बांका। धोरैया का पंचायत चुनाव परिणाम सीटिग मुखिया के लिए अच्छी खबर लेकर नहीं आया है। अबतक की गिनती में अधिकांश मौजूदा मुखिया चुनाव हार गए हैं। रिजल्ट ने परिपक्व हो रहे पंचायती राज व्यवस्था पर मुहर लगाई है। मतदाताओं ने स्वाद बदला और अधिकांश मुखिया को कुर्सी से बेदखल कर दिया। पुराने उसी मुखिया को मौका मिला जिसने अपनी छवि बचाकर रखी और जनता का विश्वास जीता। नए मुखिया में भी जिम्मेदार और साफ सुथरे चेहरे को मौका मिला है। रविवार की गिनती में केवल दो मौजूदा मुखिया अपनी कुर्सी बचाने में सफल हो सके है। पीबीएस में आठ बजे मकैता बबूरा पंचायत की गिनती शुरु हो गई। बबूरा से मुखिया नुसरत जरी हार गई, उनकी जगह तमन्ना प्रवीण को मौका मिला। काठबनगांव-बीरबलपुर पंचायत से मुखिया मैमूना खातून को हार का सामना करना पड़ा। उन्हें हराकर रोचक मुकाबले में निर्जला देवी मुखिया बनीं। ताहिरपुर-गौरा पंचायत से बीबी हाजरा खातून मुखिया बनीं। उन्होंने मौजूदा मुखिया मु.इकबाल को हराया। बटसार में रजनीश कुमार लगातार दूसरी बार जीते। इसके पहले वे पंचायत समिति सदस्य बने थे। करहरिया से मु.जहांगीर भी अपनी कुर्सी बचाने में सफल रहे। वे लगातार दूसरी बार मुखिया बने हैं। सिझत-बलियास पंचायत से जदयू अध्यक्ष ग्यास खान चुनाव जीते हैं। उन्होंने मौजूदा मुखिया उमेश सिंह को हराया। महिला विशनुपर पंचायत में फरहद प्रवीण नए मुखिया बने हैं। पंचायत की मौजूदा मुखिया आरा खातून का नामांकन इस बार झारखंड का जाति प्रमाण प्रत्र के कारण रद हो गया। सैनचक पंचायत से रेखा देवी मुखिया बनी है। मौजूदा मुखिया सुशीला देवी को हार का सामना करना पड़ा।

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