत को आत्महत्या मानने से इनकार करते हुए आरोप लगाया है कि इसमें कोई गहरी साजिश हो सकती है। उन्होंने कहा कि जो बेटा हाल ही में प्रमोशन पाकर और नई गृहस्थी बसाकर बेहद खुश था, वह अचानक ऐसा कदम नहीं उठा सकता।

हालांकि, पुलिस प्रथम दृष्टया इसे पारिवारिक कारणों से जुड़ा मामला मानकर हर पहलू की जांच कर रही है। बहरहाल, प्रमोशन की दोहरी खुशियों के बीच योगेश की संदिग्ध मौत ने बांका के इस परिवार को ताउम्र का ऐसा गहरा जख्म दे दिया है, जिसकी भरपाई कभी संभव नहीं होगी।

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