नई दिल्ली, ऑटो डेस्क। इलेक्ट्रिक कारों की सरकारी खरीद में विलंब होता दिख रहा है। देश में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने विभिन्न मंत्रलयों और दफ्तरों के लिए 10 हजार इलेक्ट्रिक कारें खरीदने का फैसला किया था। पहले इनकी खरीद तुरंत की जानी थी। तीन हजार कारें तो खरीदी भी जा चुकी हैं। लेकिन अब बदली आर्थिक परिस्थितियों में इस प्रक्रिया को धीमा करने तथा बड़ी कारों की जगह छोटी कारें खरीदने का फैसला किया गया है। इसके बदले अब पहले ई-चार्जिग इन्फ्रास्ट्रक्चर की स्थापना पर ध्यान दिया जाएगा।

सरकार का इरादा अगले तीन-चार वर्षो में सरकारी दफ्तरों के लिए पांच लाख इलेक्ट्रिक कारें खरीदने का है। ये कारें मौजूदा पेट्रोल-डीजल कारों का स्थान लेंगी। अनुमान है कि इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग से पेट्रोल-डीजल की खपत में सालाना 83 करोड़ लीटर, जबकि कार्बन उत्सर्जन में 22 लाख टन की कमी आएगी। यही नहीं, इससे 2030 तक देश में ऊर्जा खपत में 64 फीसद, कार्बन उत्सर्जन मंख 37 फीसद तथा पेट्रोलियम आयात बिल में 3.80 लाख करोड़ रुपये की कमी संभव होगी।

हालांकि बदली आर्थिक परिस्थितियों में इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग और उत्पादन पर भी पड़ा है। जिन राज्यों और विभागों ने पहले केंद्र सरकार की एजेंसी एनर्जी एफिशिएंसी सर्विसेज लिमिटेड (ईईसीएल) से इलेक्ट्रिक कारों की खरीद के बड़े ऑर्डर देने का वादा किया था, वे अब पीछे हट रहे हैं। बिक्री घटने से निर्माता कंपनियां भी उत्पादन में विलंब कर रही हैं। ईईसीएल ने पहले चरण में 10 हजार इलेक्ट्रिक कारों की आपूर्ति के लिए प्रतिस्पद्र्धी निविदा के जरिये टाटा मोटर्स और महिंद्रा एंड महिंद्रा का चयन किया था। परंतु दोनो कंपनियां अब तक एक-तिहाई से कम कारों की ही आपूर्ति कर सकी हैं। इस कारण ईईसीएल ने दूसरे चरण के टेंडर जारी करने की योजना को फिलहाल टाल दिया है।

ईईसीएल बिजली मंत्रालय की कंपनी है। सरकार ने इसे इलेक्ट्रिक वाहनों की खरीद के अलावा देश में चार्जिग इंफ्रास्ट्रक्चर की स्थापना का जिम्मा सौंपा है। ईईसीएल अब तक कई राज्य सरकारों, नगर निगमों, राज्य परिवहन निगमों तथा पीएसयू के साथ अनुबंध कर चुकी है। इनमें आंध्र प्रदेश, तेलंगाना तथा महाराष्ट्र और पंजाब सरकारों के अलावा दिल्ली और अहमदाबाद नगर निगम, नोएडा अथॉरिटी, चेन्नई मेट्रो रेल कॉरपोरेशन, जयपुर मेट्रो रेल, गेट्रर हैदराबाद म्युनिसिपल कॉरपोरेशन तथा बीएसएनएल शामिल हैं। अब तक देशभर में कुल 300 एसी तथा 170 डीसी चार्जिग स्टेशन स्थापित किए जा चुके हैं। इनमें 65 चार्जिग स्टेशन अकेले दिल्ली-एनसीआर में स्थापित किए गए हैं। पंजाब में 100 चार्जिग स्टेशन स्थापित करने के लिए ईईसीएल ने पिछले दिनो बीएसएनएल के साथ समझौता किया है।

केंद्र का मानना है कि एलईडी बल्बों की तरह बड़े पैमाने पर ई-वाहनों की खरीद से इनके दामों में कमी आएगी। इसके लिए राज्यों से इलेक्ट्रिक वाहन नीतियां घोषित करने को कहा गया है। अब तक दिल्ली, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक तथा केरल ने ई-वाहन नीति का एलान किया है। गौरतलब है कि फेम-2 योजना के तहत सरकार ने चालू वित्त वर्ष के दौरान इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए 10 हजार करोड़ रुपये का बजट रखा है।

Posted By: Ankit Dubey

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