नई दिल्ली, ऑटो डेस्क। वैश्विक मंदी और फिर कोविड-19 ने देश के ऑटोमोबाइल सेक्टर को बुरी तरह से प्रभावित किया है, लेकिन संभावनाओं को लेकर उम्मीदें अभी खत्म नहीं हुई हैं। सरकार मौजूदा माहौल में घरेलू ऑटोमोबाइल सेक्टर को राहत देने पर विचार कर रही है, जिससे न सिर्फ घरेलू बाजार में मांग बढ़ाने में मदद मिले, बल्कि वैश्विक बाजार में चीन के एक मजबूत विकल्प के तौर पर भी घरेलू उद्योग को स्थापित किया जा सके। ऑटोमोबाइल सेक्टर को कुछ वैसी ही राहत दिए जाने की संभावना है जैसी 2008-09 की मंदी के दौरान दी गई थी। इसके तहत शुल्कों में राहत का विकल्प भी सरकार के पास है।

ऑटोमोबाइल सेक्टर के सूत्रों ने बताया कि उनकी सरकार के प्रतिनिधियों से कई चरणों में बातचीत हुई है। यह सहमति बन रही है कि देश में 10 लाख लोगों को प्रत्यक्ष और परोक्ष तौर पर रोजगार देने वाले इस सेक्टर को बड़ा राहत पैकेज देने की जरूरत है। उद्योग जगत पिछले वर्ष की मंदी के बाद से ही इस बात की मांग कर रहा है कि जीएसटी दर में राहत दी जाए। पहले सरकार की तरफ से तर्क था कि राजस्व संग्रह की स्थिति को देखते हुए ऑटो सेक्टर को टैक्स दर में राहत नहीं दी जा सकती। अब ऑटोमोबाइल की बिक्री एकदम ठंडी पड़ गई है। ऐसे में अगर जीएसटी दर घटाकर घरेलू मांग में बढ़ोतरी हो जाती है तो इससे सरकार के राजस्व में भी वृद्धि होगी। यह पैकेज भारत को ऑटोमोबाइल सेक्टर में चीन के एक विश्वसनीय विकल्प के तौर पर भी स्थापित करेगा। फिलहाल ऑटो सेक्टर पर 28 फीसद जीएसटी है।

सूत्रों के मुताबिक, चीन को लेकर मौजूदा वैश्विक माहौल में इस बात की संभावना बनी हुई है कि संभवत: चीन निर्मित ऑटोमोबाइल को लेकर संशय की स्थिति रहेगी। भारत इस हालात का फायदा उठा सकता है। हाल ही में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ने दुनिया की 11 बड़ी ऑटोमोबाइल कंपनियों को अपने राज्य में प्लांट लगाने के लिए आमंत्रित किया है। इसमें से कई कंपनियां चीन में हैं। केंद्र सरकार का पैकेज इन कंपनियों को भी ध्यान में रख कर होगा।

बंदरगाहों पर रुके कंटेनर से कंपनियां परेशान

सरकार की तरफ से ऑटोमोबाइल सेक्टर को राहत का संकेत तब दिया गया है जब चीन से आयातित ऑटोमाबाइल पा‌र्ट्स को देश के तमाम बंदरगाहों पर रोका जा रहा है। चेकिंग के नाम पर आयातित पा‌र्ट्स को रोकने से ऑटो कंपनियों का उत्पादन प्रभावित हो रहा है। कोविड-19 की वजह से देश की ऑटो कंपनियां पहले से ही अपनी उत्पादन क्षमता के 50 फीसद पर काम कर रही हैं। ऑटो कंपनियों के शीर्ष संगठन सियाम के अध्यक्ष राजन बाधवा ने कहा, 'ऑटो उद्योग धीरे-धीरे सामान्य हालात की तरफ लौट रहा है। ऐसे में आयातित कंटेनरों की जांच से आपूर्ति बाधित हो रही है, जो समूचे उद्योग के लिए नुकसानदायक है।' ऑटोमोबाइल कंपोनेंट्स बनाने वाली कंपनियों के संगठन एक्मा ने भी सरकार से कहा है कि आयातित कंटेनरों को जबरन देश के तमाम बंदरगाहों पर रोकने से घरेलू ऑटो कंपनियों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। मोटे तौर पर भारत अपनी जरूरत के 30 फीसद ऑटोमोबाइल कल-पुर्जे चीन से आयात करता है। 

Posted By: Ankit Dubey

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