नई दिल्ली (ऑटो डेस्क)। अर्जुन अवार्ड (Arjuna Award) किसी भी खिलाड़ी का एक सपना होता है। हालांकि, खेल रत्न (Khel Ratna) इस क्षेत्र का सबसे बड़ा पुरस्कार है, लेकिन अर्जुन अवार्ड की अहमियत को किसी भी मायने में कम नहीं आंका जा सकता है। हालांकि, जब कभी अर्जुन अवार्ड (Arjuna Award) की बात होती है, तो लोगों को चुनिंदा खिलाड़ी ही याद रहते हैं। ऐसे में कई खिलाड़ियों की उपलब्धी लोगों तक नहीं पहुंच पाती है। अब इसे ग्लैमर का अभाव कह लीजिए या फिर 100 करोंड़ से ज्यादा आबादी वाले इस देश का दुर्भाग्य, लेकिन आज हम आपको एक ऐसे शख्स के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसे उस क्षेत्र में अर्जुन अवार्ड मिला है, जहां आज तक किसी को नहीं मिला था। हम बात कर रहे हैं गौरव गिल (Gaurav Gill) जिन्होंने इतिहास रच दिया है।

भारतीय मोटरस्पोर्ट (Indian motorsport) के लिए एक बड़ी खुशखबरी है, जहां इस फिल्ड में पहली बार किसी को अर्जुन अवार्ड मिला है। रैली ड्राइवर गौरव गिल ने इस क्षेत्र में पहली बार अर्जुन अवार्ड जीत कर इतिहास रच दिया है। गौरव के योगदान को देखते हुए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंग (President Ram Nath Kovind) की तरफ से उन्हें अर्जुन अवार्ड दिया गया। इस अवार्ड से न सिर्फ गौरव को एक नई पहचान मिली है बल्कि, मोटरस्पोर्ट के लिए भी यह एक ऐतिहासिक पल है, जिसकी सालों से भारत में अनदेखी की जा रही थी। Ministry of Youth Affairs and Sports की तरफ से गौरव के योगदान को देखते हुए अर्जुन अवार्ड दिया है।

अर्जुन अवार्ड (Arjuna Award) भारतीय खेल जगत में सबसे बड़ी सिविलियन सम्मान है। 37 साल के गौरव गिल तीन बार एशिया पैसिफिक रैली चैम्पियन (APRC) रह चुके हैं, जो किसी भी भारतीय की तरफ से पहली बार हुआ है। गौरव 6 बार इंडियन नेशनल रैली चैम्पियनशिप (INRC) को अपने नाम कर चुके हैं। खास बात यहां यह है कि 2015 में पहली बार खेल मंत्रायल की तरफ से मोटर रेसिंग को स्पोर्ट्स का दर्जा दिया गया और फेडरेशन ऑफ मोटर स्पोर्ट्स क्लब्स ऑफ इंडिया (FMSCI) को नेशनल स्पोर्ट्स फेडरेशन में शामिल किया गया। माना जा रहै है कि गौरव गिल को मिले अर्जुन अवार्ड से इस फिल्ड की हालत बदलेगी और इस पर पहले के मुकाबले ज्यादा ध्यान दिया जाएगा। 

Posted By: Shridhar Mishra

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