अरवल में 6,500 में से 3,300 स्ट्रीट लाइटें खराब, नगर परिषद की लापरवाही से सड़कों पर बढ़ा हादसों का खतरा
अरवल शहर में लगी 6,500 एलईडी स्ट्रीट लाइटों में से लगभग आधी, यानी 3,300 खराब पड़ी हैं, जिससे शाम ढलते ही सड़कें अंधेरे में डूब जाती हैं।

अरवल में स्ट्रीट लाइटें खराब
जागरण संवाददाता, अरवल। शहर को रोशन करने की योजना तो बनी, हजारों एलईडी स्ट्रीट लाइटें भी लगा दी गईं, लेकिन अब इनकी सुध लेने वाला नजर नहीं आ रहा। नगर परिषद क्षेत्र के 25 वार्डों में लगी करीब 6,500 एलईडी स्ट्रीट लाइटों में से 3,300 वर्तमान में खराब पड़ी हैं। यानी करीब आधी रोशनी व्यवस्था ठप है।
शाम ढलते ही शहर की कई सड़कें और गलियां अंधेरे में डूब जाती हैं। ऐसे में राहगीरों और वाहन चालकों की परेशानी के साथ हादसे का खतरा भी बढ़ गया है। भारत सरकार के उपक्रम ईईएसएल (एनर्जी एफिशिएंसी सर्विसेज लिमिटेड) ने वर्ष 2018 में स्ट्रीट लाइटें लगाई थीं।
रखरखाव की जिम्मेदारी भी संबंधित कंपनी की
सात वर्ष तक इनके रखरखाव की जिम्मेदारी भी संबंधित कंपनी की थी। पिछले वर्ष करार समाप्त होने के बाद नगर परिषद ने नया अनुबंध नहीं किया। नतीजा यह हुआ कि एक-एक कर लाइटें खराब होती गईं और व्यवस्था अंधेरे में जाती रही। कई जगह स्थिति ऐसी है कि स्ट्रीट लाइट पोल पर टूटकर लटक रही हैं।
पटना रोड में भगत सिंह चौक से अहियापुर तक 70 से अधिक लाइटें खराब हैं। नहर रोड, जहां अक्सर दुर्घटनाएं होती हैं, वहां भी गिनी-चुनी लाइटें ही जल रही हैं। पुलिस लाइन जाने वाली सड़क की स्थिति भी बेहतर नहीं है। शहर की अन्य गलियों में भी यही तस्वीर दिखाई देती है।
मुख्य सड़कों पर 110 वाट की एलईडी लगाई गई
योजना के तहत 10 से 12 फीट चौड़ी गलियों में 45 वाट, 20 से 22 फीट चौड़ी सड़कों पर 70 वाट और मुख्य सड़कों पर 110 वाट की एलईडी लगाई गई थी। सवाल यह है कि करोड़ों रुपये की योजना के बाद जब रखरखाव का करार खत्म हुआ तो नगर परिषद ने वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं की? क्या शहर को रोशन करने की योजना केवल लाइट लगाने तक ही सीमित थी?
क्या कहते हैं पदाधिकारी
कार्यपालक पदाधिकारी मोनू कुमार ने कहा कि लाइट ठीक करने की जिम्मेदारी संवेदक को दी गई है। कई स्ट्रीट लाइट ठीक भी कराई गई हैं। जल्द ही सभी खराब लाइटों को ठीक करा दिया जाएगा।
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