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भारत में 2030 से नई कारों में अनिवार्य हो सकता है ऑटोमैटिक इमरजेंसी ब्रेकिंग सिस्टम, MoRTH ने जारी किया प्रस्ताव 

Published: Sun, 25 Oct 2026 07:01 PM (IST)

MoRTH ने 19 अक्टूबर 2026 को नई कारों में AEBS अनिवार्य करने का ड्राफ्ट प्रस्ताव जारी किया है।

MoRTH का बड़ा कदम

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ऑटो डेस्क, नई दिल्ली। भारत में नई कारों की सुरक्षा को बेहतर बनाने के लिए सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पेश किया है। 19 अक्टूबर 2026 को जारी ड्राफ्ट नोटिफिकेशन में यात्री कारों के लिए ऑटोमैटिक इमरजेंसी ब्रेकिंग सिस्टम (AEBS) अनिवार्य करने का प्रस्ताव शामिल है। इसके तहत 1 अक्टूबर 2030 से नई M1-कैटेगरी की यात्री कारों में यह सेफ्टी फीचर देना जरूरी हो सकता है। इसके अलावा, प्रस्ताव में ट्रकों के ब्रेकिंग सिस्टम और ड्राइवर-असिस्टेंस तकनीकों से जुड़ी आवश्यकताओं में बदलाव भी शामिल हैं।

2030 से नई कारों में AEBS देना हो सकता है अनिवार्य

MoRTH के प्रस्ताव के अनुसार, 1 अक्टूबर 2030 से नई M1-कैटेगरी की यात्री कारों में AIS-185 मानक के अनुरूप ऑटोमैटिक इमरजेंसी ब्रेकिंग सिस्टम (AEBS) देना अनिवार्य होगा। इसके बाद 1 अक्टूबर 2032 से यह आवश्यकता सभी मॉडलों पर लागू करने का प्रस्ताव है। इसका उद्देश्य नई कारों में ऑटोमैटिक इमरजेंसी ब्रेकिंग तकनीक को शामिल करना है, ताकि संभावित टक्कर की स्थिति में वाहन की सुरक्षा प्रणाली समय पर प्रतिक्रिया दे सके।

2028 से AEBS वाले M1 और N1 वाहनों के लिए AIS-185 मानक

ड्राफ्ट नोटिफिकेशन में M1 और N1 कैटेगरी के वाहनों के लिए भी प्रावधान शामिल हैं। 1 अक्टूबर 2028 से निर्मित ऐसे M1 और N1 वाहनों में, यदि AEBS दिया गया है, तो उसे AIS-185 मानक का पालन करना होगा। इस प्रावधान के तहत AEBS से लैस वाहनों के लिए निर्धारित तकनीकी मानकों का अनुपालन जरूरी होगा। वहीं, 2030 और 2032 की प्रस्तावित समयसीमा यात्री कारों में इस तकनीक को अनिवार्य बनाने से संबंधित है।

क्या है ऑटोमैटिक इमरजेंसी ब्रेकिंग सिस्टम (AEBS)?

ऑटोमैटिक इमरजेंसी ब्रेकिंग सिस्टम यानी AEBS एक ऑटोमैटिक ड्राइवर-असिस्टेंस तकनीक है, जिसे संभावित टक्कर का पता लगाने और जरूरत पड़ने पर अपने आप ब्रेक लगाने के लिए डिजाइन किया गया है। यदि ड्राइवर आपात स्थिति में समय पर प्रतिक्रिया नहीं देता है, तो यह सिस्टम वाहन की ब्रेकिंग प्रक्रिया शुरू कर सकता है।

सिस्टम की क्षमता और परिचालन परिस्थितियों के आधार पर AEBS संभावित टक्कर को टालने या उसके प्रभाव को कम करने में मदद कर सकता है। हालांकि, इसका प्रदर्शन अलग-अलग सिस्टम और परिस्थितियों के अनुसार बदल सकता है। इसलिए इसे ड्राइवर की सतर्कता का विकल्प नहीं, बल्कि एक अतिरिक्त सेफ्टी फीचर समझना चाहिए।

