नई दिल्ली, पीटीआइ। कई परेशानियों को झेलते हुए ऑटोमोबाइल डीलर्स कार निर्माताओं और सरकार से वर्तमान स्थिति में राहत के लिए तत्काल वित्तीय सहायता की मदद मांग रहे हैं। इंडस्ट्री पहले से ही मंदी की मार झेल रही है और अभी भी डीलर्स के पास बड़ा BS4 स्टॉक बाकी है। ऐसे में डीलर्स को कर्मचारियों और सेल्स इंफ्रास्ट्रक्चर को बनाए रखने के लिए भारी मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा है, कयोंकि देशभर में इस समय लॉकडाउन चल रहा है।

फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन (FADA) ऑटोमोबाइल डीलर्स के संगठन के प्रेसिडेंट Ashish Harsharaj Kale ने कहा कि वे इस मुश्किल वक्त में व्यापार को सामान्य स्थिति में बरकरार रखने के लिए OEMs का सपोर्ट कर रहे हैं। काले ने कहा कि "ऐसे समय में OEMs ने ध्यान रखा और तत्काल तरीके से हमारा बकाया वापस किया। अभी हमें कुछ अपफ्रंट एडवांस भी मिले हैं। वहीं कई OEMs ने हमें काफी अलग फाइनेंशियल सपोर्ट भी करने का ऐलान किया है। हमें भरोसा है कि आने वाले समय में हमारी और मदद की जाएगी।" आगे उन्होंने कहा कि डीलरशिप में कर्मचारियों को बरकारर रखने और रखरखाव के लिए यह मदद बहुत जरूरी है।

काले ने कहा कि "मार्च माह में हमने न तो मैनपावर में कमी की है और न ही कर्मचारियों की सैलरी में कटौती की है, लेकिन अप्रैल में बिना कमाई और कैश फ्लो न होने की वजह से सैलरी देना मुश्किल होता जा रहा है।" आगे कहा कि एगर ऐसे में OEMs सपोर्ट के लिए आगे नहीं बढ़ती तो लॉकडाउन खत्म होने और स्थिति सामान्य होने पर उन्हें अपने सेल्स नेटवर्क में कई मुद्दों का सामना करना पड़ता। उन्होंने कहा कि "इस तरह का समय बहुत अलग है और अपनी जेब से खर्च और मदद चाहिए होगी, क्योंकि लॉकडाउन खत्म होने के बाद उन्हें सेल्स नेटवर्क को फिर से ठीक करना है और स्थिति सामान्य होने पर मैनपावर की ज्यादा जरूरत होगी।

उन्होंने कहा कि Hero MotoCorp और Honda Motorcycle & Scooter India द्वारा हाल ही में बिना बिके BS4 स्टॉक को खरीदने के ऐलान से डीलर्स को काफी राहत हुई है। उम्मीद है कि बाकि OEMs भी अपनी कम्युनिटी की मदद के लिए आगे आएंगी। FADA के पूर्व प्रेसिडेंट और ऑटोमोटिव स्किल्स डेवलपमेंट काउंसिल (ASDC) के प्रेसिडेंट Nikunj Sanghi ने कहा कि OEMs ने सपोर्ट पैकेज दिए थे जो पहले से ही बाकी थे। अभी और कोई सपोर्ट नहीं मिला है तो ऐसे में बिना कैश फ्लो स्थिति का कैसे सामना किया जाए। फिलहाल सैलरी, बिजली बिल, किराया, बैंक ब्याज,  सिक्योरिटी आदि जैसे खर्च उठाने हैं। 

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