औरंगाबाद। कल्याण विभाग के पैसे से कई करोड़पति बन गए। देखते ही देखते बाइक से चलने वाले गबन के आरोपित महंगी कारों की सवारी करने लगे। करोड़ों की लागत से बने भवन में ¨जदगी जीने लगे। कल्याण विभाग से अनुसूचित जाति के छात्र छात्राओं को मिलने वाली छात्रवृति राशि में गबन का ऐसा खेल चला कि जो भी इस खेल में शामिल हुआ अब पुलिस के शिकंजे में कसा जा रहा है। कल्याण विभाग के छात्रवृति राशि तत्कालीन जिला कल्याण पदाधिकारी सह वर्तमान उपनिदेशक कल्याण दरभंगा शांतिभूषण आर्य के द्वारा कॉलेजों को रेवड़ी की तरह रुपये बांटी गई। राशि छात्र छात्राओं को नहीं मिली और कॉलेज प्रबंधन के द्वारा गबन कर ली गई। कल्याण विभाग से राशि गबन का खेल वर्ष 2012 से लेकर 2015 तक चला। तीन वर्षों में करीब 6 करोड़ से अधिक राशि गबन का मामला उजागर हुआ है। हालांकि सही तरीके से मामले की जांच हो तो राशि 20 करोड़ से अधिक हो सकती है। कल्याण विभाग से छात्रवृति मद की राशि गबन से संबधित तीन थानों में तीन प्राथमिकी दर्ज हो चुकी है। शहर के महाराजगंज रोड में संचालित मेगासॉफ्ट कॉलेज के द्वारा करीब 2 करोड़ 16 लाख गबन का मामला उजागर होने के बाद वर्तमान जिला कल्याण पदाधिकारी कृष्ण कुमार सिन्हा के द्वारा मंगलवार को नगर थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। मामले में तत्कालीन डीडब्लूओ वर्तमान दरभंगा में उपनिदेशक के अलावा कॉलेज के प्राचार्य, सचिव, कल्याण कार्यालय के तत्कालीन नाजीर एवं सहायक अभियुक्त बने हैं। जांच में मेगासॉफ्ट कॉलेज के द्वारा गबन की गई राशि दो करोड़ 16 लाख से बढ़ भी सकती है। कल्याण विभाग की राशि गबन मामले के देवकुंड थाना में 22 अगस्त 2017 को तत्कालीन जिला कल्याण पदाधिकारी सुरेंद्र राम के द्वारा करीब 34 लाख गबन का मामला दर्ज कराई गई थी। मामले में तत्कालीन डीडब्लूओ शांतिभूषण आर्य के अलावा पीएनबी देवकुंड के प्रबंधक विपीन बिहारी भोला, कार्यालय के नाजिर अलबेल अजय कुजूर एवं अन;् नामजद अभियुक्त बने थे। पुलिस ने डीडब्लूओ एवं नाजीर को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। अन्य कोर्ट से जमानत पर है। पुलिस ने इस मामले में कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी है। हालांकि पुलिस का पूरक अनुसंधान जारी है। कल्याण विभाग की राशि गबन को खेल चलता रहा और इस खेल में मदनपुर के टेकाबिगहा विद्यालय के प्रधानाध्यापक चंदन कुमार फंसे। तत्कालीन आरोपित डीडब्लूओ के द्वारा बिना किसी जांच पड़ताल के विद्यालय विकास के खाते में करीब दो करोड़ 85 लाख भेजी गई। प्रधानाध्यापक ने राशि का गबन कर लिया। गबन के इस मामले में प्रधानाध्यापक के अलावा डीडब्लूओ, एमबीजीबी के बैंक प्रबंधक अभियुक्त बने। गबन का मामला एक करोड़ से अधिक होने के कारण कांड को आर्थिक अपराध इकाई ने अपने अधीन ले लिया है। 20 दिन पहले इओयू के द्वारा प्रधानाध्यापक को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है। प्राथमिकी के बाद फरार हो गए लोकपाल

मेगासाफ्ट कॉलेज के द्वारा छात्रवृत्ति राशि गबन मामले में नगर थाना में मंगलवार को प्राथमिकी दर्ज होने के बाद मामले में आरोपित मनरेगा के लोकपाल सह कॉलेज के प्राचार्य डा. विनोद कुमार फरार हो गए हैं। बुधवार को समाहरणालय स्थित डीआरडीए में आरोपित लोकपाल अपने कार्यालय से गायब थे। कर्मियों के द्वारा बताया गया कि वे मंगलवार से ही कार्यालय नहीं आ रहे हैं। कार्यालय में नहीं आने की कोई सूचना नहीं दिए हैं। उधर प्राथमिकी के बाद लोकपाल को हटाने की कार्रवाई डीएम के स्तर से शुरु कर दी गई है। बताया जाता है कि लोकपाल औरंगाबाद के अलावा सासाराम एवं कैमूर जिले के प्रभार में हैं। एसपी डा. सत्यप्रकाश ने बताया कि मामला सरकारी राशि गबन से संबधित है। डीएम के आदेश पर प्राथमिकी दर्ज हुई है। प्रथम दृष्टया मामले को सही पाते हुए आरोपितों की गिरफ्तारी का आदेश दिया गया है। जांच में खुलेगा अन्य कॉलेजों का फर्जीवाड़ा

मेगासाफ्ट कॉलेज के द्वारा छात्रवृत्ति राशि गबन मामले की जांच में अन्य कॉलेजों के फर्जीवाड़े की राज खुलेगी। दर्ज प्राथमिकी के अनुसार कई अन्य कॉलेजों को कल्याण विभाग से छात्रवृति की राशि भेजी गई है। कॉलेजों के द्वारा राशि छात्र छात्राओं को न देकर गबन कर लिया गया है। यहां के जिला कल्याण कार्यालय से इस जिले के कुछ कॉलेजों के अलावा चेन्नई, सिलीगुड़ी, जमशेदपुर, अर्नाकुलम में संचालित कॉलेजों को राशि दी गई है। कॉलेजों के द्वारा छात्रवृत्ति की करोड़ों रुपये फर्जी नामांकन दिखाकर किया गया है। फर्जी अभिश्रव प्राप्त कर कॉलेज संचालकों के द्वारा राशि का गबन किया गया है। एसपी ने बताया कि अनुसंधान में पूरे मामले की जांच होगी। एसडीओ ने भी अपनी जांच रिपोर्ट में अन्य कॉलेजों की जांच की अनुशंसा की है। आरटीआई से खुला गबन का राज

मेगासाफ्ट कॉलेज के द्वारा करोड़ों रुपये गबन का राज आरटीआई से उजागर हुआ है। आरटीआई कार्यकर्ता न्यू एरिया निवासी संजय कुमार ¨सह ने आरटीआई दाखिल कर कल्याण विभाग से छात्रवृत्ति राशि वितरण की जब सूची मांगी तो विभाग में हड़कंप मच गया। आरटीआई के तहत जब सूची मिली तो कॉलेज के फर्जीवाड़े का राज खुला। तब जांच के लिए डीएम राहुल रंजन महिवाल के द्वारा एसडीओ डा. प्रदीप कुमार के नेतृत्व में टीम गठित की। टीम ने जांच में गबन का मामला सही पाया। एसडीओ की जांच से विभाग में हड़कंप है।

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