ट्रकों में 2027 से हो सकता है अनिवार्य

MoRTH के ड्राफ्ट में केवल यात्री कारों की सुरक्षा पर ही ध्यान नहीं दिया गया है, बल्कि ट्रकों के लिए भी नया प्रावधान प्रस्तावित है। इसके अनुसार, 1 अक्टूबर 2027 से ट्रकों में AIS-162 मानक के अनुरूप इलेक्ट्रोनिक स्टेबिलिटी कंट्रोल (ESC) सिस्टम अनिवार्य करने का प्रस्ताव है। इलेक्ट्रोनिक स्टेबिलिटी कंट्रोल वाहन की स्थिरता से जुड़ी तकनीक है। ड्राफ्ट में इसके लिए निर्धारित समयसीमा दी गई है। यदि प्रस्ताव को अंतिम मंजूरी मिलती है, तो संबंधित ट्रकों को तय मानक के अनुसार इस सिस्टम से लैस होना होगा।

ADAS फीचर्स वाली कारों को लेकर क्या है स्थिति?

भारत में एडवांस ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम (ADAS) अभी भी सभी कारों में स्टैंडर्ड फीचर के रूप में उपलब्ध नहीं हैं। ये सुविधाएं मुख्य रूप से 9 लाख रुपये से अधिक कीमत वाली कारों में देखने को मिलती हैं, हालांकि कुछ अपेक्षाकृत किफायती मॉडल भी ADAS फीचर्स के साथ उपलब्ध हैं।

फिलहाल Honda Amaze, Maruti Suzuki Baleno और Toyota Glanza को भारत में ADAS ऑफर करने वाली सबसे किफायती कारों में शामिल बताया गया है। MoRTH का प्रस्ताव लागू होने पर नई यात्री कारों में AEBS की उपलब्धता को लेकर बदलाव हो सकता है। हालांकि, प्रस्तावित अनिवार्यता और मौजूदा बाजार में ADAS की उपलब्धता को अलग-अलग समझना जरूरी है।

ड्राफ्ट नोटिफिकेशन पर कब होगा विचार?

MoRTH के अनुसार, ड्राफ्ट नोटिफिकेशन पर विचार भारत के राजपत्र (Gazette of India) में इसे सार्वजनिक किए जाने की तारीख से 30 दिन की अवधि समाप्त होने के बाद किया जाएगा। इसके बाद प्रस्तावित नियमों पर निर्धारित प्रक्रिया के तहत विचार किया जाएगा। इसका मतलब है कि AEBS और ESC से संबंधित प्रस्तावित समयसीमाओं को फिलहाल संभावित नियमों के रूप में ही देखा जाना चाहिए। अंतिम प्रावधान परामर्श और नियम बनाने की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होंगे।

कार खरीदारों के लिए क्या मायने रखता है यह प्रस्ताव?

यदि यह प्रस्ताव अंतिम रूप से लागू होता है, तो नई M1-कैटेगरी की यात्री कारों में AEBS की अनिवार्यता के लिए 2030 की समयसीमा महत्वपूर्ण होगी। वहीं, सभी मॉडलों पर इसका विस्तार 2032 से प्रस्तावित है। ट्रकों के लिए ESC की प्रस्तावित समयसीमा 1 अक्टूबर 2027 है। कार खरीदने की योजना बना रहे लोगों के लिए यह समझना महत्वपूर्ण है कि फिलहाल ये प्रस्तावित नियम हैं, न कि अंतिम रूप से लागू हो चुकी आवश्यकताएं। वाहन खरीदते समय किसी मॉडल में AEBS या अन्य ADAS फीचर्स की उपलब्धता की पुष्टि उसके संबंधित वेरिएंट की जानकारी से करनी चाहिए।

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