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दुआएं देने वाले हाथों में अब होगी समाज की सुरक्षा की कमान, बिहार के अरवल में ट्रेनिंग ले रही 15 मंगलामुखी जवान

Published: Tue, 29 Sep 2026 01:39 PM (IST)

बिहार पुलिस में 15 मंगलामुखी जवानों को शामिल किया गया है, जिन्हें अरवल में बुनियादी पुलिस प्रशिक्षण दिया जा रहा ...और पढ़ें

बिहार के अरवल में ट्रेनिंग ले रही 15 मंगलामुखी जवान

बिहार के अरवल में ट्रेनिंग ले रही 15 मंगलामुखी जवान

HighLights

  1. बिहार पुलिस में 15 मंगलामुखी जवानों को मिला नया अध्याय।

  2. अरवल में चल रहा है इनका बुनियादी पुलिस प्रशिक्षण।

  3. यह पहल सामाजिक पहचान और सम्मान का प्रतीक है।

जागरण संवाददाता, अरवल। बिहार पुलिस के इतिहास में अब एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। जिन हाथों को अब तक समाज ने सिर्फ दुआएं देने या नेक मांगने के लिए देखा था, अब उन्हीं हाथों में कानून की रक्षा का डंडा और कमर पर पिस्टल सजी होगी। बिहार सरकार की पहल के तहत 15 मंगलामुखी को सिपाही के रूप में पुलिस सेवा में शामिल किया गया है। 

राज्य के अलग-अलग जिलों से चयनित इन 15 मंगलामुखी सिपाहियों को फिलहाल अरवल में एक साल का बेसिक पुलिस प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इससे पहले इन्हें जमालपुर स्थित बीएमपी-9 में प्रशिक्षण के लिए भेजा गया था, वहां से प्रशिक्षण के बाद अब इन्हें अरवल पुलिस लाइन में पुलिसिंग की बारीकियां सिखाई जा रही हैं। 

अरवल पुलिस लाइन में ले रहे प्रशिक्षण 

अरवल पुलिस लाइन में प्रशिक्षण ले रहे ये प्रशिक्षु अब समाज में अपनी नई पहचान गढ़ने की तैयारी में हैं। प्रशिक्षण के दौरान इन्हें कानून की जानकारी, अनुशासन, पुलिस की कार्यप्रणाली और कानून-व्यवस्था से जुड़े जरूरी पाठ पढ़ाए जा रहे हैं। प्रशिक्षण दे रहे इंस्पेक्टर रमेश कुमार सिंह के अनुसार सभी प्रशिक्षु पूरी गंभीरता के साथ प्रशिक्षण हासिल कर रहे हैं। 

वहीं, पुलिस लाइन के अधिकारी ओम प्रकाश अरुण भी इन्हें पुलिस की जिम्मेदारियों और कानून-व्यवस्था से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां दे रहे हैं। 

सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने में अपनी भूमिका निभाएंगे

उन्होंने कहा कि यह पहल महज सरकारी नौकरी मिलने तक सीमित नहीं है बल्कि मंगलामुखी के लिए यह सामाजिक पहचान और सम्मान की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है। अब ये प्रशिक्षु वर्दी पहनकर आम लोगों की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने में अपनी भूमिका निभाएंगे। 

प्रशिक्षण पूरा होने के बाद इन जवानों के कंधों पर सिर्फ पुलिस की वर्दी नहीं होगी, बल्कि कानून के पालन, जनता की सुरक्षा और समाज में शांति बनाए रखने की जिम्मेदारी भी होगी। अरवल में चल रहा यह प्रशिक्षण बिहार पुलिस के इतिहास में सामाजिक बदलाव की एक नई तस्वीर पेश कर रहा है।

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