बांका। एक जनवरी 1996 से पूर्व गुच्छ समूह में बने आवास कई स्थानों पर जर्जर अवस्था में पहुंच गया है। वैसे, जर्जर आवास की मरम्मत व नए सिरे से आवास निर्माण के लिए राज्य सरकार 1.20 लाख रुपये की सहायता राशि देगी। इसके लिए सरकार ने मुख्यमंत्री ग्रामीण आवास योजना की शुरुआत की है।

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80 के दशक में शुरू की गई थी तीन योजनाएं :

सरकार ने 1980 में राष्ट्रीय ग्रामीण नियोजन कार्यक्रम (एनआरइपी) एवं 1983 में ग्रामीण भूमिहीन रोजगार गारंटी कार्यक्रम (आरएलइजीपी) की शुरुआत की थी। इसके बाद वित्तीय वर्ष 1985-86 से जवाहर रोजगार योजना में अनुसूचित जाति-अनुसूचित जन जाति एवं मुक्त कराए गए बंधुआ मजदूरों के लिए आवास निर्माण की योजना थी। इसमें गरीबी रेखा से नीचे जीवन गुजरबसर करने वाले चयनित लाभुकों का कलस्टर तैयार कर उसे बुनियादी सुविधाओं के विकास के साथ ही आवास की भी सुविधा दी गई थी।

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असुरक्षित जीवन जी रहे 1996 से पूर्व के आवास लाभुक :

गुच्छ समूहों में हजारों परिवारों को आवास योजना का लाभ दिया गया था। जो अब पूरी तरह जीर्ण-शीर्ण हो चुका है। इस बीच उन्हें आवास की मरम्मत के लिए किसी भी तरह की कोई आर्थिक सहायता नहीं दी गई। वहीं, पूर्व से आवास योजना का लाभार्थी होने की वजह से उसे इंदिरा आवास व पीएम आवास योजना का भी लाभ नहीं मिल पा रहा है। लेकिन नई योजना उनके लिए उम्मीद का किरण बनकर आया है। जिससे वे अपने आवास का नये सिरे से निर्माण या उसकी मरम्मत करा सकें।

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सरकार ने विभाग को जारी किया निर्देश :

मुख्यमंत्री ग्रामीण आवास योजना को धरातल पर उतारे जाने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। इसके लिए सरकार ने डीएम व संबंधित विभाग के अधिकारियों को आवश्यक निर्देश भी जारी कर दिए हैं। इसके लिए विभाग 1996 से पूर्व आवास योजना का लाभ लेने वाले लाभुकों का डाटा बेस तैयार कर रहा है। जिसे विभाग के वेबसाइट पर भी अपलोड किया जाएगा। जिसके आधार पर लाभुकों को योजना का लाभ दिया जाएगा।

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कोट

जिले में 1996 से पूर्व आवास योजना का लाभ लेने वाले लाभुकों को उसके जर्जर भवन के नए सिरे से निर्माण व उसकी मरम्मत के लिए 1.20 लाख की सहायता दी जाएगी। इसके लिए योजना की प्रक्रिया को सरकार द्वारा अंतिम रूप दिया जा रहा है।

अर¨वद मंडल, प्रभारी डीआरडीए निदेशक

Posted By: Jagran