बांका। एक तरफ सरकार वर्षा जल संरक्षित करने को लाखों रुपये खर्च कर रही है। दूसरी तरफ शहर की मुख्य सड़कों पर नल की टोटी नहीं रहने से हर दिन हजारों लीटर पानी बर्बाद हो रहा है। बारिश कम होने के कारण पूरे देश में जल संकट गहराता जा रहा है। शहर का जल स्तर प्रति वर्ष एक से दो फीट नीचे जा रहा है। अभी जल जीवन हरियाली योजना के तहत भूमिगत जल को बढ़ाने के लिए वर्षा जल को वाटर हार्वेस्टिग के माध्यम से भूमि में डालने की योजना है। इसपर सरकार करोड़ों खर्च हो रहा है। इसके बावजूद संबंधित की लापरवाही से शहर में टोटी नहीं रहने से हर दिन हजारों लीटर पानी बर्बाद हो रहा है। इसे देखने वाला कोई नहीं है। महीनों से यह नल बिना टोटी ही सड़कों पर पानी बहा रहा है। शहर में अलीगंज, को-ऑपरेटिव बैंक के सामने, बोगरिया आदि में इसका दृश्य दिख जाता है।

----------------------

खुद का पानी बताने से भाग रहा विभाग

नगर परिषद और पीएचईडी दोनों पानी को अपना बताने की जिम्मेदारी से भाग रहा है। नगर परिषद कहता है यह पानी पीएचईडी का बेकार बहता है तो वह जाने। इससे उलट पीएचईडी कहता है कि शहर का पानी नगर परिषद के पास रहता है। उसे लिखित रूप से इसकी जिम्मेदारी सौंप दी गई है। नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी अभिनव कुमार ने बताया कि यह पीएचडी विभाग का है। पीएचईडी के कार्यपालक अभियंता डेविड चतुर्वेदी ने बताया कि एक जनवरी 2020 से ही इसे नगर परिषद को सौंप दिया गया है। किसी का हो पानी की बर्बादी को रोकने के लिए किसी को तो आगे आना होगा।

--------------

आम लोगों की राय

नल से दिन भर पानी बहता रहता है। देखकर भी लोग पानी की बर्बादी को अनदेखी कर देते हैं। नगर परिषद खुले टोटी में नल नहीं लगाया जाता है। पानी को बचाने के लिए इस पर ध्यान देना होगा।

सन्नी कुमार, स्थानीय

-------------------

नल में टोटी नहीं होने के कारण हजारों लीटर पानी प्रतिदिन बर्बाद हो रहा है। इसके बावजूद नगर परिषद गंभीर नहीं हो रही है। आने वाले दिनों में शहर वासियों को जल संकट की समस्या झेलनी पड़ेगी।

संतोष साह, स्थानीय

--------------------

एक तरफ लोग पीने के पानी को तरसते हैं। दूसरी तरफ हर दिन हजारों लीटर पानी बर्बाद हो रहा है। इसके लिए विभाग को एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप की बजाय किसी एक को आगे आना होगा। ताकि पानी बर्बाद होने से बचे।

मनोज ठाकुर, स्थानीय

-------------------

गर्मी आते ही शहरी क्षेत्र का जलस्तर नीचे चला जाता है। लोगों के घरों में लगा मोटर एवं चापाकल नहीं चलने लगता है। तब हमें पानी के लिए दर-दर भटकना पड़ता है। इस बर्बादी को रोकना होगा।

दिलीप साह, स्थानीय

Posted By: Jagran

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस