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फर्जी प्रमाण पत्र से 10 साल तक सरकारी नौकरी, बांका की टीचर पर विजिलेंस ने कसा शिकंजा 

Published: Wed, 07 Oct 2026 08:49 AM (IST)

बांका में फर्जी शैक्षणिक प्रमाणपत्रों के आधार पर प्रखंड शिक्षिका बनी पायल सिंह के खिलाफ निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने प्राथमिकी दर्ज की है।

एआई जनरेटेड फोटो

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HighLights

  1. बांका की प्रखंड शिक्षिका पायल सिंह पर FIR दर्ज।

  2. फर्जी शैक्षणिक प्रमाणपत्रों के आधार पर मिली थी नौकरी।

  3. निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने जांच में प्रमाणपत्र फर्जी पाया।

जागरण संवाददाता, बांका। फर्जी शैक्षणिक प्रमाणपत्र के आधार पर प्रखंड शिक्षिका के पद पर नियुक्ति प्राप्त करने के मामले में निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने बांका थाना में फिर एक प्राथमिकी दर्ज कराई है। प्राथमिकी लकड़ीकोला मध्य विद्यालय की प्रखंड शिक्षिका पायल सिंह के खिलाफ दर्ज की गई है।

वह अमरपुर थाना क्षेत्र के महादेवपुर के समीप कोठिया गांव निवासी श्रवण कुमार सिंह की पत्नी है। पायल की 2015 में प्रखंड शिक्षिका के रूप में नियुक्ति हुई थी।

उनकी शैक्षणिक एवं प्रशैक्षणिक योग्यता के प्रमाणपत्रों की जांच निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के स्तर से कराई गई।

जांच में उनका प्रशिक्षण प्रमाणपत्र ही फर्जी साबित हो गया। इसके अलावा झारखंड अधिविद्य परिषद रांची का रोल कोड 01101 तथा रोल नंबर 002722 अंकित है। प्रमाणपत्र की परीक्षा तिथि 18 अगस्त 2014 और प्राप्तांक 1137/1500 दर्ज है।

झारखंड अधिविद्य परिषद जैक से कराए गए सत्यापन में उक्त अंक पत्र एवं प्रमाणपत्र का परिषद की अभिलेख पंजी में कोई विवरण दर्ज नहीं मिला। परिषद ने प्रमाणपत्र को अपने स्तर से निर्गत नहीं किए जाने की बात भी कही है।

यानी पायल ने कुछ लोगों के साथ मिलकर फर्जी तरीके से प्रमाण पत्र तैयार कर नौकरी प्राप्त कर ली। निगरानी जांच में इसे कूटरचित, फर्जी एवं जाली प्रमाणपत्र करार दिया गया है।

नेटवर्क की होगी जांच 

आरोप है कि इस प्रमाणपत्र का इस्तेमाल कर नियुक्ति प्राप्त की गई। मामले में अन्य अज्ञात लोगों की संलिप्तता की भी आशंका जताई गई है।

निगरानी ब्यूरो ने भारतीय दंड विधान की धारा 420, 468, 471 एवं 120(बी) के तहत प्राथमिकी दर्ज कर मामले की जांच करने का अनुरोध किया है।

प्राथमिकी के बाद अब पुलिस पूरे मामले में प्रमाणपत्र, नियुक्ति प्रक्रिया और संबंधित अभिलेखों की जांच करेगी। मालूम हो कि 2015 की बांका प्रखंड शिक्षक नियोजन समिति की जांच में कई फर्जी शिक्षक मिल चुके हैं।

इस बहाली पर पहले भी खूब सवाल उठता रहा है। अब निगरानी जांच में एक-एक कर कई फर्जी शिक्षकों का चेहरा सामने आ चुका है।

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