अजीत कुमार फुलकाहा (अररिया): नरपतगंज प्रखंड में 20 अक्टूबर को 26 पंचायत में चुनाव होना है। लेकिन उससे पहले चुनाव से जुड़ी अलग-अलग तस्वीरें भी देखने को मिल रही है। एक ओर जहां कई पंचायतों में उम्मीदवार बिना चुनाव लड़े ही जीत हासिल कर रहे हैं,तो वहीं दूसरी ओर चुनाव में भाई-भाई, दोस्त-दोस्त, पड़ोसी- पड़ोसी,चाचा-भतीजा भी एक दूसरे के आमने-सामने हैं। जो व्यक्ति हमेशा साथ दिखते थे,साथ रहते थे अब वह भी एक दूसरे से नजरें चुरा रहे हैं। रिश्ते-नाते का अहम स्थान होता है। मगर पंचायत चुनाव आते ही रिश्तों की गांठ ढिली होने लगी है और रिश्तों की मिठास में राजनीतिक कड़वाहट घुलने लगी है। इस बार पंचायत चुनाव में सास-बहु, चाचा-भतीजा,मामा-भगिना और गोतनी-गोतनी (भाई-भाई की पत्नी) आमने सामने हैं। अब इसे राजनीतिक जागरूकता कहें या पंचायत चुनाव की चमक। जो भी हो मगर रिश्ते व मर्यादा नए रूप में दिखने लगी है। नरपतगंज प्रखंड के मानिकपुर पंचायत में कभी एक पान दो टुकड़ा करके खाने वाले दोस्त मुखिया पद के लिए एक साथ चुनावी मैदान में हैं। मतदाताओं से अपने पक्ष में वोट करने के लिए गुहार लगा रहे हैं। वही एक मामा भगिना उम्मीदवार कई बार से लड़ रहे हैं और दोनों थोड़ा के अंतर से आगे पीछे रहते हैं। इस बार भी दोनों चुनावी मैदान में हैं। सुनने में आ रहा हैं इस बार मामा से कही आगे न निकल जाए भगिना। वहीं सरपंच पद के लिए भी इस बार कई उम्मीदवार हैं क्योंकि हाल में ही सरपंच को कार्य अलाट किया गया हैं। सरपंच पद के लिए दूसरे पंचायत के भी एक व्यक्ति चुनावी मैदान में हैं वैसे अगले चुनाव में वे मुखिया पद के उम्मीदवार थे। मानिकपुर पंचायत में सरपंच पद के कई उम्मीदवार हैं। वहीं समिति पद के लिए कई उम्मीदवार हैं। इस बार सबसे ज्यादा मारामारी वार्ड सदस्य पद के लिए हो रहा हैं अगले चुनाव में जहां वार्ड 14 में चार प्रत्याशी थे वहीं इस बार सात हैं। 13 नंबर वार्ड में नौ प्रत्याशी हैं। सबसे बवाल तो तब हो गया जब एक व्यक्ति चुनाव लड़ने के नाम पर हाथ जोड़ लेते थे वह अचानक चुनावीं मैदान में कूद गए और कितने प्रत्याशी के मनसूबे पर पानी फेर दिया। जो प्रत्याशी उनको अपना वोट समझ रहे थे लेकिन अचानक वह खुद उम्मीदवार हो गए तो कितने दिल पर चोट लग गया। क्योंकि उनके चुनावीं मैदान में खुदने का कोई चांस ही नहीं था। इस बार वार्ड सदस्य पद के लिए युवा उम्मीदवार की भरमार लगा हुआ हैं। पंचायत चुनाव की रणभेरी बजते ही पंचायतों में युवा उम्मीदवारों की फौज आ गयी है। प्रखंड के हरेक पंचायतों में दर्जनों की संख्या में युवा उम्मीदवार अपनी दावेदारी सुनिश्चित करने में लगे हैं। इसके लिए गांव के गलियारों से लेकर चौक चौराहों पर लोगों के मन का टोह भी खूब लिया जा रहा है। हटिया बाजार जा रहे लोगों का हाल चाल पूछने के साथ अपने मन की बात कहने में भी युवा उम्मीदवार पीछे नहीं हट रहे है। लगे हाथों अपनी अमुक पद की दावेदारी की बात भी रखी जा रही है। साथ हीं लोगों को यह भी कहा जा रहा है आप लोग आशीर्वाद देंगे तभी नामांकन करेंगे। साथ ही युवा उम्मीदवार के युवाओं की टोली महिलाओं के वोट को अपने पक्ष में लेने की जद्दोजहद में रहते हैं। भौजी, काकी, नानी, दादी के अलावे चाहे कोई रिश्ता हो या न हो लेकिन अभी घुमा फिरा कर कोई न कोई रिश्ता जोड़ने में लगें है। भले ही यह रिश्ता चुनाव तक के लिए ही क्यों न हो। वहीं पुराने जनप्रतिनिधि खुद को एक बार और मौका देने की बात कहने में लगे हैं। कई जनप्रतिनिधि पंचायतों के अधूरे काम होने का जिम्मा कोरोना महामारी को भी बता रहे हैं। कहते हैं कि पांच साल में डेढ़ साल तो कोरोना ही खा गया। कोरोना के कारण फलां जगह का सड़क नहीं बन सका। इस बार जीतने के बाद सब सड़क को बना दिया जायेगा।

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