सांप काटने पर झाड़-फूंक बना काल! बांका में पिता-पुत्र समेत 50 मौतें, अस्पताल में एंटी स्नेक वेनम फिर भी अंधविश्वास
Banka Snakebite Deaths Reality: बांका जिले में सर्पदंश से हर साल 50 से अधिक मौतें झाड़-फूंक और अंधविश्वास के कारण ...और पढ़ें

Banka Snakebite Deaths Reality: सर्पदंश के बाद इलाज के लिए जुटी ग्रामीणों की भीड़।
HighLights
बांका में सर्पदंश से 50 से अधिक मौतें प्रति वर्ष।
झाड़-फूंक और अंधविश्वास के कारण समय पर इलाज में देरी।
अस्पतालों में पर्याप्त एंटी-स्नेक वेनम उपलब्ध, जागरूकता की कमी।
संवाद सहयोगी, धोरैया (बांका)। Banka Snakebite Deaths Reality:बांका जिले से एक कड़वी और दुखद सच्चाई सामने आ रही है। जिले के ग्रामीण इलाकों में आज भी सर्पदंश की स्थिति में आधुनिक डॉक्टरी इलाज के बजाय झाड़फूंक, ओझा-गुणी और घरेलू नुस्खों के फेर में पड़कर अनमोल जिंदगियां गंवानी पड़ रही हैं।
बांका जिले में हर वर्ष सर्पदंश (सांप काटने) के कारण 50 से अधिक लोगों की जान चली जाती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों की मानें तो इनमें से अधिकांश मौतें केवल इसलिए होती हैं क्योंकि पीड़ित को समय पर अस्पताल नहीं पहुंचाया जाता और झाड़फूंक में बहुमूल्य समय बर्बाद हो जाता है।
बांका जिले में हर वर्ष सर्पदंश से 50 से अधिक लोगों की मौत, झाड़फूंक और अंधविश्वास बनी मुख्य वजह
धोरैया के इस्लामपुर में सांप काटने से पिता सरफराज और 2 वर्षीय पुत्र सुफियान की मौत; अस्पताल ले जाने में हुई देरी
अमरपुर, कटोरिया, बेलहर और धोरैया प्रखंडों में बरसात के मौसम में सर्पदंश के मामलों में भारी बढ़ोतरी से मचा हड़कंप
प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डा. ज्योति राजबार की अपील— अस्पतालों में पर्याप्त एंटी स्नेक वेनम उपलब्ध, झाड़फूंक में न गंवाएं समय
जिले के अमरपुर, कटोरिया, बेलहर और धोरैया प्रखंड में सर्पदंश की घटनाएं सबसे अधिक दर्ज की जा रही हैं। हाल ही में धोरैया प्रखंड के चलना पंचायत स्थित इस्लामपुर गांव में घटी घटना ने पूरे जिले को झकझोर कर रख दिया है। यहां गुरुवार रात सरफराज और उनके महज दो वर्षीय पुत्र सुफियान को सोते समय जहरीले सांप ने डस लिया।
बच्चे के लगातार रोने के बावजूद स्वजन उसे तत्काल अस्पताल ले जाने के स्थान पर गांव में ही झाड़फूंक कराने में उलझे रहे। देखते ही देखते शरीर में जहर फैल गया और पिता-पुत्र दोनों की इलाज के अभाव में तड़प-तड़पकर मौत हो गई। मृतक सरफराज की पत्नी आयशा इस समय गर्भवती है और एक साथ पति व मासूम बेटे को खोने के बाद उस पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।
झाड़फूंक में गई जान, तो अस्पताल पहुंचने पर बची जिंदगी
केस 01: घसिया पंचायत के बेलड़िहा गांव निवासी 13 वर्षीय सन्नी कुमार को सांप काटने पर स्वजन अस्पताल ले जाने के बजाय घंटों झाड़फूंक कराते रहे, जिससे समय पर इलाज न मिलने के कारण बच्चे की मौत हो गई।
केस 02: चंदाडीह के पंठिया गांव की 41 वर्षीय निर्मला देवी की भी झाड़फूंक के चक्कर में जान चली गई। वहीं इसके ठीक विपरीत, पैर पंचायत के झाझा गांव में 15 वर्षीय महि मुर्मू को सर्पदंश के तुरंत बाद स्वजन झारखंड के गोड्डा अस्पताल ले गए, जहां डॉक्टरों ने समय पर एंटी-वेनम देकर उसकी जान बचा ली।
केस 03: मकैता बबुरा के 65 वर्षीय हदीश मंसूरी की खेत में सर्पदंश से समय पर इलाज न मिलने पर मौत हो गई। जबकि किशनपुर गांव के 30 वर्षीय राजेश कुमार को परिजनों ने समझदारी दिखाते हुए तत्काल अस्पताल पहुंचाया और डॉक्टरों ने उसे पूरी तरह स्वस्थ कर दिया।
अस्पतालों में पर्याप्त एंटी स्नेक वेनम मौजूद: डा. ज्योति
मामले की गंभीरता को देखते हुए धोरैया की प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डा. ज्योति राजबार ने बताया कि जिले के सभी सरकारी अस्पतालों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर एंटी स्नेक वेनम (ASV) की पर्याप्त उपलब्धता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सर्पदंश के तुरंत बाद यदि पीड़ित को अस्पताल लाया जाए, तो उसकी जान 100% बचाई जा सकती है।
डा. राजबार ने ग्रामीणों को सलाह दी है कि रात के समय फर्श (जमीन) पर सोने से परहेज करें, सोने से पहले बिछावन को अच्छी तरह झाड़ लें और अंधेरे में टॉर्च का इस्तेमाल करें।
सांप काटने की स्थिति में यदि संभव हो तो सुरक्षित दूरी से उसकी तस्वीर खींच लें ताकि डॉक्टर को सही दवा चुनने में आसानी हो, लेकिन सांप को पकड़ने या मारने के पीछे भागकर समय न गंवाएं। ग्रामीण क्षेत्रों में फैली झाड़फूंक जैसी कुप्रथाओं के खिलाफ जागरूकता फैलाकर ही इन असामयिक मौतों को रोका जा सकता है।
