नई दिल्ली (ऑटो डेस्क)। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (एमओआरडीएच) ने दिसंबर 2017 में यात्री वाहनों पर बंपर गार्ड लगाने पर प्रतिबंध लगा दिया था। मंत्रालय ने कहा कि यह मोटर वाहन अधिनियम 1988 के सेक्शन 52 के उल्लंघन में था। बंपर गार्ड लगाने पर 1,000 रुपये से 5000 रुपये के बीच जुर्माना लगाया जा रहा था। हालांकि दिल्ली उच्च न्यायालय ने अब 18 अप्रैल 2018 तक इस निर्णय पर रहने का आदेश दिया है।

दिल्ली उच्च न्यायालय में दो न्यायाधीशों की एक पीठ ने बंपर गार्ड सप्लायर और निर्माताओं से बंपर गार्ड पर लगाए गए प्रतिबंध के कारणों पर स्पष्टीकरण मांगा है। इस दौरान कोई भी चालान नहीं किया जाएगा। हालांकि, प्रश्नों के उत्तर देने के लिए अधिकारियों को अभी भी एक महीने से अधिक समय है।

बंपर गार्ड के डीलर्स ने किया था विरोध:

बंपर गार्ड के मैन्युफैक्चरर और डीलर्स ने इस पर प्रतिबंद को विरोध दर्ज कराया था। इस इंडस्ट्री एसोसिएशन का कहना है बुल गार्ड पर बैन लगाने से करीब 20 लाख लोगों की रोजी-रोटी पर असर पढ़ेगा ही साथ भी सुरक्षा का खतरा बढ़ जाएगा। वही इंडियन सेफ्टी गार्ड्स इंडस्ट्रीज असोसिएशन के प्रेसिडेंट नरेंद्र मदान ने कहा कि बुल बार या सेफ्टी गार्ड गाड़ी और उसमें लोगों की रक्षा के लिए लगाए जाते हैं न कि बाहर चलने वाले लोगों को नुकसान पहुंचाने के लिए।

किसी भी प्रोडक्ट को सही कारण बताए बिना बंद करना सही नहीं है और यह व्यापार करने के संवैधानिक अधिकार के विरुद्ध भी है। नरेंद्र मदान ने यह भी कहा कि सेफ्टी गार्ड्स, ABS, फाइबर, पॉलीथिन, स्टेनलेस स्टील, एलुमिनियम से बनते हैं, लेकिन हर गाड़ी में लगा बंपर सिर्फ प्लास्टिक का होता है जोकि सेफ नहीं है और यदि टक्कर होती हैं यह सुरक्षा नहीं देता।

20 लाख लोगों की रोजीरोटी का सवाल:

आपको बता दें कि प्रतिबंध जारी रहने पर देशभर में करीब 20 लाख कच्चा माल, सप्लायर, डीलर, पैकर, फिटर, मैकेनिक की रोजीरोटी पर एक बड़ा संकट होगा। वैसे देश में क्रैश या बुल गार्ड के लिए अभी तक तो कोई कानून तो नहीं है, ऐसे में सरकार को इस बारे में कोई सुझाव या संशोधन सुझाती है तो इंडस्ट्री उसे मान सकती थी। 

By Ankit Dubey