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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 17, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Raksha Bandhan 2024: राखी बांधने का शुभ मुहूर्त क्या है? यहां पढ़िए प्रकांड पंडित की राय

Published: Sat, 17 Aug 2024 04:32 PM (IST)

Raksha Bandhan 2024 Shubh Muhurat रक्षाबंधन हिंदुओं के प्रमुख त्योहारों में से एक है। इस विशेष दिन के मौके पर ...और पढ़ें

पंडित आचार्य लाल मोहन शास्त्री (जागरण फोटो)
पंडित आचार्य लाल मोहन शास्त्री (जागरण फोटो)

HighLights

  1. रक्षाबंधन व होलिका दहन में भद्रा विचारणीय
  2. विष्णु, लक्ष्मी, अहिल्या बाई होल्कर से जुड़ा है राखी
  3. देवरानी शर्ची देवी ने देवराज इंद्र को रक्षा सूत्र बांधी थी

संवाद सहयोगी, दाउदनगर (औरंगाबाद) Raksha Bandhan 2024 Timing: सावन के अंतिम सोमवार को श्रावणी पूर्णिमा स्नान दान और राखी का पर्व है। पंडित आचार्य लाल मोहन शास्त्री ने बताया कि रक्षा बंधन के लिए शुभ मुहूर्त 01.33 बजे के बाद है। बताया कि रक्षा बंधन और होलिका दहन में भद्रा पर विचार किया जाता है।

भद्रा के बाद ही बहन अपने भाई की कलाई पर राखी बांध तथा भाई अपनी बहन को उपहार देकर एक दूसरे के प्रति स्नेह भाव को प्रदर्शित करते हैं। पुरोहित अपने यजमानों को रक्षा सूत्र बांधते और जनेऊ प्रदान करते हैं। यजमान अपने पुरोहित को दक्षिणा देते हैं।

क्या है रक्षाबंधन का महत्व

बताया कि पुराणों के अनुसार अपने पति भगवान विष्णु को दैत्यराज बली से बंधन मुक्त कराने के लिए भगवती लक्ष्मी ने राजा बली को रक्षा सूत्र बांधकर उपहार में उनकी मुक्ति मांगी थी। देवरानी शर्ची देवी ने देव दानव युद्ध में विजयी होने के लिए देवराज इंद्र को रक्षा सूत्र बांधी थी।

इंदौर की महारानी अहिल्या बाई होल्कर ने मगध के प्रथम तीर्थ गया घाम में विष्णुपद का मंदिर बनवाया। उन्होंने हिंदू सम्राट नेपाल नरेश को राखी बांधी थी। महाराजा नेपाल नरेश अहिल्या को उपहार मांगने के लिए बोले तो महारानी ने सभी बारह ज्योतिर्लिंग के साथ पशुपति नाथ की पूजा का प्रथम अधिकार मांगा। महाराज नेपाल नरेश ने इसे स्वीकार किया। आज भी प्रत्येक ज्योतिर्लिंग की प्रथम पूजा महारानी अहिल्या बाई होल्कर की ओर से की जाती है।

आज ही संस्कृत दिवस

सावन के अंतिम दिन ही संस्कृत दिवस मनाया जाता है। पंडित शास्त्री ने बताया कि भारतीय इतिहास एवं संस्कृति को जानने ले लिए संस्कृत की शरण में जाना होगा। संस्कृत भाषा का आज भारत में विशाल भंडार है।

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