संवाद सूत्र, बेलहर (बांका): पंचायत चुनाव ने बेलहर में इतिहास रच दिया है। चुनावी परिणाम ने राज्य स्तर पर जारी पिछले नौ चरण के रिजल्ट से भिन्न होकर सबको चौंका दिया है। परिणाम आश्चर्यजनक है। लाखों रुपये खर्च करने वाले प्रत्याशी औंधे मुंह गिर गए हैं। कम खर्च करने वाले प्रत्याशियों के सिर पर सेहरा बंध गया है। जिले के अन्य प्रखंडों के परिणाम में निवर्तमान मुखिया में तीन से चार तक ही जीत दर्ज कर सके थे। लेकिन बेलहर के नतीजे में निवर्तमान मुखिया की आधी आबादी वापस लौट आई है। कड़ी टक्कर के बावजूद भी जनता ने उन पर भरोसा जताया है। निवर्तमान मुखिया की आधी संख्या नौ वापस लौट गए हैं। हालांकि हारने वालों में दो ऐसे दिग्गज मुखिया हैं, जिनकी जनता के बीच खासी लोकप्रियता थी। दोनों की हार से उन पंचायतों के जनता के एक बड़े तबके में मायूसी दिख रही है।

नक्सल प्रभावित तेलियाकुमरी, निमियां, रघुनाथपुर, झिकुलिया, लौढि़या के अलावा श्रीनगर, राजपुर, बहोरना, सूर्यकाना बेलडीहा पंचायत से निवर्तमान मुखिया चुनाव हार गए। साहबगंज, बेलहर, डुमरिया, घोड़बहियार, तरैया, रांगा, बसमाता पंचायत से निवर्तमान मुखिया ने जीत हासिल किया है। बसमाता और साहबगंज पंचायत का चुनाव काफी चर्चित था। लेकिन जनता की एकजुटता ने दोनों की जीत की राह आसान कर दिया। हथियाडाढ़ा और धौरी पंचायत से सास की जगह पुत्रवधु ने बागडोर थामी। दोनों को विरासत में मुखिया पद मिला। पहले हथियाडाढ़ा से रुणा देवी मुखिया थीं। जिन्होंने अपनी पुत्रवधु ज्योति कुमारी को चुनाव मैदान में उतारा था। जीत भी दर्ज कर लिया। धौरी से कौशल्या देवी मुखिया थीं।अस्वस्थता के कारण पुत्रवधू प्रेमलता सिंह को मैदान में उतार दिया। उसने जीत भी दर्ज कर लिया। 18 में से नौ पंचायत की कमान निवर्तमान मुखिया और उनके पुत्रवधुओं के हाथों रही।

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