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बांका में अधूरे भवन के नाम पर स्कूल प्रभारी ने निकाला विकास कोष का पैसा, नामांकन शुल्क जेब में रखने का आरोप

Published: Fri, 09 Oct 2026 01:59 PM (IST)

बांका के अंगीय उच्च विद्यालय कसबा में प्रभारी मनीष यादव पर अधूरे भवन के नाम पर विकास कोष निकालने और नामांकन शुल्क अपने पास रखने का आरोप लगा है।

अधूरे भवन के नाम पर निकाला विकास कोष का पैसा (एआई जेनरेटेड तस्वीर)

अधूरे भवन के नाम पर निकाला विकास कोष का पैसा (एआई जेनरेटेड तस्वीर)

HighLights

  1. अधूरे भवन के नाम पर विकास कोष निकालने का आरोप।

  2. छात्रों के नामांकन शुल्क को अपने पास रखने का आरोप।

  3. क्लर्क की शिकायत पर बीईओ ने जांच शुरू की।

संवाद सहयोगी, शंभुगंज (बांका)। प्रखंड के अंगीय उच्च विद्यालय कसबा में प्रभारी मनीष यादव की कार्यशैली को लेकर उठे सवालों के बाद कथित अनियमितताओं का मामला सामने आया है। विद्यालय के क्लर्क समेत अन्य कर्मियों ने प्रभारी पर करीब दो दशक से अधूरे पड़े भवन के नाम पर विकास कोष की राशि निकासी करने का आरोप लगाया है। 

कर्मियों का कहना है कि भवन का निर्माण वर्षों पहले संवेदक द्वारा अधूरा छोड़ दिया गया था। आरोप है कि विद्यालय प्रबंध समिति के गठन के बिना ही भवन के नाम पर विकास कोष की राशि निकाल ली गई।

नामांकम शुल्क अपने रखता है प्रभारी

कर्मियों ने छात्रों से लिए जाने वाले नामांकन शुल्क को विद्यालय के खाते में जमा करने के बजाय प्रभारी द्वारा अपने पास रखने का भी आरोप लगाया है। इन कथित अनियमितताओं का विरोध करने पर क्लर्क नागेंद्र प्रसाद के साथ गाली-गलौज और मारपीट का प्रयास किए जाने की शिकायत भी की गई है। मामले को लेकर क्लर्क ने जिला शिक्षा पदाधिकारी और प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी से शिकायत की है।

शिकायत के बाद बीईओ भूपेंद्र कुमार सिंह विद्यालय में जांच के लिए पहुंचे। बताया गया कि जांच के दौरान प्रभारी से मांगे गए कई पंजी प्रस्तुत नहीं किए गए। इससे विद्यालय की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल और गहरा गया है। विद्यालय के अन्य शिक्षकों ने भी प्रभारी की कार्यशैली पर नाराजगी जताते हुए उन्हें हटाने की मांग की है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि विकास कोष की राशि की निकासी और अन्य आरोपों की विभागीय स्तर पर गंभीरता से जांच होने पर वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है। वहीं, विद्यालय प्रभारी मनीष यादव ने अपने ऊपर लगाए गए सभी आरोपों को बेबुनियाद बताया है।

बीईओ भूपेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि प्रथम दृष्टया प्रभारी की मानसिक स्थिति कुछ कमजोर प्रतीत हुई। मामले की जांच रिपोर्ट जिला शिक्षा पदाधिकारी को भेज दी गई है। अब विभागीय स्तर पर आगे की कार्रवाई का इंतजार है।

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