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1999 में शुरू हुआ सफर, अब राज्य स्तर पर बनाई पहचान; बांका के टीचर उमाकांत कुमार को मिलेगा पुरस्कार

Published: Wed, 02 Sep 2026 07:33 PM (IST)

प्रोन्नत मध्य विद्यालय खड़िहारा उर्दू के प्रधानाध्यापक उमाकांत कुमार को शिक्षक दिवस पर राज्य स्तरीय सम्मान मिलेगा।

प्रधानाध्यापक उमाकांत कुमार। (फाइल फोटो)

प्रधानाध्यापक उमाकांत कुमार। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. उमाकांत कुमार को शिक्षक दिवस पर राज्य स्तरीय सम्मान मिलेगा।

  2. बांका जिले से एकमात्र शिक्षक के रूप में उनका चयन हुआ।

  3. शिक्षा में समर्पण और विद्यालय के विकास हेतु यह सम्मान।

संवाद सूत्र, बाराहाट (बांका)। शिक्षा को महज नौकरी नहीं, बल्कि समाज में बदलाव का माध्यम मानकर बच्चों के भविष्य को संवारने में जुटे प्रोन्नत मध्य विद्यालय खड़िहारा उर्दू के प्रधानाध्यापक उमाकांत कुमार को शिक्षक दिवस पर राज्य स्तर पर सम्मानित किया जाएगा।

जिले से इस सम्मान के लिए उनका चयन एकमात्र शिक्षक के रूप में हुआ है। उनकी उपलब्धि से शिक्षा जगत के साथ खड़िहारा और आसपास के क्षेत्र में खुशी का माहौल है।

वर्ष 1999 में शिक्षक के रूप में चयनित उमाकांत कुमार मूल रूप से मधेपुरा जिले के रहने वाले हैं। हालांकि उनकी कर्मभूमि बांका रही है।

वर्तमान में वे खड़िहारा उर्दू विद्यालय में प्रधानाध्यापक के रूप में कार्यरत हैं। बच्चों को बेहतर शिक्षा देने के साथ वे विद्यालय के शैक्षणिक वातावरण को मजबूत बनाने में लगातार प्रयासरत हैं।

शिक्षा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता, विद्यार्थियों के प्रति आत्मीय व्यवहार और विद्यालय के विकास में योगदान को देखते हुए उनका चयन राज्य सम्मान के लिए किया गया है।

प्रधानाध्यापक बनने के बाद बदली विद्यालय की तस्वीर

विद्यालय से जुड़े लोगों के अनुसार उमाकांत कुमार के प्रधानाध्यापक बनने के बाद विद्यालय के वातावरण में सकारात्मक बदलाव आया।

उन्होंने बच्चों की नियमित उपस्थिति बढ़ाने, अभिभावकों को विद्यालय से जोड़ने और विद्यार्थियों में पढ़ाई के प्रति रुचि विकसित करने पर विशेष जोर दिया। वे बच्चों को अनुशासन, जिम्मेदारी और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं।

उमाकांत कुमार ने कहा कि यह सम्मान केवल उनका नहीं, बल्कि विद्यालय के बच्चों, अभिभावकों और शिक्षा जगत की उपलब्धि है।

उन्होंने सहयोग के लिए शिक्षा विभाग, जनप्रतिनिधियों, ग्रामीणों और अभिभावकों के प्रति आभार जताया। पांच सितंबर को मिलने वाला यह सम्मान उनके वर्षों के परिश्रम और बच्चों के प्रति समर्पण की पहचान बनेगा।

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