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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 02, 2016 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

400 वर्षो से प्रज्जवलित है देवकुंड का अग्निकुंड

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Published: Tue, 02 Aug 2016 03:10 AM (IST)

औरंगाबाद। देवकुंड मठ का अग्निकुंड करीब 400 वर्षो से प्रज्जवलित है जो आज तक बुझी नहीं है।

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औरंगाबाद। देवकुंड मठ का अग्निकुंड करीब 400 वर्षो से प्रज्जवलित है जो आज तक बुझी नहीं है। 24 घटे लगातार कुंड से अग्नि प्रज्वलित होती रहती है। महर्षि भृगु को उत्पन्न करने वाली इस कुंड का रहस्य आजतक कोई जान नहीं सका है। यहां आने वाले श्रद्धालु अग्निकुंड का दर्शन करते हैं। मठ में स्थापित महर्षि च्यवन ऋषि का आश्रम, संस्थापक बालपुरी की समाधि स्थल तथा कई देवी- देवताओं की प्रतिमा दर्शनीय है जो एतिहासिक एवं पौराणिक कहानियों को याद दिलाता है। अरवल जिला के बेलसार गांव निवासी यशवंत सिंह ने मठ के संस्थापक योगी महाराज बाबा बालपुरी को मुगल शासनकाल में 300 बिगहा जमीन दान में दी थी। यह मठ जूना अखाड़े के नागा संन्यासियों की है। बाबा बालपुरी के बाद मठ के महंथ राजेंद्रपुरी, अनंतकपुरी, सुवंसपुरी, कुमारपुरी, आधारपुरी, गैवपुरी, काणपूरी, रामेश्वरपुरी, राजनारायणपुरी, गणेशपुरी, सच्चिदानंदपुरी, केदारनाथपुरी, कोठारीन, मां विद्यापुरी, रामजीपुरी, शैलेंद्रानंदपुरी, अखिलेश्वरानंदपुरी रहे। वर्तमान में मठ के महंथ कन्हैयानंदपुरी हैं। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार भगवान राम ने च्यवन ऋषि का दर्शन के लिए यहां पहुंचे थे। दर्शन करने से पूर्व तालाब में स्नान किया था। उन्हीं के द्वारा यहां शिवलिंग की स्थापना की गई है। यहां का शिवलिंग बाबा दुधेश्वरनाथ से पूरे राज्य में प्रसिद्ध है। श्रावण मास में यहां कई राज्यों से शिवभक्त जल चढ़ाने पहुंचते हैं। प्रतिवर्ष लग्न के समय मंदिर में सैकड़ों वर-वधु का पाणिग्रहण संस्कार होता है। विधायक मनोज शर्मा ने बताया कि देवकुंड को पर्यटन स्थल का दर्जा दिलाने के लिए प्रयास किया जा रहा है।

यहां चलता था संस्कृत विद्यालय

देवकुंड में संस्कृत विद्यालय चलता था। मध्यमा से लेकर शास्त्री तक की शिक्षा-दीक्षा दी जाती थी। संस्कृत शिक्षा समिति पटना से संबद्ध यह विद्यालय महंत रामेश्वरपुरी के समय प्रारंभ हुआ था। पं. शिवशकर मिश्र ने 1943 ई. तक इस विद्यालय को किसी तरह जीवित रखा परंतु आज विद्यालय का केवल अवशेष बचा है। विद्यालय का वजूद समाप्त हो गया है। आज यह विद्यालय जीवित होता तो आज बिहार के मानचित्र पर होता।

अ‌र्घ्य देने पहुंचते हैं छठव्रती

देवकुंड मंदिर के समीप च्यवन ऋषि द्वारा सप्त नदियों व सप्त सिंधुओं के जल के समावेश कर पवित्र सरोवर का निर्माण कराया गया है। यहां छठ के अवसर पर लाखों श्रद्धालु भगवान भाष्कर को अ‌र्घ्य देते हैं। तालाब की भी आश्चर्यजनक कहानियां है।

पर्यटन स्थल का नहीं मिला दर्जा

देवकुंड को पर्यटन स्थल का दर्जा दिए जाने की मांग स्थानीय सोमरिया संघ द्वारा काफी दिनों से किया जा रहा है। समय-समय पर संघ द्वारा बैठक एवं आंदोलन की जाती है। संघ के द्वारा मुख्यमंत्री तक पत्र सौंपा गया है। संघ के अध्यक्ष लोरिक यादव ने बताया कि यहां का महत्व धार्मिक दृष्टिकोण से अन्य धार्मिक स्थलों की श्रेणी से कम नहीं है।