नई दिल्ली, ऑटो डेस्क। भारत सरकार लोकल मैन्यूफैक्चरिंग को काफी बढ़ावा दे रही है, जहां बहुत से बड़ी ऑटो कंपनियां भारत में अपना प्रोडक्शन प्लांट लगाने की तैयारियों में हैं। फोर्ड मोटर कंपनी ने पिछले साल सितंबर में एक घोषणा कि थी कि वे अब इंडियन मार्केट में इलेक्ट्रिक व्हीकल मैन्यूफैक्चर करने के लिए नए प्लांट की स्थापना करेंगे। हालांकि, अब सूचना मिली है कि कंपनी ने ईवी बनाने वाली योजना को ड्राप कर दिया है।

फोर्ड इंडिया उन 20 अलग-अलग कंपनियों में से एक थी, जिन्हें फरवरी 2022 में घोषित भारत सरकार की प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव स्कीम - पीएलआई योजना के तहत चुना गया था। खबर है कि फोर्ड इंडिया अब अपना आवेदन वापस ले सकती है। फोर्ड ने अब देश में निवेश नहीं करने का फैसला किया है।

मीडिया रिपोर्ट्स की माने तो फोर्ड इंडिया अपने व्यावसायिक मामले में वैल्यूम प्रोजक्शन और इंटरनल टारगेट को कंपलीट करने में सक्षम नहीं है। भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों को विकसित करने की योजना को रद्द करने के निर्णय के पीछे यही मुख्य कारण है। फोर्ड इंडिया अपने कारखाने साणंद, गुजरात और चेन्नई में बेचेगी। कंपनी ने पहले ही दोनों संयंत्रों में उत्पादन बंद कर दिया है। हमने आपको पहले बताया था कि टाटा मोटर्स और फोर्ड इंडिया गुजरात स्थित प्लांट के लिए बातचीत कर रहे हैं। टाटा इस फोर्ड प्लांट में इलेक्ट्रिक कारों को विकसित करने का लक्ष्य लेकर चल रही है।

पिछले महीने मिली जानकारी के अनुसार भारतीय वाहन निर्माता कंपनी टाटा ने भारत में अमेरिकी ऑटो दिग्गज फोर्ट के प्लांट को संभालने के लिए बातचीत कर रहे हैं। टाटा मोटर्स नई अधिग्रहीत प्लांट में अतिरिक्त 2,000 करोड़ रुपये का निवेश करने की योजना बना रही है। घरेलू कार निर्माता का इरादा साणंद कारखाने में 2026 तक दो लाख इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) बनाने का है। फोर्ड तमिलनाडु के मराईमलाई नगर में एक वाहन और इंजन निर्माण प्लांट का भी मालिक है, जो देश में इंजन बानने के मामले में काफी पॉपुलर है।

Edited By: Atul Yadav