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-कटाव से विस्थापित हजारों परिवार तटबंध के किनारे झोपड़ियां डाल कर रहे जीवन बसर

-कई बार मिला पुनर्वास का आश्वासन लेकिन भटक रहे लोग

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अजय कुमार,किशनपुर(सुपौल): अब जबकि लोकसभा चुनाव का बिगुल फूंका जा चुका है। गांव के खेत-खलिहान समेत चौपाल में प्रत्याशियों के जीत-हार पर बहस जारी है। बावजूद कोसी विस्थापित लोग इन बातों से बेखबर अपनी समस्या का रोना रो रहे हैं। कहते हैं कोई जीते, कोई हारे कुछ लेना देना नहीं। कोसी नदी के कटाव से बर्बाद हुए लोगों की पुनर्वास की आस कई वर्ष के बाद भी पूरी नहीं हो सकी है। हालांकि इस बीच इन्हें कई बार बसने के लिए ठौर उपलब्ध कराने का आश्वासन मिलता है लेकिन यह आश्वासन अभी तक पूरा नहीं हो सका है। ऐसे में कोसी नदी में आई बाढ़ तथा कटाव से विस्थापित हजारों परिवार के सदस्य तटबंध के किनारे ही झोपड़ियां डाल कर जीवन बसर कर रहे हैं।

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वर्षो बीत जाने के बाद भी नहीं मिला ठिकाना

प्रखंड मुख्यालय से छह किलोमीटर की दूरी तय करने पर पश्चिम दिशा में स्थित कोसी नदी का पूर्वी तटबंध है। यहां पहुंचते ही कटाव पीड़ितों की दशा स्पष्ट रूप से दिखने लगती है। मुख्य तटबंध के किनारे शरण लेने को विवश इन परिवारों को कई बार सरकारी स्तर पर आवास उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया गया। इनके पुनर्वास के लिए इंतजाम करने की घोषणा भी की गई लेकिन कई वर्ष बीत जाने के बाद भी विस्थापितों को बसने के लिए ठिकाना नहीं मिल सका। इस बीच विस्थापित अपनी समस्या को लेकर कई बार सड़क पर भी उतरते रहे लेकिन नतीजा भी कुछ नहीं निकला। मुख्य तटबंध से लेकर आसपास के इलाकों में जहां-तहां शरण लेने वाले करीब आधा दर्जन पंचायतों के हजारों लोग कभी खाते-पीते परिवार में गिने जाते थे। पहले इस इलाके की पहचान अच्छी खेती व अन्न की उपज के लिए थी लेकिन 80 के दशक के बाद कोसी नदी के कहर ने इन्हें कहीं का नहीं छोड़ा। कोसी की तबाही के शिकार हुए यहां के करीब 80 प्रतिशत लोग आज मेहनत मजदूरी कर जैसे-तैसे जीवन-यापन करने को विवश हैं। कोसी नदी के कटाव की त्रासदी के कारण प्रखंड के 16 पंचायत में से आठ पंचायत नौवाबाखर, दुबियाही, परसामाधो, मौजहा, बौरहा पूर्ण तथा किशनपुर उत्तर, किशनपुर दक्षिण, शिवपुरी एवं कदमपुरा कटहारा पंचायत आंशिक रूप से प्रभावित है। इनमें से कई गांव का कटान के कारण अस्तित्व ही समाप्त हो चुका है।

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