ताज से पहचान मिली, अब सीमांचल की आवाज बनीं स्नेहा किरण, कविता समाजसेवा और महिला सशक्तीकरण से गढ़ रहीं नई मिसाल
पूर्व 'मिसेज बिहार' स्नेहा किरण साहित्य, समाजसेवा और महिला सशक्तिकरण में सक्रिय हैं। वह सीमांचल में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं और ...और पढ़ें

समाज सेवा, साहित्य सृजन और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में सक्रिय अररिया के रानीगंज की प्रख्यात नेत्री स्नेहा किरण
HighLights
पूर्व 'मिसेज बिहार' स्नेहा किरण साहित्य, समाजसेवा में सक्रिय।
सीमांचल में एम्स और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं की मांग।
महिला सशक्तिकरण व सामाजिक समरसता हेतु राष्ट्र सेविका समिति।
संवाद सूत्र, रानीगंज (अररिया)। फणीश्वर नाथ रेणु की उर्वर माटी अररिया जिले के रानीगंज की बेटी स्नेहा किरण किसी परिचय की मोहताज नहीं हैं। पिछले करीब एक दशक से साहित्य साधना, समाजसेवा, महिला सशक्तीकरण और तमाम समसामयिक मुद्दों पर अपनी मुखर उपस्थिति दर्ज कराने वाली स्नेहा किरण ने सीमित संसाधनों के बीच सामाजिक फलक पर एक विशिष्ट पहचान बनाई है।
अररिया जिले के रानीगंज की रहने वाली पूर्व 'मिसेज बिहार' स्नेha किरण पिछले एक दशक से साहित्य, संस्कृति और समाजसेवा में सक्रिय
राष्ट्र सेविका समिति की जिला संयोजिका के रूप में सामाजिक समरसता और भारतीय सभ्यता के संरक्षण में दे रही हैं योगदान
सीमांचल क्षेत्र में बाढ़ की समस्या, स्वास्थ्य सुविधाओं की बदहाली और एम्स (AIIMS) जैसी उच्चस्तरीय चिकित्सा संस्थान की मुखर मांग
प्रसिद्ध शिक्षाविद् एवं प्रधानाध्यापक रहे स्व. राम नारायण प्रसाद (रमण बाबू) को मानती हैं अपना मुख्य प्रेरणास्रोत
पूर्व 'मिसेज बिहार' का खिताब जीत चुकीं स्नेहा किरण साहित्यिक लेखन के साथ-साथ सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों में भी पूरी तरह सक्रिय हैं।वह वर्तमान में राष्ट्र सेविका समिति की जिला संयोजिका के रूप में सामाजिक समरसता और भारतीय सभ्यता व संस्कृति के संरक्षण से जुड़े कार्यों में अहम योगदान दे रही हैं। इसके अलावा, रामकृष्ण मिशन और बेलूर मठ से गहरा जुड़ाव होने के कारण उनकी रुचि आध्यात्मिक और भक्ति मार्ग में भी रही है।
सीमांचल में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं और एम्स की स्थापना की पुरजोर मांग
सीमांचल क्षेत्र की भौगोलिक और सामाजिक चुनौतियां हमेशा से स्नेहा किरण की सक्रियता के केंद्र में रही हैं। क्षेत्र में बाढ़ की विभीषिका और स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली जैसे गंभीर मुद्दों को उन्होंने हमेशा प्रमुखता से उठाया है।
सीमांचल में उच्चस्तरीय स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के लिए 'अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान' (AIIMS) जैसी प्रतिष्ठित संस्था की स्थापना की मांग को लेकर वह लगातार सरकार का ध्यान आकृष्ट करती रही हैं। जनहित के इन ज्वलंत मुद्दों को मीडिया, धरना-प्रदर्शन और जनसहभागिता के माध्यम से उठाने के साथ-साथ युवाओं को संगठित कर सामाजिक आंदोलनों को धार देने में भी उनकी अग्रणी भूमिका रही है।
महिला सशक्तिकरण और शिक्षाविद् दादा रमन बाबू के आदर्शों से प्रेरणा
महिलाओं के कानूनी अधिकार, उनकी आत्मनिर्भरता और सर्वांगीण सशक्तीकरण से जुड़े विषयों पर वह लगातार जमीनी स्तर पर कार्य कर रही हैं। करीब दर्जनभर स्वयंसेवी संगठनों (NGO) और सामाजिक संस्थाओं से जुड़कर जनकल्याणकारी योजनाओं को धरातल पर उतारने में उनका विशेष योगदान है।
स्नेहा किरण अपने नाना या दादा नहीं बल्कि अपने दादा स्व. राम नारायण प्रसाद (रमण बाबू) को अपना सबसे बड़ा प्रेरणास्रोत मानती हैं। रमण बाबू जिले के बेहद प्रतिष्ठित और जाने-माने शिक्षाविद् व सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक थे।
उनके उच्च विचारों और जीवन मूल्यों से प्रेरणा लेकर ही वह साहित्य, समाज और राजनीति के क्षेत्र में निरंतर सेवाभाव के साथ अग्रसर हैं।
यह भी पढ़ें- अररिया के दो क्रिकेटरों का बिहार U-19 में चयन! अमन के बल्ले से 237 रन, शिवम ने 13 विकेट लेकर मचाया धमाल
