संसू, फारबिसगंज (अररिया): बाल साहित्यकार राम सिंहासन सहाय मधुर की जयंती गुरुवार को बिहार बाल मंच के द्वारा प्रोफेसर कालोनी में मनाई गई। मंच के संस्थापक विनोद कुमार तिवारी की अध्यक्षता में मनाई गई कार्यक्रम का संचालन मनीष राज ने किया।

स्कूली बच्चों के द्वारा मधुरजी की तस्वीर पर श्रद्धा सुमन अर्पण के बाद श्री तिवारी ने बच्चों को बताया कि गंगा और सरयू के आंचल में बसे सागर पाली, बलिया (उत्तर प्रदेश) में बाल साहित्यकार राम सिंहासन सहाय मधुर का जन्म 24 नवम्बर 1903 को हुआ था। बाल साहित्य के उन्नायक एवं बालगीतों के रचयिता मधुरजी ने समाज की पीढि़यों के लिए संपूर्ण बाल साहित्य प्रस्तुत किया। मधुर लहरी, मधुर बिदु, ऐतिहासिक कथाएं, बच्चों के गीत, गरल सुधा एवं पुष्पक यात्रा इनकी लोकप्रिय कृतियां हैं।

वहीं प्रोफेसर सुधीर सागर ने कहा कि मधुरजी का साहित्य गांधीवादी, सामाजिक परिवर्तन एवं नव राष्ट्र निर्माण की विचारधारा का साहित्य है। विद्रोह की काव्य भावना के साहसी कवि के रूप में दिनकर जी ने इनके साहस को सराहा था। युवा समाजसेवी मयंक राज ने कहा कि बच्चों में नैतिक शिक्षा,संस्कार चरित्र एवं आत्मबल के निर्माण की शिक्षा ही उनकी रचनाओं का उद्देश रहा। जबकि हिदी सेवी अरविद ठाकुर ने कहा कि बाल साहित्य के अध्ययन की दिशा में इनके द्वारा दिए गए योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता। बच्चों को सही रास्ता दिखाने में इनकी रचनाएं सर्वथा समर्थ हैं। मौके पर बच्चों ने भी अपनी मनपसंद कविताओं का पाठ किया। मंच की ओर से सभी बच्चों को कॉपी और कलम उपहार में प्रदान किया गया।

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