अरवल में बाढ़ से फसल नुकसान का आकलन जारी, 33% से अधिक नुकसान पर मिलेगा ₹17000 प्रति हेक्टेयर तक अनुदान
अरवल जिले में बाढ़ प्रभावित फसलों के नुकसान का आकलन शुरू हो गया है, जिसमें अब तक 277.35 हेक्टेयर फसल बर्बाद होने की पुष्टि हुई है।

एआई द्वारा जेनरेट इमेज।
HighLights
अरवल में बाढ़ से 277.35 हेक्टेयर फसल बर्बाद, आकलन जारी।
किसानों को 33% से अधिक क्षति पर मिलेगा सरकारी अनुदान।
पट्टे पर खेती करने वाले किसान मुआवजे को अपर्याप्त मान रहे।
जागरण संवाददाता, अरवल। जिले में बाढ़ प्रभावित फसलों के नुकसान का आकलन किया जा रहा है। शनिवार तक 277.35 हेक्टेयर में फसल बर्बाद होने का आंकड़ा कृषि विभाग में सामने आया था।
बाकी प्रभावित गांवों में जाकर कृषि विभाग के पदाधिकारी क्षति का आकलन कर रहे हैं। जिला प्रशासन के अनुसार बाढ़ के कारण जलभराव से तीन प्रखंड वंशी, कुर्था व करपी की 15 पंचायतों के 25 गांव प्रभावित हुए हैं।
इससे लगभग 8,750 लोग प्रभावित हुए हैं। इसके अतिरिक्त कृषि विभाग के अनुसार सदर प्रखंड की खभैनी पंचायत में पांच हेक्टेयर में फसल डूब जाने से किसानों को क्षति पहुंची है।
जिला कृषि पदाधिकारी रंजीत कुमार झा ने बताया कि आपदा राहत प्रविधानोंं के अनुसार 33 प्रतिशत से अधिक फसल नुकसान होने पर असिंचित क्षेत्र के लिए 8,500 प्रति हेक्टेयर, सिंचित क्षेत्र के लिए 17,000 प्रति हेक्टेयर और बहुवर्षीय फसलों के लिए 22,500 प्रति हेक्टेयर तक का अनुदान दिया जाएगा।
पट्टे की जमीन पर खेती करने वाले किसानों पर बाढ़ की दोहरी मार
जिले में आई बाढ़ ने पट्टे पर जमीन लेकर खेती करने वाले किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। फसल बर्बाद होने से किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
किसानों का कहना है कि उन्होंने पट्टे की रकम के साथ खाद, बीज, जुताई और सिंचाई पर भी बड़ी पूंजी खर्च की थी। ऐसे में फसल क्षति के एवज में मिलने वाली सरकारी सहायता उनकी वास्तविक लागत के मुकाबले काफी कम है।
सिंचित क्षेत्र में किसान करीब 17 हजार रुपये प्रति बीघा तथा असिंचित क्षेत्र में करीब नौ हजार रुपये प्रति बीघा की दर से जमीन पट्टे पर लेकर खेती करते हैं। बाढ़ के पानी में फसल डूबने के बाद अब किसानों के सामने पट्टे की रकम और खेती में लगी पूंजी की भरपाई की चिंता है।
किसान प्रमोद सिंह और जगदीश सिंह ने बताया कि एक हेक्टेयर में सामान्य तौर पर 15 से 22 क्विंटल तक धान की उपज होती है। इससे किसानों को करीब 35 से 45 हजार रुपये की आय होती है।
एक हेक्टेयर में लगभग चार बीघा जमीन होती है। किसानों के अनुसार, फसल तैयार करने में पट्टे की रकम के अलावा खाद, बीज, जुताई और सिंचाई पर भी काफी खर्च हो चुका था।
बाढ़ से पूरी फसल बर्बाद होने के बाद मिलने वाला मुआवजा खेती में लगी पूंजी की तुलना में कम है। उन्होंने फसल क्षति का आकलन वास्तविक लागत और नुकसान के आधार पर करने की मांग की है।
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