विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

आधी रात में थानेदार को लगाया कॉल, पुलिस को साथ लेकर की छापामारी; बिहार में फर्जी IPS के वसूली गेम का पर्दाफाश  

Published: Sun, 13 Sep 2026 08:38 AM (IST)

खुद को प्रशिक्षु एसपी बताकर पुलिस को झांसा देने वाला विकास कुमार सिंह वर्दी, फर्जी आईपीएस पहचान पत्र और अंगरक्षक के सहारे सड़कों पर वाहन चालकों से वसूली करता था।

पिंटू कुमार और सहयोगी कुंदन कुमार और घटना में प्रयुक्त कार। फोटो जागरण

पिंटू कुमार और सहयोगी कुंदन कुमार और घटना में प्रयुक्त कार। फोटो जागरण 

HighLights

  1. फर्जी एसपी विकास सिंह वर्दी पहनकर करता था वसूली।

  2. पुलिस को व्हाट्सएप कॉल से दिया था झांसा।

  3. गिरोह के तार बिहार से झारखंड तक फैले हैं।

जागरण संवाददाता, औरंगाबाद। खुद को प्रशिक्षु एसपी (Trainee SP) बताकर पुलिस को झांसा देने वाला विकास कुमार सिंह केवल फर्जी पहचान बनाकर घूमने तक सीमित नहीं था, बल्कि पुलिस की वर्दी, फर्जी आइपीएस पहचान पत्र और अंगरक्षक के सहारे सड़कों पर वाहन चालकों से वसूली करता था।

नगर थाना पुलिस की कार्रवाई के बाद उसके गिरोह के तौर-तरीकों की परत दर परत खुल रही है। गिरफ्तार वाहन चालक पिंटू कुमार और सहयोगी कुंदन कुमार ने पूछताछ में पुलिस को विकास की कथित वसूली का तरीका बताया है।

पुलिस के अनुसार, विकास गयाजी के टेकारी थाना क्षेत्र के अर्कढिबरिया गांव का निवासी है। उसके गिरोह के तार बिहार से लेकर झारखंड तक जुड़े होने की बात सामने आई है।

गिरफ्तार आरोपितों ने बताया कि वसूली के दौरान विकास अपने वाहन में पुलिस की वर्दी और आइपीएस का फर्जी पहचान पत्र रखता था। उसके पास कई मोबाइल नंबर और आधार कार्ड भी रहते थे।

वाट्सएप पर एसपी की वर्दी में अपनी तस्वीर डीपी में लगाकर वह पुलिस अधिकारियों से इस तरह बातचीत करता था कि सामने वाले को उसके फर्जी होने का संदेह नहीं होता था।

वाट्सएप काल से थानेदार को दिया झांसा

नगर थानाध्यक्ष बबन बैठा के अनुसार 10 सितंबर की रात करीब पौने 12 बजे नगर थाना के सरकारी मोबाइल पर विकास ने वाट्सएप काल किया। खुद को पलामू का प्रशिक्षु एसपी बताते हुए रमेश चौक के पास गबन के गंभीर मामले में छापामारी की बात कही और सहयोग के लिए रात्रि गश्ती पदाधिकारी का मोबाइल नंबर मांगा।

वाट्सएप डीपी में आइपीएस की वर्दी पहने तस्वीर लगी थी। पुलिस के अनुसार दारोगा प्रशांत कुमार ने विकास को रात्रि गश्ती पदाधिकारी दारोगा लखन लाल राय का नंबर उपलब्ध करा दिया।

इसके बाद विकास जसोइया मोड़ स्थित सीमेंट फैक्ट्री के पास पहुंचा और वाहनों की जांच शुरू की। उसने खीरा लदे पिकअप के चालक को अपने वाहन में बैठाया।

इसके बाद अनुग्रह नारायण रोड रेलवे स्टेशन से टेंपो से आ रहे तीन युवकों को भी वाहन में बैठा लिया। युवकों को साइबर अपराध में संलिप्तता का भय दिखाकर पूछताछ करने लगा। इसी दौरान थाना का हवलदार शिव कुमार सिंह भी उसके वाहन में मौजूद था।

शक हुआ तो हवलदार व युवकों को रास्ते में उतारकर भागा

मामला संदिग्ध लगने पर एसपी से लेकर नगर थाना पुलिस को इसकी जानकारी दी गई। पुलिस ने हवलदार के मोबाइल पर संपर्क किया। कई बार घंटी बजने के बाद फोन उठाया तो पता चला कि विकास ने हवलदार का मोबाइल अपने कब्जे में ले रखा था और किसी से बात करने से मना किया था।

इसके बाद नगर थाना पुलिस टीम उसकी तलाश में निकली। पुलिस के पहुंचने की भनक लगते ही विकास जीटी रोड के कामा बिगहा के पास हवलदार और युवकों को उतारकर भागने लगा।

एरका चेकपोस्ट के पास वाहन छोड़कर वह फरार हो गया। पुलिस उसके गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी कर रही है।

सीडीआर से खंगाला जा रहा गिरोह का नेटवर्क

पुलिस ने गिरफ्तार चालक और सहयोगी के मोबाइल जब्त कर लिए हैं। दोनों के मोबाइल की सीडीआर खंगाली जा रही है। विकास के मोबाइल नंबर 7320842329 की सीडीआर जांच हो रही है।

पुलिस को उम्मीद है कि काल डिटेल और अन्य तकनीकी साक्ष्यों से उसके संपर्क में रहने वाले लोगों तथा गिरोह के नेटवर्क का पता चल सकेगा।

गिरोह के जब्त वाहन के मालिक पटना के रामकृष्णा नगर निवासी संजय कुमार मिश्रा, कथित अंगरक्षक संजय यादव समेत अन्य आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी जारी है।

थानाध्यक्ष के अनुसार विकास पहले भी फर्जीवाड़े के एक मामले में जहानाबाद से जेल जा चुका है। गिरफ्तार पिंटू कुमार और कुंदन कुमार को शनिवार को न्यायालय में प्रस्तुत किया गया, जहां से दोनों को जेल भेजा गया है।

खीरा लदे पिकअप चालक लक्ष्मी प्रसाद ने पुलिस को बताया कि विकास ने वाहन में चोरी का सामान लदे होने की बात कहकर उससे रुपये की मांग की थी। पैसा नहीं होने पर उसे फार्म के पास उतार दिया था।

यह भी पढ़ें- बिहार में फिर मिला फर्जी IPS: असली पुलिस के साथ छापा मारा और चेकिंग भी की, पोल खुलने के डर से हुआ फरार