बांका में बदल सकता है वार्डों का स्वरूप, शहर से सटे ग्रामीण इलाके होंगे नगर परिषद में शामिल; बढ़ेंगी सुविधाएं
नगर विकास विभाग ने बांका सहित सभी डीएम से नगर निकायों के पुनर्गठन का प्रस्ताव मांगा है, जिसके तहत बांका ...और पढ़ें

एआई द्वारा जेनरेट इमेज।
HighLights
नगर विकास विभाग ने नगर निकायों के पुनर्गठन का प्रस्ताव मांगा।
बांका शहर से सटे ग्रामीण इलाके नगर परिषद में होंगे शामिल।
शहरी सुविधाओं का विस्तार होगा और वार्डों का स्वरूप बदलेगा।
संवाद सूत्र, बांका। शहरी क्षेत्र के विस्तार और नए नगर निकायों के गठन की कवायद तेज हो गई है। नगर विकास एवं आवास विभाग ने बांका सहित राज्य के सभी डीएम से नगर निकायों के पुनर्गठन को लेकर प्रस्ताव मांगा है।
विभाग की ओर से जारी पत्र में दो या अधिक नगरपालिका क्षेत्रों को एक नगरपालिका क्षेत्र में गठित करने, नगर पालिका क्षेत्र से सटे ग्रामीण क्षेत्र को उसमें शामिल करने, पुराने नगर निकायों के उत्क्रमण तथा नए नगर निकाय के गठन के लिए प्रस्ताव उपलब्ध कराने को कहा गया है।
इस आदेश के बाद जिला में भी शहरीकरण की वर्तमान स्थिति और नगर निकायों की सीमा के पुनर्गठन को लेकर प्रशासनिक स्तर पर कवायद शुरू होने की उम्मीद है।
खासकर बांका नगर परिषद के आसपास तेजी से विकसित हो रहे ग्रामीण क्षेत्रों को नगर परिषद की सीमा में शामिल करने की संभावना पर प्रस्ताव तैयार किया जा सकता है।
इन चार बिंदुओं पर मांगा गया है प्रस्ताव
विभाग के पत्र में नगर निकायों के पुनर्गठन के लिए व्यापक विकल्प दिए गए हैं। इसमें दो या अधिक नगरपालिका क्षेत्रों का एकीकरण, किसी नगर निकाय से लगे ग्रामीण क्षेत्र को उसमें शामिल करना, पुराने नगर निकाय का उत्क्रमण और आवश्यकता के अनुसार नए नगर निकाय का गठन शामिल है।
इसके लिए जिला प्रशासन को संबंधित क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति, आबादी, आर्थिक गतिविधियों और शहरीकरण की स्थिति को ध्यान में रखते हुए प्रस्ताव देना होगा।
बांका शहर से सटे गांवों पर टिकी नजर
शहर की सीमा से सटे कई ग्रामीण इलाकों में आवासीय निर्माण और व्यावसायिक गतिविधियां बढ़ी हैं। ऐसे क्षेत्रों को नगर परिषद में शामिल किए जाने पर वहां शहरी सुविधाओं का विस्तार हो सकेगा।
सड़क, नाला, जलापूर्ति, स्ट्रीट लाइट, कचरा प्रबंधन और साफ-सफाई जैसी सुविधाएं नगर निकाय की व्यवस्था के तहत आ सकती हैं।
हालांकि ग्रामीण क्षेत्र को नगर परिषद में शामिल करने से पहले उसकी आबादी, भौगोलिक निरंतरता, गैर-कृषि गतिविधियों और अन्य निर्धारित मानकों का आकलन करना होगा। इसके आधार पर ही जिला स्तर से प्रस्ताव तैयार किया जाएगा।
सीमा विस्तार के बाद बदलेगा वार्डों का स्वरूप
यदि बांका नगर परिषद की सीमा का विस्तार होता है तो इसके बाद वार्डों के परिसीमन की प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण होगी। नए क्षेत्र शामिल होने के बाद आबादी और भौगोलिक स्थिति के आधार पर वार्डों का पुनर्गठन किया जा सकता है। इससे वर्तमान वार्डों की सीमा में बदलाव के साथ नए वार्ड बनने की संभावना भी रहेगी।
राज्य निर्वाचन आयोग नगर निकायों के वार्ड गठन और परिसीमन की प्रक्रिया संचालित करता है। ऐसे में नगर निकाय का अंतिम स्वरूप तय होने के बाद ही वार्ड परिसीमन की अगली प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
ग्रामीण से शहरी क्षेत्र बनने पर बढ़ेंगी सुविधाएं
नगर परिषद में शामिल होने वाले ग्रामीण इलाकों को शहरी सुविधाओं का लाभ मिलेगा। वहीं, दूसरी ओर शहरी क्षेत्र में शामिल होने के बाद संबंधित लोगों पर होल्डिंग टैक्स सहित अन्य नगर निकाय शुल्क का दायरा भी बढ़ सकता है।
इसलिए सीमा विस्तार के साथ लोगों की सुविधाओं और वित्तीय दायित्वों दोनों का आकलन जरूरी होगा। बता दें कि दो-तीन साल पहले यहां पर बौसी और कटोरिया नगर पंचायत का गठन किया गया है। पहले जिले में 185 पंचायत थी। लेकिन इन दोनों नगर पंचायत के गठन के बाद पंचायत की संख्या घटकर 182 हो गई है।
