अरवल में ओडीएफ के दावों की खुली पोल, 5 साल बाद भी सड़कों पर गंदगी; नाक बंद कर गुजरने को मजबूर राहगीर
अरवल के करपी प्रखंड को पांच साल पहले खुले में शौच मुक्त (ओडीएफ) घोषित किया गया था, लेकिन आज भी इमामगंज-करपी मुख्य पथ पर गंदगी और दुर्गंध का आलम है।

अरवल में ओडीएफ के दावों की खुली पोल
HighLights
करपी प्रखंड पांच साल पहले ओडीएफ घोषित हुआ था।
इमामगंज-करपी मुख्य पथ पर खुले में शौच जारी है।
सामुदायिक शौचालय का उपयोग नहीं हो रहा, गंदगी बढ़ रही।
संवाद सहयोगी, करपी (अरवल)। करीब पांच वर्ष पहले करपी प्रखंड को खुले में शौच से मुक्त (ओडीएफ) घोषित किया गया था। घर-घर शौचालय निर्माण के लिए 12 से 14 हजार रुपये तक की प्रोत्साहन राशि दी गई। लोगों को शौचालय के उपयोग के लिए जागरूक भी किया गया।
लेकिन इमामगंज-करपी मुख्य पथ पर बंधु बिगहा मोड़ से कोचहसा तक पहुंचते ही स्वच्छता के दावों की हकीकत सामने आ जाती है। सड़क के दोनों किनारे सुबह-शाम खुले में शौच करने वालों से गंदगी का आलम बना रहता है।
महिलाओं की सुविधा के लिए सामुदायिक शौचालय
महिलाओं की सुविधा के लिए यहां सामुदायिक शौचालय भी है। करीब 5.04 लाख रुपये की लागत से बने इस शौचालय की छत पर पानी की टंकी भी लगाई गई है। इसके बावजूद इसका समुचित उपयोग नहीं हो रहा है। सड़क किनारे फैली गंदगी और दुर्गंध से राहगीरों की परेशानी बढ़ गई है। लोग नाक पर कपड़ा रखकर गुजरते हैं।
सबसे अधिक परेशानी विद्यार्थियों को होती है। इस मार्ग से उत्क्रमित उच्च विद्यालय आने-जाने वाले छात्र-छात्राओं को गंदगी से बचते हुए कई बार सड़क के बीच से निकलना पड़ता है। ऐसे में दुर्घटना की आशंका बनी रहती है।
नियमित निगरानी के साथ सामुदायिक पहल की जरूरत
हाल में इसी तरह की एक दुर्घटना में एक व्यक्ति की मौत भी हो चुकी है। पूर्व में स्वच्छता कर्मी टार्च और सीटी लेकर लोगों को खुले में शौच से रोकते थे। अब जरूरत नियमित निगरानी के साथ सामुदायिक पहल की है।
समाजसेवियों का कहना है कि जुड़ी बिगहा, बंधु बिगहा और कोचहसा के ग्रामीणों की बैठक बुलाकर स्थायी समाधान की पहल होनी चाहिए। ओडीएफ का प्रमाणपत्र तभी सार्थक होगा, जब स्वच्छता जमीन पर दिखे। प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के साथ ग्रामीणों को भी जिम्मेदारी निभानी होगी। सवाल सिर्फ गंदगी का नहीं, राहगीरों और विद्यार्थियों की सुरक्षा का भी है।
