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तालाबों से खिल रही बांका की अर्थव्यवस्था: 19,380 टन मछली उत्पादन का लक्ष्य, हजारों को मिल रहा रोजगार

Published: Tue, 15 Sep 2026 12:43 PM (IST)

बांका जिले में सरकारी तालाबों और जलकरों से मत्स्य उत्पादन में तेजी आई है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत हो रही ...और पढ़ें

तालाबों से खिल रही बांका की अर्थव्यवस्था (एआई जेनरेटेड तस्वीर)

तालाबों से खिल रही बांका की अर्थव्यवस्था (एआई जेनरेटेड तस्वीर)

HighLights

  1. बांका में 854 सरकारी जलकरों से मत्स्य उत्पादन बढ़ा।

  2. अगस्त तक 10,852 टन मछली उत्पादन, लक्ष्य का 56%।

  3. मत्स्य पालन से हजारों लोगों को रोजगार और स्वरोजगार।

संवाद सूत्र, बांका। कभी खेती और पशुपालन तक सीमित ग्रामीण अर्थव्यवस्था अब पानी में भी रोजगार तलाश रही है। जिला में सरकारी तालाबों और जलकरों को मत्स्य उत्पादन का केंद्र बनाने की कवायद तेज हुई है। इसके परिणाम भी सामने आने लगे हैं। 

जिला के 854 सरकारी जलकरों से चालू वर्ष में 19,380 टन मछली उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। इसमें अगस्त तक 10,852 टन उत्पादन कर सालाना लक्ष्य का करीब 56 प्रतिशत तक पहुंच गया है। यह आंकड़ा धीरे-धीरे आकार ले रही मत्स्य क्रांति की तस्वीर पेश कर रहा है।

जलकरों का कुल रकबा 1,356.69 हेक्टेयर

सरकारी जलकरों का कुल रकबा 1,356.69 हेक्टेयर है। इनमें रजौन उत्पादन के मामले में सबसे आगे है। यहां 131 जलकरों से 3,294 टन मछली उत्पादन का लक्ष्य है और अगस्त तक 1,790 टन उत्पादन हो चुका है। 

शंभुगंज में 71 जलकरों से 2,907 टन के लक्ष्य के विरुद्ध 1,627.9 टन और फुल्लीडुमर में 43 जलकरों से 2,713.20 टन के लक्ष्य के विरुद्ध 1,519.4 टन उत्पादन दर्ज किया गया है।

बांका प्रखंड के 28 जलकरों में 1,410.9 टन, बाराहाट के 87 जलकरों में 1,193.8 टन और धोरैया के 144 जलकरों में 976.8 टन मछली उत्पादन अगस्त तक हो चुका है। अमरपुर, बौंसी, कटोरिया, चांदन और बेलहर में भी उत्पादन लगातार बढ़ रहा है।

जलाशय बन रहे रोजगार का आधार

मत्स्य पालन अब केवल पारंपरिक काम नहीं रह गया है। सरकारी जलकरों के साथ जिले में करीब पांच हजार निजी तालाब भी हैं। इन जलस्रोतों को रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ने की संभावनाएं बढ़ी हैं। जलकरों के रकबे में फुल्लीडुमर 502.56 हेक्टेयर के साथ सबसे आगे है। वहीं बेलहर में सबसे कम 26.55 हेक्टेयर जलकर क्षेत्र है। मछली कारोबारी पिंकू सिंह ने कहा कि इससे घर बैठे रोजगार मिल रहा है।

मछली पालन स्वरोजगार का बेहतर जरिया है। इससे युवाओं को जोड़ा जा रहा है। साथ ही सरकारी जलकरों से भी मछली उत्पादन में बढ़ोतरी का लक्ष्य रखा गया है। -कृष्ण कन्हैया, जिला मत्स्य पदाधिकारी, बांका।

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