जमीन खरीद में 1.79 करोड़ का फर्जीवाड़ा: फर्जी तरीके से करा दी रजिस्ट्री, औरंगाबाद में ब्रोकर समेत 10 नामजद
औरंगाबाद में फर्जी कागजात के जरिए जमीन की रजिस्ट्री कराकर एक व्यक्ति से 1.79 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का मामला सामने आया है।
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एआई द्वारा जेनरेट इमेज।
HighLights
औरंगाबाद में फर्जी कागजात से जमीन की रजिस्ट्री का मामला।
पीड़ित प्रदीप कुमार से 1.79 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी हुई।
ब्रोकर समेत 10 लोगों पर नगर थाने में प्राथमिकी दर्ज।
जागरण संवाददाता, औरंगाबाद। नगर थाना क्षेत्र में दूसरे व्यक्ति की जमीन को अपना बताकर फर्जी तरीके से रजिस्ट्री कराने और 1.79 करोड़ रुपये हड़पने का मामला सामने आया है।
जसोइया गांव निवासी प्रदीप कुमार ने शनिवार को नगर थाना में प्राथमिकी कराकर ब्रोकर समेत 10 लोगों को नामजद आरोपित बनाया है।
नामजद आरोपितों में इस्लाम टोली निवासी ब्रोकर मो. फैयाज खान, उसका भाई मो. जिशान खान, धर्मशाला रोड निवासी अवधेश कुमार, फैयाज की पत्नी शमा प्रवीण, जिशान की पत्नी रूखसाना खातून, नावाडीह राजमहल रिसोर्ट के पास निवासी मो. आफताब आलम व महताब आलम, शाहपुर निवासी सुनील कुमार, श्रीकृष्ण नगर अहरी निवासी संतोष कुमार शर्मा और पठानटोली निवासी सैयद खुर्रम आदिल शामिल हैं।
प्रदीप ने पुलिस को बताया है कि उन्होंने 13 फरवरी 2025 को शाहपुर मौजा में धनंजय प्रसाद से 20 डिसमिल जमीन खरीदी थी।
जमीन की रजिस्ट्री कराने के बाद जब वे चारदीवारी का निर्माण कराने पहुंचे तो वहां पहले से मौजूद अनिरुद्ध सिंह और बसंत सिंह ने काम रोक दिया।
दोनों ने जमीन पर अपना दावा करते हुए बताया कि धनंजय प्रसाद उक्त जमीन के वास्तविक मालिक नहीं हैं। इसके बाद प्रदीप को अपने साथ हुए कथित फर्जीवाड़े की जानकारी हुई।
अलग-अलग खातों में भेजा गया पैसा
प्राथमिकी में आरोप लगाया गया है कि जमीन की रजिस्ट्री के बाद प्रदीप द्वारा दी गई राशि धनंजय प्रसाद के बजाय अलग-अलग लोगों के बैंक खातों में भेजी गई।
आरोपितों ने कथित रूप से फर्जी आधार कार्ड, पैन कार्ड और अन्य दस्तावेज तैयार कर जमीन की खरीद-बिक्री कराई। मामले में सभी आरोपितों पर साजिश के तहत 1.79 करोड़ रुपये के फर्जीवाड़े का आरोप लगाया गया है।
नगर थानाध्यक्ष बबन बैठा ने बताया कि प्राथमिकी कर मामले की जांच की जा रही है। पुलिस जमीन के स्वामित्व, रजिस्ट्री के दस्तावेज और पैसों के लेनदेन की जांच कर रही है।
इधर, शहर में बिचौलियों के माध्यम से विवादित व गलत जमीन की खरीद-बिक्री के मामले लगातार सामने आने से जमीन कारोबार की पारदर्शिता पर भी सवाल उठ रहे हैं।
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